ज़िंदगी की कीमत चुकाता बचपन ..,
झूठन से भूख मिटाता बचपन …!
बेचैनी के बिस्तर पे करवट बदलता ..,
फूटपाथ पे सपनें सजाता बचपन …!
पत्थर के टुकड़ों मैं खिलोने देखता ..,
नन्हे से दिल को समझाता बचपन …!
भीख क कटोरे मैं मजूबूरी को भरकर ..,
ज़रूरत की प्यास बुझाता बचपन …!
कही पिज़्ज़ा, आइसक्रीम से खुश होता बचपन ..,
तो कही रोटी के लिए तडपता बचपन ..!
क्या होता फिर भी प्यारा बचपन??????? ..,
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