गाँव के कुएँ से आती आवाज़

यह एक काल्पनिक कहानी है। इसके पात्र और गाँव लेखक की कल्पना हैं। सोनपुर गाँव के पश्चिमी छोर पर, पीपल के बूढ़े पेड़ के नीचे, पत्थरों से बना एक पुराना…

सिंहासन बत्तीसी: पहली पुतली रत्नमंजरी

यह सिंहासन बत्तीसी की एक पारंपरिक लोक कथा का अपने शब्दों में किया गया पुनर्कथन है। धारा नगरी के पास एक छोटा-सा गाँव था। गाँव के बाहर खेतों के बीच…

हारकर जीतने वाला धावक

रामगढ़ के स्कूल मैदान में उस दिन धूल कुछ ज़्यादा ही उड़ रही थी। ज़िला स्तर की दौड़ का ट्रायल था, और पूरे गाँव की नज़रें एक ही लड़के पर…

गंगा किनारे देव दीपावली की रात

यह देव दीपावली से जुड़ी पौराणिक मान्यता पर आधारित एक काल्पनिक कहानी है। पात्र और संवाद कल्पना हैं, और कथा का पौराणिक हिस्सा परंपरा में सुनी-सुनाई जाने वाली मान्यता को…

तेनालीराम और चोरों का कुआँ

यह तेनालीराम से जुड़ी एक लोकप्रिय लोक-कथा का अपने शब्दों में किया गया पुनर्कथन है। संवाद और कई घटनाएँ कल्पना पर आधारित हैं। विजयनगर में उस साल गर्मी कुछ ज़्यादा…

दो दोस्त और जंगल का भालू

यह दोस्ती पर एक पुरानी, दुनिया भर में सुनाई जाने वाली सीख-कथा का अपने शब्दों में किया गया पुनर्कथन है। पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं। सोनपुर गाँव में दो लड़के…

राजा हरिश्चंद्र का सत्य

यह राजा हरिश्चंद्र की पौराणिक कथा का अपने शब्दों में किया गया पुनर्कथन है। यह कथा पुराणों और लोक परंपरा से आती है, इसे ऐतिहासिक घटना के रूप में न…

अकबर बीरबल: सबसे बड़ा हथियार

यह अकबर-बीरबल की एक लोकप्रिय पारंपरिक कहानी का अपने शब्दों में किया गया पुनर्कथन है। सर्दियों की एक सुनहरी सुबह थी। फ़तेहपुर सीकरी के दरबार में धूप छनकर आ रही…

विक्रम बेताल: किसका पाप बड़ा

यह विक्रम-बेताल की एक पारंपरिक लोक कथा का अपने शब्दों में किया गया पुनर्कथन है। अमावस की रात थी। श्मशान में चिताओं की राख अब भी कहीं-कहीं सुलग रही थी,…

पुरानी हवेली की तीसरी मंज़िल

यह एक काल्पनिक कहानी है। इसके पात्र, जगहें और घटनाएँ लेखक की कल्पना हैं। नानी की हवेली में घुसते ही नैना को लगा जैसे वक़्त यहाँ आकर रुक गया हो।…