Home Hindi बेटी के विदाई का दुःख

बेटी के विदाई का दुःख

कन्यादान हुआ जब पूरा, तब आया समय विदाई का
हँसी ख़ुशी सब काम हुआ पूरा, सारी रस्म अदाई का
तब पूछा सवाल बेटी ने पिता से
पापा क्या सचमुच में छोड़ दिया साथ तुमने मेरा ।।

तुमने कहा मुझे सदा पारी अपने आंगन की,
मेरा रोना न होता था बर्दाश तुमसे,
अब क्या इसी आंगन में कोई नहीं है स्थान मेरा,
अब मेरे रोने का पापा, तुमको बिल्कुल ध्यान नहीं ।।

अब चली सुसराल में अपने. जंहा न कोई है अपने.
न जाने कैसे होगा पति आ आंगन,
पर इतना में कहती हु, न होगा बाबुल आंगन जैसे ||

पापा ले चले मुझे ये अपने साथ, आकर क्यों नहीं धमकाते इन्हें,
नहीं रोकते चाचा ताऊ, भैया से भी आस नहीं,
ऐसी भी क्या गलती हुई मुझसे, कोई आता नहीं पास मेरे,
क्या इतना ही था प्यार मुझसे, रोके न कोई मुझे ||

पिता की बेबसी

यह सब सुनकर, न रहे सके पिता के आंसू,
गले लगाया बेटी को, परन्तु रोक न सके आंसुओ को .
बरस पड़े बरखा की तरह आंसू, लिपट पिता से रोई वो भी
तू तो है बाबुल के आंगन की पारी, भाई की है प्यारी,
परन्तु अब तुझसे सजाना है पति का आंगन,
सही है कडवी सचाई, समाज की ||

तू क्या जाने क्या खोया है पिता ने तेरे,
दिल पर पथर रख, विदा कर रहा है तुझे
कभी न रोने वाला पिता, फुट फुट कर रोया है,
बेटी के जाने से क्या क्या खोया है मेने  ||

बेटी लक्ष्मी है,  इसे मारे नहीं

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Check Also

सपने में खुद को देखना।

दुनिया में लोग सोते वक्त तरह तरह के सपने देखते है। सोते वक्त सपने देखना कोई गलत बात नही है…