पालतू कुता

एक व्यक्ति के पास एक समझदार तथा वफादार कुता था | वह उस कुते को बहुत प्यार करता था | वह दिन रात मुस्तेदी से अपने मालिक के कारखाने की देखभाल किया करता था |

एक दिन सड़क पार करते हुए वह तेजी से जाती हुई कर के नीचे आ गया | उसकी दोनों पिछली टागे बुरी तरह जख्मी हो गई | डॉक्टरों ने उसका बहुत इलाज किया परन्तु वे उसकी टागों को ठीक नहीं कर पाए | अब बाकि की जिन्दगी उसे घसीटते हुए कटनी थी क्योकि अब वह कारखाने की ठीक ढंग से देखभाल करने में असमर्थ था |

कुछ दिनों बाद, एक दिन उसे कारखाने के अहाते में उगे अदरक की महक आई | अदरक उजाड़ स्थान पर लगा था जहा कोई नहीं जाता था किसी तरह वो कुता वहा गया और अपने पंजो से जमीन कुरेदने लगा |

Read more

धोखे की सजा

एक बार की बात है | की व्यक्ति के जीवित रहने की उम्मीद बिल्कुल समाप्त हो गई थी | उसने भगवान से विनती की कि यदि वह जीवित बच गया तो सो बेलो की बली भगवान को देगा | और भगवान ने उसकी विनती स्वीकार कर ली तथा वह व्यक्ति ठीक होने लगा |

परन्तु ठीक होने के बाद उस व्यक्ति में लालच आ गया और उसने बेलो की मुर्तिया बनवाई और वेदी पर रखकर उनमे आग लगा दी | तब उसने प्रार्थना की, “ओ स्वर्ग में रहने वाले भगवान, मेरी भेंट स्वीकार करो |”

भगवान यह देख क्र नराज हो गए हो उसे सबक सिखाने की लिए एक उपाय किया | उसी रात भगवान ने उस व्यक्ति को उसके सपने में दर्शन दिए और कहा – “हे मानव, समुंद्र किनारे जाओ और वहा पर तुम्हारे लिए सो मुद्रए रखी है |”

Read more

कथनी और करनी

एक गरीब बुढा था | उसके कोई सन्तान नहीं थी | बुढ़ापे में उसकी देखभाल करती | अत: उसे स्वंय मेहनत – मजदूरी करके अपना पेट पालना पड़ता था |इसलिए वह रोज जंगल से लकडिया काटकर लाता तथा उन्हें शहर में बेचता था |

अक्सर परेशानी में वह बुढा एक ही बात कहता, “इससे तो अच्छा है की यमराज मुझे उठा ले |” एक दिन बुढा बीमार पड़ गया | परन्तु लकडिया काटने के किए जैसे-तेसे लकडिया काटकर उनका गट्ठर बनाया और उसे उठाकर गाँव की तरफ चल दिया और जल्दी ही वह थक गया | उसने लकडियो का गट्ठर जमीन पर पटकते हुए कहा, “ इससे तो अच्छा हो यमराज उठा ही ले मुझे |”

ठीक उसी समय यमराज वंहा से गुजरे | बूढ़े के दर्द भरे शब्द सुनकर उन्हें दया आ गई | उन्होंने सोचा क्यों न इस बूढ़े को अपने साथ ले ही जाऊ | इसे इसके दर्दो से भी मुक्ति मिल जायगी | यमराज बूढ़े के समक्ष प्रकट हुए और साथ चलने को कहा | बुढा अपनी बात से तुरंत मुकर गया और कहने लगा  “मेने तो गट्ठर उठाने के लिए मदद मांगी थी |”

Read more

बेलो की नासमझी

बहुत समय की बात है, जंगल में चार बेल रहते थे | उनका आपस में बहुत प्रेम था | वे आपस में घूमते, साथ खाते पीते और कभी भी झगड़ा नहीं करते थे | उसी जंगल में शेर भी रहता था | बेलो को देखकर वह उन्हें खाने के लिए नए नए उपाय करता, ताकि वह उन्हें खा सके | पर उन चारो को एक साथ देख कर निराश हो जाता था |

और एक दिन उसने चारो बेलो को लड़ाने का उपाय सोच लिया | वह उन चारो बेलो के पास जाकर इधर-उधर घुमने लगा | बेल उसे अपने इतने पास घूमता देखकर डर गए | घबराहट के कारण वे एक दुसरे से अलग हो गए | बस शेर को तो इसी मोके की तलाश में था | वह बारी-बारी से एक-एक बेल के पास गया और उनके कान में कुछ कहा – “कुछ नहीं” और फिर वहा से चला गया और दूर कही पेड़ के पीछे छिप गया | अब क्या था चारो बेल यह जानने को उसुक्त थे की शेर ने उनके कान में क्या कहा |

Read more

क्या बदल रहा है देश

सब कहते है देश बदल रहा है जाग रहा है देश

सब कहते है देश बदल रहा है जाग रहा है देश

पर कोई तो बताए कहा बदल रहा है देश

कल भी अत्याचारी थे आज भी है और कल भी होगे

पहले भी बलत्कार होते थे, आज भी होते है और कल का पता नहीं

तो कहा बदल रहा है देश

और कोन बदलेगा ये देश,

आप, में, या फिर वही नेता लोग जो

पहले भी लुटते थे, आज भी और कल भी लुटेगे

तो कहा बदल रहा है देश ||

 

बड़ा अजब है ये देश,

एक लडकी के साथ बलत्कार होता है और लोग तमाशा देखते है उस समय,

एक लडकी के साथ बलत्कार होता है और लोग तमाशा देखते है उस समय,

और अगले ही दिन प्रदशन करते है,

और फिर वही लोग उसी रात किसी और के साथ करते है बलत्कार

और फिर कहते है देश जाग रहा है, बदल रहा है देश ||

Read more

आज्ञाकारी पति

एक दिन बादशाह अकबर व बीरबल वेश बदलकर आगरे की सडको पर घूम रहे थे | तभी उन्होंने देखा की एक ओरत जोर – जोर से चिल्ला रही थी | वह आदमी से ख रही थी, “तुम एक पति होने के लायक नहीं हो | यहाँ से चले जाओ | मेरे दिए गए कम को पूरा किए बिना इस घर में कदम नहीं रखना |”

यह सब देखकर बादशाह ने बीरबल से पूछा, “ आदमी कोई  जवाब क्यों नहीं दे रहा| चुपचाप सबकुछ क्यों सुन रहा है? वाद शक्तिशाली है, ओरत पर पलट कर चिल्ला सकता है | वह ऐसा क्यों नहीं कर रहा है?” महाराज, सभी पति ऐसे ही होते है| सभी पति अपनी पत्नी की कहा मानते है और ऐसा ही उन्हें करना पड़ता है क्योकि यही शादी का सत्य है|”

अगले ही सुबह बादशाह ने शादीशुदा व्यक्तियों को महल में बुलाया | सभी के इकट्ठा होने पर वह बोले, “सभी पति जो अपनी पत्नियों की आज्ञा मानते है मेरे दायी तरफ खड़े हो जाए और जो मानते है वो बायीं  तरफ खड़े हो जाए |”

Read more

खरगोश और कछुआ

बहुत पुरानी बात है | एक गाँव था | उस गाँव के समीप एक नदी बहती थी | नदी के दूसरी तरफ घना जंगल था | उस जंगल में खरगोश रहता था | एक दिन की बात है | नदी में कही से एक बड़ा खरगोश आकर रहने लगा | खरगोश और कछुआ दोनों में दोस्ती हो गई | एक दिन खरगोश से पूछा की तुम क्या क्या जानते हो? कछुए ने खरगोश से घमंड से कहा – में बहुत से विद्याये जनता हु | खरगोश ने मुंह लटकाकर कहा – “ में तो केवल एक ही विदया जानता हु |”

खरगोश और कछुआ दोनी हर रोज साथ-साथ खेलते थे | एक दिन किसी मछुआरे ने नदी में जाल डाला | उस जाल में कछुआ भी फंस गया | उस दिन वह खरगोश के पास नहीं पहुच सका | खरगोश को चिंता हुई | वह कछुए से मिलने नदी पर गया | खरगोश ने देखा कछुआ मछुआरे के जाल में फंसा हुआ चटपटा रहा है | यह देखकर खरगोश चुपके से छिपते-छिपाते कछुए के पास गया और उससे कहने लगा – “दोस्त, क्या हुआ तुम तो बहुत सारी विदया जानते हो, कोई उपाय का जाल से बाहर आ जाओ |”

कछुए ने बहुत कोशिश किम परन्तु वो जाल से बहार न निकल पाया | उसने खरगोश से मदद मागी –“ दोस्त अब तुम ही मेरी जान बचा सकते हो | दया करो, मुझे यहाँ से बाहर निकालो | खरगोश ने कछुए से कहा, जब मछुआरा यंहा आए, तो तुम मरने का नाटक करना | वह तुम्हे मरा हुआ जानकर जाल से निकलकर नदी के बाहर रख देगा | उसी समय तुम नदी में चले जाना | कछुए ने ऐसा ही किया | मछुआरे ने कछुए को मरा हुआ जानकर उसे जाल से निकलकर नदी के बाहर जमीन पर रख दिया | फिर रस्सी उठाने झाड़ी की और चला गया |

Read more

समझदार बंदर

बहुत पुरानी बात है | किसी जंगल में एक बंदर रहता था | वह बहुत समझदार व् चतुर था | वह एक पेड़ से दुसरे पेड़ पर उछलता – कूदता रहता था | इस खेल में उसे बहुत अच्छा लगता था | एक बार वह जंगल घुमने निकला| घूमते हुए उसे जंगल में एक थेला मिला | थेले में एक कंधा और एक शीशा था | उसने कंधा उठाया और उसे उलट-पलटकर देखने लगा | पर उसे कुछ समझ नहीं आया, इसलिए बेकार समझकर उसने कंधा फ़ेंक दिया |

इसके बाद उसने शीशा उठाया | उसे भी उलट-पलटकर देखने लगा पर तब भी उसे कुछ समझ नहीं आया पर अचानक उसे शीशे में अपना चेहरा देख कर उसे समझ आ गया की जो भी उसके सामने आयगा इसमें दिखाई देगा | फिर उसने सोचा की इसका में क्या करू? कुछ देर सोचने के बाद उसने वह शीशा वापस थेले में डाल दिया और आगे चल पड़ा | पर अब उसी चाल कुछ बदली हुई थी | रास्ते में उसे भालू मिला | वह बोला –“अरे ओ बंदर, इतना अकडकर क्यों चल रहा है ?” भालू की बात सुन बंदर बोला – “में तो ऐसे ही अकडकर चलूगा | तू क्या कर लेगा मेरा? तेरे जैसो को तो में अपने थेले में रखता हु |”

उसी समय जंगल का राजा शेर भी वहा आ गया | शेर ने भालू से पूछा – “तुम दोनों क्यों लड़ रहे हो?” भालू ने शेर के सामने हाथ जोडकर कहा – महाराज ! यह बंदर अकड रहा है | भालू की बात सुनकर शेर ने बंदर अकड़कर पूछा – “अरे ओ बंदर | क्या यह सच है ?” बंदर ने शेर से भी अकड़ते हुए कहा – “क्यों न अकडू | में सबसे ताकतवर हु |”

Read more

पछतावे के आँसू

संजय बहुत अच्छा बच्चा था पर उसको चोरी करने की बहुत बुरी आदत थी अध्यापक महोदय उसे कई बार दंड भी दे चुके थे और कई बार धमकी भी दे चुके थे | परंतु फिर भी वो बच्चो के बस्तों से उनकी चीजे खो जाती थी | सभी का शक संजय पर ही था की उनके बस्तों से वही चीजे चुराता है | और एक दिन आखिर एक दिन अध्यापक ने संजय को तेज आवाज में डांटते हुए कहा, यदि अब किसी भी बच्चे का सामान चोरी हुआ, तो तुम्हे में पाठशाला से निकाल दुगा |

इस बात को कुछ दिन बीत गए और एक दिन एक बच्चा अचानक रोने लगा | अध्यापक के पूछने पर उसने बताया की उसकी गणित की किताब खो गई है | यह सुन अध्यापक महोदय बहुत नराज हुए और उन्होंने उस बच्चे को सबके बसते में अपनी किताब ढूंढने को कहा | सभी के बस्तों में देखने के बाद आखिर किताब पंकज के बसते में से मिली | यह देख कर अध्यापक को बहुत आश्चर्य हुआ की पंकज जैसा ईमानदार और मेहनती बालक भी चोरी क्र सकता है | पूरी कक्षा में सन्नाटा सा छा गया हो, सब एकदम चुप होकर इधर-उधर देखने लगे, क्योकि किसी को भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था की पंकज जैसा बच्चा ऐसा कर सकता है | इसलिए अध्यापक ने भी उसे कुछ नहीं कहा सिर्फ आगे से ऐसा न करने को कहकर बेठा दिया |

कुछ देर बाद अध्यापक के बाहर जाते ही संजय ने पंकज से पूछने लगा –“अरे | किताब तो मेने चुराई थी, लेकिन वह तुम्हारे बस्ते में कैसे चली गई?”

Read more

भगवान सबको देखता है |

एक किसान था | उसका एक बेटा था रामू | एक दिन को बात है, किसान अपने खेत में काम कर रहा था | रामू भी वही था | पड़ोंसी के खेत में गाजर उगी हुई थी | रामू ने वहा जाकर एक गाजर खींचकर निकल ली | गाजर खींचते देख किसान अपने बेटे से बोला – “बेटा | वह खेत दुसरे किसान का है | तुमने उसके खेत से गाजर क्यों निकाली ??

रामू बोला – “में जानता हु, यह हमारा नहीं है | यह खेत राधे काका का है, परंतु काका इस समय नहीं नहीं |” बेटे की बात सुन किसान बोला – “बेटा, राधे ने तुम्हे नहीं देखा, परंतु भगवान तो देख रहा है | वह सबको देखता है |” रामू को अपने पिता की कही बात समझ आ गई |

एक बार की बात है, बरसात नहीं हुई | बरसात न होने से सभी किसानो के खेत सुख गए | खाने के लिए भी किसी के घर में अनाज नहीं था | सभी किसान बहुत परेशान थे |

भूख से बेचेन ही रामू को पिता सोचने लगा – “क्या करू? अनाज कंहा से लाऊ?” गाँव में केवल पड़ोसी राधे के खलियान में ही अनाज था | पिछले साल उसके खेत में गेहू की खूब पैदावार हुई थी | रामू के पिता ने राधे के खलियान से अनाज चोरी करने जी योजना बनाई |

Read more