एक गाँव में एक सोनू नाम का एक लड़का रहता था | यह पढाई में बहुत अच्छा था परन्तु साथ ही साथ बड़ा ही लापरवाह और शरारती था | इसी कारण से अध्यापक और माता – पिता से डाट पडती रहती थी | इसके चलते वह सभी से नराज भी रहता था | पर उसे अपना गुस्सा बाहर निकालना भी अच्छी तरह आता था | वह अपने दोस्त मोनज के साथ खेतो में चले जाता और वहा पर वो अपने दोस्त के साथ गेम्स खेलता | कभी अध्यापक – अध्यापक, कभी गीली – डंडा, कभी पेड़ पोधो को मरता काटता | सभी तरीका था उसका अपने गुस्से को बाहर निकालने का | वे दोनों अँधा दुन्ध पेड़ पोधो को कटते की वो बे जुबान मर जाते थे, उनके फल फूल भी सभी नष्ट हो जाते थे |
उन दोनों के सभी मित्रो ने उनको समझया की ऐसा न किया करे परन्तु वो दोनों कहा किसी की सुनते | वे उनसे बार बार क्दते की पोधो को मारना या तोडना अपराध है | उन दोनों की शरारते बहुत ज्यादा बड चुकी थी | एक दिन सोनू ने अपने सहपाठी को सीढियों से धक्का दे दिया जिससे उसकी दोनों टांगे टूट गई और उसको उसी समय अस्पताल ले जाना पड़ा | उस दिन उसके अध्यापक पर उसके माता-पिता ने उसे खूब पिटा डंडो से | इस पिटाई के कारण उसके हाथो पर बहुत ज्यादा निशान पड़ गए और बहुत देर तक उनमे दर्द भी बोता रहा | सोनू कही घंटो तक रोता रहा और दर्द होते रहा |
अगले दिन जब सोनू अपनी कक्षा आया तो वह चुपचाप अपने स्थान पर बेठा रहा | उसे चुप देख कर उसके दोस्तों ने उसको सहानभूति दी और कहा, “सोनू अब तो तुम्हे बता चला होगा की दर्द क्या होता है और उसका अनुभव क्या होता है | हमे उमीद है की तुम अब समझ आ गई होगी की जब तुम उन पेड़ पोधो को काटे थे और मरते थे तो उनके कितना दर्द होता होगा | तुमे तो पता ही होगा की चाहे वो पोधे हो, जानवर हो या फिर इन्सान हो, दर्द सभी को होता है |” यह सब सुनकर सोनू रोने लगा और सभी से अपनी गलती की माफी मांगी और उस दिन के बाद वह बिलकुल अनुशासित हो गया |
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