हिमाचल में छोटा सा गाँव था उस गाँव का रास्ता दो पहाड़ो से बीच में से हो कर गुजरता था एक दिन की बात है सोनू अपने स्कूल से वापिस आ रहा था की उसने देखा एक बड़ा सा पत्थर सडक के बीचो – बीच गिरा हुआ था |
वह देखकर सोचने लगा – “यदि कोई गाड़ी इस से टकरा गई तो अनर्थ हो जाएगा | पर में इसे कैसे साइड करू | वह कोशिश करने लगा, परन्तु वह कर न सका क्योकि पत्थर बहुत भारी था वह इधर – उधर देखने लगा और उसे दूर से आता अपना दोस्त रमेश दिखा | उसने रमेश को आवाज दी और बुला लिया |
भाई रमेश, यह पत्थर सडक के बीच में पड़ा है और बहुत भारी भी है | में अकेला इसे नहीं हटा पा रहा हु | क्या तुम मेरी मदद करोगे इसे हटाने में | यह भलाई का काम है और अगर हमने ऐसा नहीं किया तो अनर्थ हो जाएगा और दोनों बच्चे मिलकर उस पत्थर को हटाने लगे |
इतने में ही वहा एक गाड़ी आ गई | उसने इन बच्चो को देखा और बोला, “तुम भले बच्चे हो और तुम ने बहुत मुशिकलो से इतने बड़े पत्थर को हटा दिया | तुम दोनों के इस काम ने बहुत लोगो को जान बचाई है | यह कहकर उसने जेब से कुछ रूपये निकाले और बच्चो को देने चाहे |
यह देखकर सोनू बोला, “नहीं सेठ, हम यह रुपे नहीं ले सकते क्योकि यह तो भले का काम है और भला करना तो सभी का कर्तव्य है |”
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