एक कमरे से शुरू हुई कंपनी
यह एक काल्पनिक कहानी है। इसके पात्र और जगहें लेखक की कल्पना से गढ़ी गई हैं। इंदौर के एक पुराने मोहल्ले में, दूसरी मंज़िल का एक कमरा किराए पर था।…
यह एक काल्पनिक कहानी है। इसके पात्र और जगहें लेखक की कल्पना से गढ़ी गई हैं। इंदौर के एक पुराने मोहल्ले में, दूसरी मंज़िल का एक कमरा किराए पर था।…
चंदपुर कस्बे में सेठ घनश्यामदास की हवेली देखकर लोग रुक जाते। बड़े आँगन में तुलसी का चौरा, लाल मिट्टी की दीवारें, और छत पर चमकती टीन की नाली। बाज़ार में…
पहाड़ों की गोद में बसा था एक छोटा-सा गाँव, फूलगढ़। नाम फूलगढ़ था, पर उस साल वहाँ फूल कम ही खिले थे। बारिश देर से आई थी, और जब आई…
राजस्थान में जब रात को ठंडी हवा चलती है और रेत के टीलों पर चाँदनी बिछ जाती है, तब गाँवों में अक्सर किसी ढाढ़ी की सारंगी से एक पुरानी धुन…
शादी वाले घर में शोर कभी थमता नहीं। ढोलक, हलवाई की कड़ाही की छनछन, बच्चों की भाग-दौड़ और हर दो मिनट में किसी की आवाज़, “अरे, कैंची किसने ली?” बारह…
पंपा सरोवर के किनारे, घने जंगल के बीच, मतंग ऋषि का आश्रम था। आश्रम छोटा-सा था। मिट्टी की कुटियाँ, तुलसी के चौरे, और चारों ओर ऐसी शांति कि हवा भी…
काशी की गलियों में सुबह हमेशा घंटियों की आवाज़ से होती थी। गंगा के घाटों पर दीये तैरते, पंडितों के मंत्र गूँजते, और इन्हीं गलियों में एक छोटी-सी लड़की नंगे…
पौष की वह शाम कुछ ज़्यादा ही जल्दी ढल गई थी। सूरज अभी ठीक से डूबा भी नहीं था कि खेतों पर धुंध की चादर बिछने लगी। सिरसा गाँव के…
यह “प्यासा कौआ” की जानी-पहचानी बाल-कथा से प्रेरित एक नई कहानी है, जिसे अपने शब्दों में लिखा गया है। इसके पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं। जेठ का महीना था। दोपहर…
यह एक काल्पनिक कहानी है। इसके पात्र और गाँव लेखक की कल्पना हैं। सोनपुर गाँव के पश्चिमी छोर पर, पीपल के बूढ़े पेड़ के नीचे, पत्थरों से बना एक पुराना…