एक गाँव में एक पेड़ पर एक कोआ और कुछ मोर रहते थे | एक दिन की बात है मोसम बहुत अच्छा था और मोर नीचे नाच रहा थे मोर को नाचता देखकर लोग वाह! वाह! कर रहे थे |
यह सब कोआ भी देख रहा था और देखकर सोचने लगा, “सभी मोर की तारीफ कर रहे है क्यों न में भी मोर बन जाऊ और फिर सभी लोग मेरी भी तारीफ करगे |”
उसे एक तरकीब सूझी, उसने बगीचे में से मोर के सारे पंख इकट्ठे किये और अपने पंखो से चिपका लिए | अब वह भी ख़ुशी – ख़ुशी उनके पास गया और बोला, “देखो, में भी मोर बन गया हु | अब मुझे भी अपने साथ मिला लो |”
यह देखकर सारे मोर हंस पड़े और के बोले, “अरे कोए! हमारे पंख चुराकर अपने पीछे लगा लिए और अपने आप को मोर कहता है |” भाग जा यहाँ से वर्ना मार – मार कर तुझे यहाँ से भगा देगे | “
यह सुनकर बेचारा वहा से चुप – चाप चला गया और अपने दोस्तों के पास पहुचा और बोला, “दोस्तों मोर मुझे मार रहे है मेरी मदद करो |”
यह देखकर वह बोले, “तू हमसे बड़ा बनना चाहता है तो हम तेरी मदद क्यों करे | अच्छा होता मोर तुझे मार ही देते है |” या कहकर उन्होंने भी उसे वहा से भगा दिया | वह बहुत दुखी हो गया था और नदी किनारे चला गया | उसने अपने अरे पंख उतार दिए और फिर से वो कोआ बन गया |
सीख: बिना सोचे – विचारे कभी भी नकल नहीं करनी चाहिए, इससे किसी का लाभ नहीं होता है बस नुकसान ही होता है
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