एकता और फुट

एक जंगल में बटेर पक्षियो का बहुत बड़ा झुंड था | वे निर्भय होकर जंगल में रहते थे | इसी करण उनकी संख्या भी बढती जा रही है |

एक दिन एक शिकारी ने उन बटेरो को देख लिया | उसने सोचा की अगर थोड़े – थोड़े बटेर में रोज पकडकर ले जाऊ तो मुझे शिकार के लिए भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी |

अगले दिन शिकारी एक बड़ा सा जाल लेकर आया | उसने जाल तो लगा दिया, किन्तु बहुत से चतुर बटेर खतरा समझकर भाग गए | कुछ नासमझ और छोटे बटेर थे, वे फंस गए |

शिकारी बटेरो के इतने बड़े खजाने को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था | वह उन्हें पकड़ने की नई – नई तरकीबे सोचने लगा | फिर भी बटेर पकड़ में न आते |

अब शिकारी बटेर की बोली बोलने लगा | उस आवाज को सुनकर बटेर जैसे ही इकटठे होते कि शिकारी जाल फेककर उन्हें पकड़ लेता | इस तरकीब में शिकारी सफल हो गया | बटेर धोखा खा जाते और शिकारी के हाथो पकड़े जाते | धीरे – धीरे उनकी संख्या कम होने लगी |

तब एक रात एक बूढ़े बटेर ने सबकी सभा बुलाई | उसने कहा – “इस मुसीबत से बचने का एक उपाय में जनता हु | जब तुम लोग जाल में फंसे ही जाओ तो इस उपाय का प्रयोग करना | तुम सब एक होकर वह जाल उठाना और किसी झाड़ी पर गिरा देना | जाल झाड़ी के ऊपर उलझ जाएगा और तुम लोग निचे से निकलकर भाग जाना | लेकिन वह कम तभी हो सकता है जब तुममे एकता होगी |”

Read more

प्रेम की नदी है यमुना

हिंदुस्तान में चार धाम माने जाते है – ये धाम है बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, और यमुनोत्री | इनसे जुडी हुई कई पुराणिक और धार्मिक कथाए है | ये महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल भी है | इस चारो धामों में सबसे अधिक प्राक्रतिक सोंदर्य से परिपूर्ण और सबसे कम खचीली यात्रा है यमुनोत्री की |

समुद्र तल से 10,805 फीट की उचाई पर अमुना नदी की उद्गम स्थली यमुनोत्री, उतरांचल के उतर कशी के बीच में सिथत है | यह गंगोत्री के बिरुद्ध दिशा में ऋषिकेश और उतर कशी के बीच में सिथत है | इस तीर्थ स्थल के लिए ऋषिकेश से हनुमान चठी के लिए बसे आदि मिलती है | आगे की शेष यात्रा पैदल, पालकी, टटू या कुलियों की पीठ पर की जाती है | हरिद्वार और क्षेत्र के अन्य मुख्य स्थानों से भी हनुमान चठी आसानी से पहुंचा जा सकता है | इसके दर्शन के लिए बुजुर्ग और अंपग व्यक्ति भी किसी देवी उत्साह से भरे हुए वंहा पहुच कर ही दम लेते है | वे हडिया कंपा देने वाली ठन्ड की भी परवाह नहीं करते | एक तरफ उनकी आस्था है और दूसरी तरफ स्वंय यमुना नदी है है जो गुप्त रूप से बहती हुई मैदानों में उतरती है |

यमुना नदी यमुनोत्री में कालिंद पर्वतों में सिथत च्न्पस्र ग्लेशियर से निकलती है और प्रयाग में आ कर इसका असित्तव गंगा में विलीन हो जाता है | लिकिन इससे इसका महत्त्व जरा भी कम नहीं होता | गंगा यदि आध्यात्मिकता, पवित्रता और पाप से मुक्ति की नदी है तो यमुना प्रेम की प्रतीक है |

Read more

आत्मा से बातचीत

हिन्दू धर्म को मानने वाले आज परंपरा और सचाई के बीच फसे हुए है | यह हिन्दू धर्म की एक बड़ी कमजोरी है | इसी से इसका सामाजिक विकास रुक सा गया है | हमे हमेशा सचाई का दामन पकड़े रहना चाहिए क्योकि सचाई ही हमारा मार्गदर्शन करती है | भगवान कभी भी यह नहीं कहता की में परंपरा को मानने वाला हू, वह हमेशा कहता है कि में सचाई को मानता हू |

सचाई सचाई सबसे ऊपर है, जीवन में इससे बढ़ का कुछ भी नहीं है | मानव जाती का इतिहास भी रीती – रिवाजो और प्रथाओ के इर्द गिर्द घूमता रहा है | रीती – रिवाजो और प्रथाए समय के साथ बदलती जाती है और कुछ समय बाद अपना उदेश्य खो देती है और उदेश्य खोते ही म्रतप्राय हो जाती है | हिंदुत्व हमेशा से इन पुरानी परंपराओ और रीती रिवाजो से निकलने कि चुनोती का सामना करता रहा है और इनसे मुकत होने कि कोशिश हमेशा जरी रहेगी |

आज का विधार्थी कल का नागरिक होता है और शीषक कि यह जिम्मेदारी होती है कि वह हर विधार्थी को एक अच्छा इन्सान बनाए | शीषक को अपने विधार्थीयो को या शिक्षा देनी चाहिए कि वे कुछ देर बिलकुल एकांत में बैठे और उस एकांत में अपने आप से यानि अपनी आत्मा के साथ संपर्क स्थापित करे| इस चिंतन से विधार्थीयो को अपने विचारो को एकत्र करने, उन्हें पुनर्जीवित करने और व्यकित्त्व का विकास करने में सहायता मिलती है | सबसे बड़ी बात है कि आत्मा चिंतन करने से अपने आपको पहचानने यानि अपनी आचइयो और बुराइयों का विस्लेष्ण करले में मदद मिलती है |

Read more

आज्ञाकारी बीरबल

बीरबल अकबर के दरबार का सबसे ईमानदार और वफादार मंत्री था | एक बार बादशाह अकबर कि सबसे प्रिय पत्नी ने बादशाह से मिलने के लिए अपना सेनिक संदेश लेकर भेजा क्योकि बादशाह सही दरबार में थे, इसलिय वह संदेश लेकर दरबार में ही पहुच गया | बादशाह ने सोचा कि में कार्य समाप्त करके ही जाऊगा | कुछ समय पश्चात महारानी ने संदेश भेजा | बादशाह अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे | इसलिय वह तुरंत कार्य छोड़ कर चलने लगे | बादशाह कि रानी से मिलने कि उत्सुकता को देखकर बीरबल अपनी मुस्कुराहट नहीं रोक पाया | उसे इस प्रकार मुस्कुराता देख बादशाह क्रोधित हो गए |

“मुझ पर इस प्रकार हंसने कि तुम्हारी हिम्मत केसे हुई ? तुम्हे तुम्हारे इस व्यवहार के लिए दंड दिया जायगा | में तुम्हे आदेश देता हु कि तुम अपने पैर जमीन पैर नहीं रखोगे | तुम यहाँ से चले जाओ|”

Read more

लोभ का फल

एक साधू तीर्थयात्रा पर निकले | वह मार्ग में पड़नेवाले गावो और कस्बो में ठहरते जाते थे | जहा जो भी भक्त उन्हें प्रेम और आदर से बुलाते, चले जाते |

एक गाव में एक ऐसा भक्त मिला जिसने उन्हें एक गाय दान दे दी | वह बोला – “महाराज | इसे आप साथ रखिए | रास्ते में घास – पात लेगी और आपको दूध भी देगी |”

साधू ने गाय ले ली और आगे चल पड़े | अभि कुछ देर ही गए होगे की एक व्यापारी मिला | वह भी साधू के साथ साथ चलने लगा | व्यापारी ने साधू को अपना परिचय दिया | फिर उत्सुकतावश पूछ बेठा – “ यह गाय लेकर आप तीर्थयात्रा के लिए क्यों निकले है?”

साधू ने कहा – “में तो अकेला हु चला था | परंतु एक भक्त ने इसे भी साथ कर दिया ताकि दूध मिलता रहे |”

व्यापारी ने देखा की गाय बहुत सुन्दर है | दूध भी काफी देती होगी | अगर किसी तरह इसे में खरीद लू तो इसके अछे दाम मिल जायगे | यह सोचकर बोला – महाराज | आपके लिए भला दूध की क्या कमी है ? जिस गाव में डाल देगे, वहा भकत लोग दूध –ही-दूध ले आएगे | पैर इतना ज़रूर है की जंगल का मामला है | अगर गाय को खतरा हो गया तो व्यथ ही आपको पाप लगेगा | मेरी बात मानिए, आप इसे बेच दीजिए |”

Read more

चूहे का व्यापारी

वाराणसी में एक सेठ था | एक दिन वह दुकान कि और जा रहा था | रास्ते में एक मरा हुआ चूहा पड़ा था | उसे देखकर वह एक क्षण के लिए रुक गया | वह उस चूहे को देखते हुए कुछ सोचने लगा |

नगर सेठ, क्या सोच रहे हो?” किसीने पूछा |

यही सोच रहा हू कि यदि कोई समझदारी से काम करे तो इस चूहे को बेचकर भी लखपती बन सकता हे|

नगर सेठ की  बात एक गरीब बनिये ने सुन ली | नगर सेठ के जाते ही उसने वह चूहा उठा लिया और बाजार में घूमने लगा | तभी एक महाजन ने अपनी बिल्ली के भोजन के लिए वह चूहा खरीद लिया |

बनिये ने उन पैसो से थोडा गुड और घडा खरीदा | घड़े में पानी भरकर वह एक मार्ग पैर बेठ गया | जंगल से लोटनेवाले लकडहारे और माली उसी मार्ग से आते थे | थके हुए लकडहारे तथा माली गुड खाकर और पानी पीकर बहुँत प्रसन्न हुए | उन्होंने उसे बदले में लकडिया और फूल दिए | बनिये ने लकडिया और फूल बेचकर फिर पैसे कमाए |

उसी मार्ग पर प्रत्येक दिन नियमित रूप से जा बेठता | कुछ दिनों बाद उसने घास काटनेवालो को भी पानी पिलाना शुरु कर दिया | बदले में वह उनसे घास का एक – एक पूरा लेने लगा |

Read more

बीरबल की बेटी

एक दिन बीरबल की बेटी ने बादशाह से मिलने के लिए बहुत जोर दिया | वह 11 वर्ष की थी | वह भी अपने लिटा के समान बुद्धिमान तथा चतुर थी | बीरबल ने उसे खुश करने के लिए महल में ले गया | महल में जाकर उसने सभी कक्ष तथा शाही उधान देखे | उसके बाद वह शाही दरबार में गई | उस समय बादशाह दरबार में बैठे थे | उन्होंने बीरबल की बेटी को देखा तथ उसका स्वागत किया | उसके बाद वह भोजन करने चली गई | भोजन के बाद बादशाह ने उससे पूछा, “बेटी क्या तुम जानती हो कि किस प्रकार बात करनी चाहिए “

“जी महाराज, न अधिक न ही बहुत काम” और यह जवाब सुनकर बादशाह हेरान हो गए, उन्हें समझ नहीं आया कि वह क्या बताना चाहती है, इसलिय उन्होंने उससे पूछा, “तुम क्या कहना चाहती हो, बेटी |”

Read more

समय की कीमत

एक शहर में एक परिवार रहता था | पति-पत्नी और उनकी एक प्यारी सी बेटी | पति हर रोज़ की तरह अपने दफ्तर जाता और रात में घर आता | एक दिन वो देर रात से घर आया और  दरवाज़ा खटखाया और तभी उसकी ६ वर्षीय बेटी ने दरवाज़ा खोला और या देख कर उसको आश्रय हुआ की उसकी बेटी अभी तक सोई नहीं |

जैसे बचो की आदत होती है घर आते ही अपने माँ पाप से लिपट जाते है और बाते करना शुरु कर देते है उसी तरह उसकी बेटी ने भी वही किया | अन्दर  घुसते  ही  बेटी ने  पूछा —“ पापा पापा क्या  मैं  आपसे  एक प्रशन पूछ  सकती हू |

पिता ने कहा: हा बिलकुल बेटी | तो बेटी ने पूछा की आप एक दिन में कितना कमा लेते हो |

पिता का उसका ये सवाल अच्छा नहीं लगा पर फिर भी पिता ने उसको बता दिया और फिर बेटी ने दुबारा पूछा की पापा पापा आप एक धंटे में कितना कमा लेता हो | बस यह सुन कर पिता आग बबूला हो गया और अपनी बेटी तो डानट दिया और यह कह कर वो अपने कमरे में चला गया |

Read more

राजा का त्याग

एक बार काशी नरेश ने कोसल पर आक्रमण करके उस पर अधिकार कर लिया | कोसल के रह ने आत्मसमर्पण नहीं किया और वहा से पलायन कर गए | कोसल की प्रजा अपने राजा के जाने से अत्यंत दुखी थी और उनमें हमेशा याद करती रहती थी |

काशी नरेश को यह सहन नहीं हुआ | उन्होंने घोषणा की कि जो कोई भी कोसल के पराजित राजा को जीवित पकड़कर उनके सामने लाएगा, उसे पर्याप्त धन दिया जायगा और कोसल का मंत्री नियुकत कर दिया जायगा | इस घोषणा का प्रजा पर कोई असर नहीं पड़ा | उधर कोसल के राजा जंगलो में भटक रहे थे | एक दिन उनकी मुलाकात एक भिखारी जैसे व्यक्ति से हुई | राजा ने उसका परिचय पूछा तो बोला, में बहुत बड़ा, व्यापारी था मगर मेरा जहाज पानी में डूब गया, जिससे मेरा सारा माल बहगया और में दाने दाने का मोहताज हो गया हू | अब में कोसल के राजा के पास मदद मागने जा रहा हू | यह सुनकर राजा अत्यंत द्रवित हो गया | उन्हें काशी नरेश कि घोषणा का पता चल गया था, सो उन्होंने इस व्यक्ति की सहायता की एक योजना बनाई |

Read more

जीने की चाह

आज जो कहानी में लिखने जा रहा हू वो बिलकुल सत्य है | यह कहानी जायदा पुरानी नहीं है एक परिवार था जिसमें पति – पत्नी और उनके तीन बच्चे २ लड़के और १ लड़की है | बहुत ही खुश थे वो लोग और अपनी ज़िन्दगी अच्छी तरह से व्यतित कर रहे थे | पति अपने दफ्तर जाता, पत्नी घर पर रहती और बच्चे भी अपने काम पर जाते | अच्छे से व्यतित कर रहे थे अपना जीवन | पर एक दिन पति को कुछ तकलीफ हुई और वो डॉक्टर के पास गए, डॉक्टर ने उन्हें कुछ test कराने को कहा और उन्होंने कराये भी | उनको इसका अनुमान भी ना था की उनको हुआ क्या है, और तभी डॉक्टर ने कहा की आप के पेट में एक मास का टुकडा है जिसका अकार एक गेंद की भांति है | और यह cancer है पर वो इन्सान बिलकुल भी नहीं डरा और घबराया क्योकि उसको जीने की चाह थी | जिमेदारी थी उसके कंधो पर, उसने डॉक्टर को कहा: डॉक्टर साहब आप बस मुजहे दवाई दी जिए बाकि सब में संभाल लुगा | फिर उस व्यक्ति ने दवाई लेनी शुरू कर दी और अपनी ज़िन्दगी व्यतीत करने लगा | जैसे उसको कुछ हुआ ही नहीं था एक आम आदमी की तरह अपनी ज़िन्दगी व्यतीत कर रहा था उसकी बेटी की शादी तो पहले ही हो चुकी थी अब उसने अपने पहले बेटे की भी शादी कर दी, धीरे-धीरे वक़्त बीतता गया और 6 साल बीत गए इस बात को | अब वो अपनी सरकारी नौकरी से भी retire हो चुका था | अब उस व्यक्ति ने अपने छोटे बेटे की शादी भी तय कर दी थी पर अब उसकी हालत पहले जेसी नहीं थी, वो शरीर से बहुत जादा कमज़ोर हो चुका था | जयदा घूम फिर नहीं सकता था पर फिर भी उसने कभी किसी से इस बात का जीकर नहीं किया, बस अपनी जिमेदारी घर के लिए और जिस संस्था से जुड़ा हुआ था उसके लिए काम करता चला गया |

Read more