संगत का असर

एक शाम अकबर और बीरबल शाही उधान में प्रसन्नतापूर्वक टहल रहे थे | बीरबल ने बादशाह अकबर से टिप्पणी करते हुए कुछ कहा, जो बादशाह को पसंद नहीं आया | परन्तु बीरबल ने इस पैर ध्यान नहीं दिया | वह अप्रत्यक्ष रूप से बादशाह के साथ मजाक करता रहा | कुछ समय बाद जब बादशाह अपने क्रोध पैर काबू नहीं रख पाए तो वे चिल्लाते हुए बोले, “अपने बादशाह की शान में इस प्रकार कहने की तुम्हारी हिम्मत केसे हुई?” यह सच है की में तुम्हारी बुदिमता से प्रभावित होता हु | परन्तु में यह देख रहा हु की तुम अपनी सीमाओं को पार कर रहे हो | में यह देख रहा हु की तुम्हारा व्यवहार असभ्य हो गया है |

और हमेशा की तरह अपनी बुदी का प्रयोग करते हुए वह बादशाह अकबर के सामने झुका और बोला, “महाराज, यह मेरी गलती नहीं है, यह सब मेरी संगत का असर है | आपके साथी आपके व्यवहार को प्रभावित करते है |”

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बंद करो बाल श्रम

कहा गये वो सुंदर फूल

कहा गई वो मुस्कान

कहा उड़ गई सारी धुल

क्यों चुप हो गए गाने

 

झूले अब थम से गए

पिता खड़ा खामोश है

मेंदान भी जम से गए

हर घर आगन मदहोश है

 

बहुत ढूँढा तो पता चला कि

वो सब बच्चे वहा है

जहा पर खुशिया बेरंग है

बचपन जीना मना है

वहा बच्चो से बंगले बनवाये जाते है

चुड़ीयाँ, कंगन, बीडी भी बनवाई जाती है |

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क्यों करते है लोग लक्ष्मी की अंधी उपासना

मनुष्य की ज़रुरतो की पूर्ति के लिए धन बहुत ज़रूरी है इसलिए धन की कामना करना भी स्वाभिक है | इस धरती पैर ऐसा कोई मनुष्य नहीं जिसे धन न चाहिए हो पर प्रश्न तब उठता है जब धन, साधन न रह कर साध्य बन जाता है |

धन का अपने आप में कोई महत्व नहीं है जब तक उससे हमारी ज़रूरते पूरी न हो जैसे भगवान् क्योकि जब तक हमारे पास खुशिया है तब तक भगवान् है और जब कुशिया नहीं भगवान् भी नहीं | ज़रूरत से जयादा धन भी व्यर्थ है अगर वो किसी के काम न आय | आज का समाज बीमार है क्योकि इस समाज में व्यक्ति का सम्मान उसके गुणों और उसकी योग्यता के आधार पर नहीं अपितु धन के आधार पर होता है | निजी और सार्वजनिक समारोहों में धनपति को विशिष्ट स्थान दिया जाता है | प्रशासन में सामान्यत: कोई भी ऐसा कार्य नहीं होता जो धन के बूते न करवाया जा सके | आज के व्यावसायिक समय में हर वस्तु बिकाऊ है अमीर आदमी अपने के बल पर नेतिक और अनेतिक काम करवाने में सक्षम होते है |

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मुर्ख और ज्ञानी

एक दिन एक समस्या को सुलझाने के बाद बादशाह ने बीरबल से कहा, “बीरबल, क्या तुम जानते हो कि एक मुर्ख और ज्ञानी व्यक्ति में क्या अंतर है ?” “जी महाराज में जानता हु | “ बीरबल ने कहा “क्या तुम विस्तार से बता सकते हो ?” अकबर ने कहा | “महाराज, वह व्यक्ति जो … Read more

एकता और फुट

एक जंगल में बटेर पक्षियो का बहुत बड़ा झुंड था | वे निर्भय होकर जंगल में रहते थे | इसी करण उनकी संख्या भी बढती जा रही है |

एक दिन एक शिकारी ने उन बटेरो को देख लिया | उसने सोचा की अगर थोड़े – थोड़े बटेर में रोज पकडकर ले जाऊ तो मुझे शिकार के लिए भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी |

अगले दिन शिकारी एक बड़ा सा जाल लेकर आया | उसने जाल तो लगा दिया, किन्तु बहुत से चतुर बटेर खतरा समझकर भाग गए | कुछ नासमझ और छोटे बटेर थे, वे फंस गए |

शिकारी बटेरो के इतने बड़े खजाने को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था | वह उन्हें पकड़ने की नई – नई तरकीबे सोचने लगा | फिर भी बटेर पकड़ में न आते |

अब शिकारी बटेर की बोली बोलने लगा | उस आवाज को सुनकर बटेर जैसे ही इकटठे होते कि शिकारी जाल फेककर उन्हें पकड़ लेता | इस तरकीब में शिकारी सफल हो गया | बटेर धोखा खा जाते और शिकारी के हाथो पकड़े जाते | धीरे – धीरे उनकी संख्या कम होने लगी |

तब एक रात एक बूढ़े बटेर ने सबकी सभा बुलाई | उसने कहा – “इस मुसीबत से बचने का एक उपाय में जनता हु | जब तुम लोग जाल में फंसे ही जाओ तो इस उपाय का प्रयोग करना | तुम सब एक होकर वह जाल उठाना और किसी झाड़ी पर गिरा देना | जाल झाड़ी के ऊपर उलझ जाएगा और तुम लोग निचे से निकलकर भाग जाना | लेकिन वह कम तभी हो सकता है जब तुममे एकता होगी |”

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प्रेम की नदी है यमुना

हिंदुस्तान में चार धाम माने जाते है – ये धाम है बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, और यमुनोत्री | इनसे जुडी हुई कई पुराणिक और धार्मिक कथाए है | ये महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल भी है | इस चारो धामों में सबसे अधिक प्राक्रतिक सोंदर्य से परिपूर्ण और सबसे कम खचीली यात्रा है यमुनोत्री की |

समुद्र तल से 10,805 फीट की उचाई पर अमुना नदी की उद्गम स्थली यमुनोत्री, उतरांचल के उतर कशी के बीच में सिथत है | यह गंगोत्री के बिरुद्ध दिशा में ऋषिकेश और उतर कशी के बीच में सिथत है | इस तीर्थ स्थल के लिए ऋषिकेश से हनुमान चठी के लिए बसे आदि मिलती है | आगे की शेष यात्रा पैदल, पालकी, टटू या कुलियों की पीठ पर की जाती है | हरिद्वार और क्षेत्र के अन्य मुख्य स्थानों से भी हनुमान चठी आसानी से पहुंचा जा सकता है | इसके दर्शन के लिए बुजुर्ग और अंपग व्यक्ति भी किसी देवी उत्साह से भरे हुए वंहा पहुच कर ही दम लेते है | वे हडिया कंपा देने वाली ठन्ड की भी परवाह नहीं करते | एक तरफ उनकी आस्था है और दूसरी तरफ स्वंय यमुना नदी है है जो गुप्त रूप से बहती हुई मैदानों में उतरती है |

यमुना नदी यमुनोत्री में कालिंद पर्वतों में सिथत च्न्पस्र ग्लेशियर से निकलती है और प्रयाग में आ कर इसका असित्तव गंगा में विलीन हो जाता है | लिकिन इससे इसका महत्त्व जरा भी कम नहीं होता | गंगा यदि आध्यात्मिकता, पवित्रता और पाप से मुक्ति की नदी है तो यमुना प्रेम की प्रतीक है |

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भगवान का न्याय

बीरबल अकबर के दरबार का सबसे बुद्धिमान व् प्रभावशाली मंत्री था | वह अपनी चतुराई और बुधिमत्ता के लिए जाना जाता था |  बादशाह अकबर सदेव उसके कठिन प्रश्न रखते थे परन्तु वह शीघ्र ही उनके सटीक उतर देकर बादशाह को लाजवाब कर देता था |

एक दिन बादशाह अकबर दरबार का कार्य क्र रहे थे | उन्होंने बीरबल से पूछा, ‘बीरबल, बताओ हम भगवान का न्याय कब देख सकते है?”

बीरबल ने कुछ क्षण सोचता रहा | सभी दरबारी और महाराज बीरबल के उतर की प्रतीक्षा कर रहे थे | तब बीरबल बादशाह के समक्ष झुकर बोला, “हम केवल तभी भगवान का न्याय देख सकते है, जब आपके दुवारा सही न्याय नहीं होगा |

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नानक की सीख

वर्ष 1521 में गर्मी के दिनों की शुरुआत थी | मक्का और बगदाद की अपनी यात्रा उरी कर गुरु नानक और उनके साथी मरदाना पेशावर और रावलपिंडी होते हुए अमीनाबाद पहुचे| इससे पहले कि  वे अपने घर कि और बढते वहा बाबर कि सेना का हमला हो गया | जैसे कि उन दिनों प्राय: होता था,हमलावरों ने बहुत जोर-जुल्म किया और उनके लोगो को बंदी बना लिया | गुरु नानक और मरदाना भी केद कर लिए गए |

जब बाबर को पता चला कि एक बहुत पहुचे हुए संत को बंदी बना लिया गया है तो उसने तुरंत उनकी रिहाई का आदेश दिया | लेकिन गुरु नानक ने साफ साफ कह दिया कि जब तक अन्य केदियो को नहीं छोड़ा जाएगा तब तक वे भी कारावास से बाहर नहीं निकलेगे| नके इस निर्णय से चकित हो कर बाबर ने उनसे मिलने कि इच्छा जाहिर कि | गुरु नानक ने निर्भय हो कर धर्म का मर्म समझाया और कहा कि चुकी सभी इन्सान ईश्वर या खुदा कि ही संतान है अत: किसी पर अत्याचार मत करो | बाबर उनसे इतना प्रभावित हुआ कि उनसे तत्काल सभी केदियो को

रिहा कर दिया | हालाँकि इसके बाद भी गुरु नानक ने अमीनाबाद नहीं छोड़ा | वे वहा काफी समय तक उन लोगो के बीच रहे जिन्होंने हमले के दोरान बहुत दुःख-दर्द सहा था | वे उन्हें तरह तरह से सात्वना देते रहे और होसला बंधाते रहे |

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माँ का सपना

सुनाती थी न तुम कहानी

भारत था सोने की चिडिया

बहती थी दूध दही की नदीया,

वही सपना देखती हु में बार बार

उसी सपने को करने साकार

अंतर मन में सुय किरणों को भरती हु माँ

 

कहती थी न तुम की

भारत है देवो की भूमि,

भारत है ज्ञानियों की भूमि,

फिर से राम राजय लाने का सपना

देखती हु में बार बार

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ये बारिश की बुँदे कुछ कहती है

ये बारिश की बुँदे कुछ कहती है

कहती है कुछ ये बारिश की बुँदे

कभी ध्यान से सुनो, कुछ कहती है ये बारिश की बुँदे

कभी ध्यान से सुनो, गुन गुन्नाती है ये बारिश की बुँदे

 

ये बारिश की बुँदे कुछ कहती है

कहती है कुछ ये बारिश की बुँदे

बेठ गई नन्हे पत्तो पर, आसमान से आकर

ये बारिश की बुँदे

हवा चली तो झूम रही है, जाने क्या क्या गाकर

ये बारिश की बुँदे

मोह रही है मन बच्चो का, इंद्रधनुष दिखलाकर

ये बारिश की बुँदे

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