अब चारो राजकुमार बड़े हो गए थे और तभी राजा के आदेश से उन चारो राजकुमारों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए आश्रम भेज दिया गया | चारो ही भाई बहुत प्रतिभाशाली और बुदधिमान थे | थोड़े ही समय में उन चारो ने वेद, पुराण, शास्त्र, राजनीति व् शस्त्र संचालन आदि में निपुणता प्राप्त कर […]

एक गीदड़ बहुत भूखा था कई दिन से ठीक भोजन न मिलने के कारण वह कमजोर हो गया था | इतनी ताकत भी न थी की स्वंय शिकार करके खा सके | थोड़ी देर में उसने एक शेर को आते देखा | शेर ने एक भेंसे का शिकार किया था | वह खा पीकर अपनी […]

कवि जीवन का ऐसा साथी था, जो आत्मा – गाथा में ह्रदय-ह्रदय की गाथा कहता है | वह चलता स्वंय है, पर पग—पग पर सारे संसार का पथ प्रदशित करता है | शरण कवि यानि मन का मालिक | जिसने न नहीं जीता, वह ईश्वर की बनाई दुनिया का रहस्य नहीं समझ सकता | विनोबा […]

एक सुबह अकबर का एक सेवक बीरबल के घर पहुंचा | वह दुखी और प्रेशान था | “क्या बात है अली |” बीरबल ने पुछा | “श्रीमान मेरा जीवन खतरे में है | केवल आप ही मुझे खतरे से बाहर निकाल सकते है |” अली ने जवाब दिया | “में अपनी तरह से पूरा प्रयास […]

एक आदमी बूढा हो चला था | उसके चार बेटे थे | बेटे यो तो सभी कम जानते थे | किन्तु बोलचाल और आचरण में चारो एक जैसे न थे | पिता ने कई बार उनसे कहा – “यदि तुमने अपनी बोलचाल और आचरण नहीं सुधारा तो जीवन में कभी सफल नहीं हो सकते |” […]

मनुष्य की इच्छाएँ कभी खतम  नही होती | मानव की इछाये कुछ देर के लिये तो सुख देती पर मन की शांती नही दे सकती | मन एक प्रकार का रथ है जिसमे कामन, करोध, लोभ, मोह, अंहकर, ओर घृणा नाम के साथ अश्व जुटे है | कामना इन सब से प्रमुख है | मन के […]

एक दिन एक समस्या को सुलझाने के बाद बादशाह ने बीरबल से कहा, “बीरबल, क्या तुम जानते हो कि एक मुर्ख और ज्ञानी व्यक्ति में क्या अंतर है ?” “जी महाराज में जानता हु | “ बीरबल ने कहा “क्या तुम विस्तार से बता सकते हो ?” अकबर ने कहा | “महाराज, वह व्यक्ति जो […]

एक जंगल में बटेर पक्षियो का बहुत बड़ा झुंड था | वे निर्भय होकर जंगल में रहते थे | इसी करण उनकी संख्या भी बढती जा रही है | एक दिन एक शिकारी ने उन बटेरो को देख लिया | उसने सोचा की अगर थोड़े – थोड़े बटेर में रोज पकडकर ले जाऊ तो मुझे […]

ये बारिश की बुँदे कुछ कहती है कहती है कुछ ये बारिश की बुँदे कभी ध्यान से सुनो, कुछ कहती है ये बारिश की बुँदे कभी ध्यान से सुनो, गुन गुन्नाती है ये बारिश की बुँदे   ये बारिश की बुँदे कुछ कहती है कहती है कुछ ये बारिश की बुँदे बेठ गई नन्हे पत्तो […]

मेरा मस्तक अपनी चरण – धूलि तल में झुका दे | प्रभु | मेरे समस्त अंहकार को आँखों के पानी में डूबा दे | अपने झूठे महत्व की रक्षा करते हुए में केवल अपनी लघुता दिखता हु | अपने ही को घेर में घूमता-घूमता प्रतिपल मरता हु | प्रभु | मेरे समस्त अंहकार को आँखों […]