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रमेश की कहानी मेरी जुबानी

आज की कहानी एक सच्ची कहानी है | रमेश जो बहुत ही मेहनती लड़का है | और उसके भी वही सपने है जो हर इन्सान के और हर नोजवान के सपने होते है | एक अच्छी सी नौकरी, घर और अपने परिवार वालो को हर ख़ुशी देना | पर जैसा की आप सभी लोग जानते है, ये सब सिर्फ सपने ही होते है और वो भी उन लोगो के लिए जिनके पीछे कोई नहीं होता है | रमेश के भी पीछे कोई नहीं था, वो पिछले ही साल अपने पिता को खो चूका है और बड़े भाई की भी नौकरी का कुछ पता नहीं है | बस भगवान की कृपा से उनका घर चल रहा है | एक और है जिसको वो अपने पिता समान और पिता से भी बड कर मानता था पर पता नहीं वो भी नराज है रमेश से |

मानो ज़िन्दगी जैसे रुक सी गई हो | अरमान बहुत थे करने को पर कोई रास्ता दिखाने वाला कोई नहीं  था | रमेश वैसे तो सुलझा हुआ इन्सान है पर ज़िन्दगी के इस दोर में पता नहीं क्या हुआ उसे, मानो वो गुम सा गया हो अपने में | पिता के जाने के बाद वो बिल्कुल चुप हो गया था शायद अब उसे ज़िन्दगी का समना करना था या कुछ और | रमेश अक्सर मुझसे कहा करता था की कुशनसीब होते है वो लोग जिनके पास उनके पिता होते है जो उन्हें ज़िन्दगी का सामना करना सिखाते है | रमेशा का भी सही वक़्त था पर अब उसके साथ उसके पिता न थे | अब वो बिल्कुल अकेला जिसको घर भी चलाना था और कुछ करना भी था ज़िन्दगी में | रमेश को अब पता चल गया था की ज़िन्दगी जीना इतना आसन नहीं है जितना उसे लगता था |

आज रमेश बहुत उदास, गुमसुम सा था और बहुत ही चिंता में था मेरे पूछने पर भी उसने मुझे नहीं बताया, पर में समझा गया था उसकी खामोशी को देख कर की आज फिर से उसके मालिक ने सुनाया है और डराया होगा नौकरी के लिए | उसे चिंता थी तो अपनी नौकरी की क्योकि उसका मालिक उसे पिछले एक महीने से कभी कुछ सुना रहा था | रमेश अपनी नौकरी छोड़ना तो चाहता था पर उसे घर की भी चिंता थी की कही उसने नौकरी छोड़ दी तो घर कैसे चलेगा | आज कुछ समझ नहीं आ रहा की क्या करे वो, एक तरफ घर की चिंता है और दूसरी तरफ नौकरी की | और इस उलझन से बहार निकालने वाला भी कोई नहीं है उसे, आज वो अंधरे में बैठा, मायूस सा अकेला बैठा था | वह यह बात अपनी बीवी को भी नहीं बता सकता था क्योकि वह अपनी चिन्ताओ को किसी और को नहीं देना चाहता था वो बस अपने मन ही मन में रख रहा था और अपने आप से ही बात कर रहा था |

में उसकी कहानी लिख तो रहा हु पर मुझे भी रोना आ रहा है उसका यह दुःख देख कर | दोस्तों वैसे ज़िन्दगी क्या क्या दिखा देती है | जो कल तक बिना किसी चिंता के, बिना किसी डर के अपनी ज़िन्दगी जिया करता है आज वोही इन्सान ज़िन्दगी जीने से डर रहा है लड़ रहा है अपने हलातो से, लड़ रहा है ओने मन में चल रहे तुफानो से, पर कोई नहीं है उसे मदद करने के लिए |

दोस्यो लिखने को बहुत कुछ है मेरे पास, बस कलम ही साथ नहीं दे रहे है | आखरी में बस दुआ करूगा की भगवान उसे हिमत दे |

दोस्तों अगर आप मेरी जगह होते, तो क्या करते, इस वातावरण को महसूस करे और रमेश को यहाँ से बहार निकालने की कोशिश करे |

धयन्वाद,

युग्म

admin

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  • मेरे भाई यह एक सामान्य सी स्थिति है। शायद मेरी स्थिति में दो छोटे बच्चे और साथ में कर्जा भी है। और आय का कोई निश्चित साधन भी नहीं। लेकिन ईश्वर कृपा से सब कुछ धीरे धीरे समय के साथ सब कुछ अनुकूल होता जा रहा है।

    ऐसे में आप अपने भगवान् पर पूरा विश्वास रखे। और पूरी ईमानदारी से अपनी इन स्थितयों से निपटने का प्रयास करे।

    विश्वास रखे सब कुछ आपके अनुकूल हो जायेगा। ऐसा समय हम लोगो को कुछ सिखाने के लिए आता है।

    जो कि सीखने के लिए अनिवार्य है। ईमानदार लोगो का समय तो विपरीत आता है। लेकिन समय के साथ सिखाकर सब ठीक कर देता है। केवल हमें मजबूती के साथ खडे रहना है।

    Sarvesh Shukla

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