एक बार की बात है एक कबूतर एक पेड़ की शाखा पर बेठा, मजे से गाना गुण गुना रहा था | ठीक उसी समय वह पर लोमड़ी आ गई | कबूतर की अवाज सुन कर लोमड़ी ने पेड़ पर देखा और उसे वहा एक कबूतर नजर आया | कबूतर को देखते की उसके मुह में पानी आ गया | वह सोचने लगा की उसे कैसे खाऊ, क्या करू क्यों वो बहुत ऊंचाई पर बेठा था |
तभी उसे एक तरकीब सूझी, उसने कबूतर की चापलूसी करनी शुरू कर दी, वह बोली, “कितना मीठा स्वर है आपका | मुझे बहुत अच्छा लग रहा है |”
कबूतर या सुनकर बहुत प्रसन्न हुआ, वह बोला, “इस प्रंशसा के लिए में आप का धन्यवाद करता हु |”
इस पर लोमड़ी ने कहा, आप नीचे आ जाइए, में आप से दोस्ती करना चाहता हु, कुछ समय के लिए हम दोनों बाते करेगे |
कबूतर उसकी बातो में आ गया और वह पेड़ से नीचे उतार आया और उसके आते ही लोमड़ी उसे खा गई |
सीख: कभी भी किसी की बातो में न आए, अपना दिमाग लगाए |
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