अकबर की गिनती महान बादशाहों में होती है | वो बहतु बड़े योधा, बुदिमान और दूरद्रष्ट थे | बादशाह अकबर में कोई कमी न थी एक को छोड़ कर और वो था उनका अंहकार |
बादशाह सभी धर्मो को मानते थे | इसी के चलते, एक दिन रामायण की चर्चा हो रही थी की अचानक बादशाह अकबर खड़े हो गए और बोले में ही राजा राम का अवतार | यह सुनकर सभी हिन्दू विद्वान डर गए | सभी हिन्दू कानाफूसी करने लगे की बादशाह अकबर एक नश्वर मनुष्य और वह भी एक मुसलमान | वो ऐसी बात कैसे कह सकते है | पपरन्तु सब डरते थे की उनसे यह कहे कोन, पर बताना भी जरूरी था पर कहे तो कहे कैसे और क्यों कहे ? सभी हिन्दुओ के मनो में सब सही चल रहा था |
उनमे एक ऋषि महेश दास भी था | उसने सभी हिन्दुओ को बाते सुनी और उन से कहा, “तुम लोग चिंता मत करो, कल तुम मुझे दरबार ले चलना | हो सकता है की में बादशाह को बटा सकू वे भगवान राम नहीं है|”
यह सुनकर सभी हिन्दू उन पर हसने लगे | अगले दिन वैसा ही हुआ | महेश दास बादशाह के दरबार में पहुचे | उन्हें देख कर बादशाह ने पूछा, “तुम क्यों हो नोजवान, और ये आप विद्वानो के बिच में क्या कर रहा है |”
यह सुनकर महेश दास बोला, “महाराज गुस्ताखी माफ, परन्तु अगर आप बुद्धिमानी का अंदाजा उसकी उम्र, और सफेद बालो से करते है तो में अभो जा कर एक ऐसी जीज लाता हु | और वो दरबार से चले गए | कुछ देर बीतने के बाद महेश दरबार में एक बकरा ले कर आ गए | “
यह देखर कर सभी दरबारी डर गए और सोचने लगे की अब बादशाह अकबर क्या करेगे, परन्तु बादशाह अकबर यह देखकर मुस्करा पड़े और बोले, “तुम्ह्रारी हाजिर जवाबी का जवाब नहीं”
महेश दास के पास एक जग और कुछ पत्थर थे बादशाह अकबर ने पूछा, यह क्या है और किसलिए यहाँ लाये हो तुम इसे”