पुरानी हवेली की तीसरी मंज़िल
यह एक काल्पनिक कहानी है। इसके पात्र, जगहें और घटनाएँ लेखक की कल्पना हैं। नानी की हवेली में घुसते ही नैना को लगा जैसे वक़्त यहाँ आकर रुक गया हो।…
यह एक काल्पनिक कहानी है। इसके पात्र, जगहें और घटनाएँ लेखक की कल्पना हैं। नानी की हवेली में घुसते ही नैना को लगा जैसे वक़्त यहाँ आकर रुक गया हो।…
यह कथा पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है और यहाँ इसे अपने शब्दों में सुनाया गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसके रूप थोड़े अलग मिलते हैं। कार्तिक का महीना था और…
यह एक काल्पनिक कहानी है। इसके पात्र और जगहें लेखक की कल्पना से गढ़ी गई हैं। बिलासगंज के बस अड्डे पर सुबह पाँच बजे सबसे पहले जो चीज़ जागती थी,…
सोनधारा नदी के किनारे बसे छोटे-से गाँव पलाशपुर में माधो नाम का एक लकड़हारा रहता था। घर क्या था, मिट्टी की दो कोठरियाँ और ऊपर खपरैल की छत। घर में…
बहुत पुरानी बात है। एक हरे-भरे जंगल के किनारे एक छोटा-सा गाँव बसा था, और गाँव के आख़िरी छोर पर था रामदीन काका का बाग़। बाग़ में आम थे, अमरूद…