एक स्कूल में दो दोस्त एक साथ पढ़ते थे एक नाम रवि और दुसरे का नाम सानु था | दोनों ही दोस्त बहुत परिक्ष्मी थे | वो हर काम में एक दुसरे की मदद करते थे |
कभी रवि प्रथम आता तो सोनू दुसरे स्थान पर | तो कभी सोनू प्रथम तो रवि दुसरे स्थान पर | एक बार की बात है की रवि के ऊपर एक मुसीबत आ गई और वो भी बहुत बड़ी | रवि के पिता का देहांत हो गया | रवि उदास रहने लगा | उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता था उसका स्कूल जाना भी बंद हो गया | यह सब देखकर सोनू भी दुखी हो गया | सोनू प्रतिदिन रवि के घर जाता और उसकी हिम्मत बंधता |
कुछ दिनों के बाद ही विधालय में परीक्षा शुरू हो गई | सोनू के समझाने पर रवि परीक्षा देने को तयार हो गया | इस बार सभी कहे रहे थे की रवि इस बार प्रथम नहीं आ पाएगा परन्तु सोनू को पूरा यकीन था की इस बार भी वह प्रथम आएगा |
जब परीक्षा का परिणाम आया तो रवि प्रथम आया और सोनू दुसरे स्थान पर | यह देख कर सभी लोग हेरान थे की ऐसा कैसे हुआ | स्कूल के मुख्य अध्यापक जी भी हेरान थे की दुखी होने पर भी रवि प्रथम कैसे आया | उन्होंने सोनू को बुलाया पर पूछा, “बेटा इस बार तुम रवि से पीछे कैसे आये ?”
सोनू ने कहा, “सर! रवि बहुत दुखी था और उसका मन नहीं था परीक्षा देने का परन्तु मेने उस पर जोर डाला परीक्षा देने को और में नहीं चाहता था की वह मुझसे पीछे रह जाने पर और दुखी हो जाए | इसी कारण से में कुछ सवाल छोड़ दिए जिससे वह प्रथम आ जाए |
सोनू की यह बात सुनकर मुख्य अध्यापक जी गदगद हो गए | उन्होंने उसी समय उसे गले से लगा लिया और बोले, “अगर तुम जैसा मित्र मिल जाए, तो समझो उसके सारे संकट दूर हो जाएगे |”
उस वर्ष सोनू प्रथम तो नहीं आया परन्तु वार्षिक समारोह में उसको इनाम दिया गया |
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