एक आदमी बूढा हो चला था | उसके चार बेटे थे | बेटे यो तो सभी कम जानते थे | किन्तु बोलचाल और आचरण में चारो एक जैसे न थे | पिता ने कई बार उनसे कहा – “यदि तुमने अपनी बोलचाल और आचरण नहीं सुधारा तो जीवन में कभी सफल नहीं हो सकते |” किन्तु पिता की बात को कोरा उपदेश समझकर बेटो ने कभी ध्यान नहीं दिया |
एक बार को बात है | चारो बेटे और पिता लंबी यात्रा पैर जा रहे थे | इस यात्रा के बिच उनके पास खाने पिने को कुछ भी न बचा था | जो धन था वह भी ख़त्म हो चूका था | वे लोग कई दिन से भूखे थे | बस यही चाहते थे की किसी तरज ज़ल्दी से ज़ल्दी अपने घर पहुच जाये|
पांचो एक जगह सडक के किनारे विश्राम कर रहे थे | तभी एक व्यापारी अपनी बेलगाडी को हांकता हुआ निकला | वह व्यापारी किसी मेले में जा रहा था | उसने बेलगाडी में तरह-तरह के पकवान और मिठाई भर रखी थी वह उन्हें बेचने के लिए जा रहा था |
पकवाने और मिठाईयो की महक से पांचो में मुंह में पानी आने लगा | बूढे ने कहा – “जाओ व्यापारी से मागो | शायद कुछ खाने को दे दे |”
पिता की आज्ञा सुनकर बेटा व्यापारी के पास गया | बोला – “अरे, ओ व्यापारी, इतना मॉल ले जा रहे है, थोडा मुझे दे | भूख बहुत लगी है |”
व्यापारी ने सोचा – यह कितना मुर्ख है } दुसरे से मागंते समय मीठी वाणी बोलनी चाहिए | अच्छा | यह जितनी कठोर वाणी बोल रहा है इसे उतना ही कठोर पकवान दुगा | यह सोचकर उसने एक सुखा हुआ पकवान दे दिया |
व्यापारी थोरी दूर ही गया की दूसरा भाई उसके पास पहुचा | बोला –“बड़े भाई, प्रणाम! क्या छोटे भाई को खाने के लिए कुछ भी न दोगे?”
व्यापारी ने सोचा – इसने उसे भाई कहा है | छोटे भाई को देना मेरा कर्तव्य है | उसने कहा – “लो भाई, मिठाई खाओ |” और उसने एक दोना भर कर मिठाई दे दी |
अब तीसरा भाई व्यापारी के पास गया | वह बोला =”आदरणीय | आप मेरे पिता समान है | मुझे कुछ खाने को दे |”
व्यापारी ने सोचा – यह मुझे अपने पिता जैसा आदर दे रहा है | इसे तो भरपेट मिठाई देनी चाहिए | और उसने कई दोनो से पकवान और मिठाई भरकर दे दी |
अतं में चोथा पुत्र गया | उसे देखकर व्यापारी मुस्कराया तो वह भी मुस्करा दिया | उसने कहा – मित्र, इस मुसीबत की घड़ी में टीम सहारा बे सकते तो | क्या तुम मुझे भूखा ही रखोगे |”
व्यापारी ने सोचा – मित्र पर लोग सब कुछ न्योछावर कर देते है | फिर यह मित्र तो मुसीबत में है | इसकी मदद करनी चाहिए | मेरा क्या है ? – शहर जाकर और मॉल भर ले उगा | उसने कहा – “मित्र | इस गाड़ी से लदे सरे पकवान और मिठाई तुम्हारे लिए है | चलो, कहा ले चलू |”
और वे दोनों वहा आ गए, जहा पिता के साथ बाकि तीनो बेटे बेठे थे | पिता ने उस सबसे कहा – “अब तुम सब अपनी – अपनी मांगी हुई भोजन साम्रगी की तुलना करो | जिसने जैसा बोला और आचरण किया, उसे वेसा ही मिला | क्या अब भी अपने “बोल का मोल” नहीं समझे ?”
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