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दो व्यापारी का झगड़ा

बीरबल अकबर के बहुत करीब थे और सभी चाहने वाले लोग अक्सर उनके पास आया करते थे सलाह मशुवरा करने | एक दिन दो व्यापारी उनके पास अपना झगड़ा सुलझाने गए और बीरबल उनका झगड़ा निपटाने की कोशिश कर रहे थे |

बीरबल ने पहले व्यापारी से पूछा, “रमेश तो तुम्हारे पास कोई सबूत नहीं है “

नहीं हजूर रमेश ने कहा |

बीरबल ने कहा, “तुमने अपने दोस्त सुरेश को २ हजार रुपे उधर दियेओर उसकी कोई रसीद नहीं और कोई गवाह भी नही |

नहीं हजूर, रमेश ने फिर कहा | सुरेश मेरा दोस्त है और उसे पैसे की सख्त जरूरत थी और उसने कहा था की में इसे ६ महीने मी लोटा दुगा | मुझे लगा वो अपना वादा पूरा करेगा | लेकिन अब वह अपनी बात से मुकर गया |

बीरबल ने कहा, “ठीक है एक काम करो जो भी तुम ने कहा उसे तुम एक कागज पर लिख दो और अपने हस्ताक्षर कर दो |”

बीरबल ने फिर सुरेश को बुलाया और बोले, यह लो सुरेश इसे पढो | सुरेश ने उसे पढना सुरु किया और पढ़ते पढ़ते उसका चेहरा पिला पड़ गया | पूरा पढ़ कर उसने जोर देकर कहा, यह सब झूठ है में सोचता था वह मेरा दोस्त है मेने कई बार उसकी मदद की है | उसने यह बदला चुकाया उन सबका | मुझे पता है की उसकी दुकान नहीं चल रही परन्तु यह तरीका सही नहीं है |”

बीरबल ने पूछा, “तो तुम इंकार कर रहे हो की रमेश ने तुम्हे कोई २ हजार रुपे नहीं दिए |”

जी हजूर, अगर उसने मुझे इतनी बड़ी रकम दी है तो कोई न कोई तो रसीद हो गी या फिर कोई गवाह |

बीरबल ने उसे भी वहा से भेज दिया | कुछ दिनों बाद बीरबल ने दोनों व्यापारियों के घर देशी घी के पीपे भेजे और कहलवाया की वे घी की शुद्धता जांचकर उसे बेच दे | दोनों ने वैसा ही किया और दोनों ने घी को गर्म किया गर्म करने के बाद उसमे एक – एक सोने का सिक्का मिला |

यह देखकर रमेश उसी वक्त सोने का सिक्का बीरबल को लोटने चला गया | परन्तु सुरेश ने वह सोने का सिक्क बजार जा कर बेच दिया और घी में मिला पैसा जा कर दोनों बीरबल को दे दिया |

बीरबल बोला, बस इतना सा ही सुरेश तुम्हे इसमें और कुछ नहीं मिला |

सुरेश बोला, “नहीं हजूर इसमें और कुछ नहिः था |

बीलबल बोले, “तुम झूठ कह रहे हो क्योकि में इसमें एक सोने का सिक्का रखा था जो रमेश ने मुझे दे दिया परन्तु तुमने नहीं दिया | डर से सुरेश पसीनो – पसीन हो गया, लिकिन फिर भी उसे अपनी चलाकी दिख्जाने की कोशिश की |

लगता है मेरी याददाश्त कमजोर हो रही है सरकार, मुझे माफ कर दीजिये शायद यह है आप की मोहर

बीलबल सुरेश से बोले, “सुरेश फिर कब लोटा रहे हो रमेश के २ हजार रुपे |”

सुरेश समझ चूका था की उसकी पोल खुल चुकी है और उसने बीरबल और रमेश से माफी मांगी और कहा में तुम्हरे २हजार रुपे लोटा दुगा |

तो इस तरह बीरबल ने दो व्यापारियों के बीच का झगड़ा समाप्त किया |

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