Posts Tagged ‘anmol vachan in hindi’

ज़िन्दगी क्यों इम्तिहान लेती है कदम कदम पर

जैसा की में आप सभी के साथ रमेश की ज़िन्दगी के कुछ पल बाँट चूका हु | आज कुछ और रमेश की ज़िन्दगी के पल आप लोगो के साथ बाँट रहा हु |

जैसा की मेने कहा था की वो ज़िन्दगी जीने से डर रहा है लड़ रहा है अपने हलातो से, लड़ रहा है अपने मन में चल रहे तुफानो से | भाइयो, बहनों ऐसा लग रहा है मनो ज़िन्दगी भी रूठ गई है रमेश से | दुःख खत्म लेने का नाम ही नहीं ले रही है | एक खत्म होता है तो दूसरा शुरू हो जाता है |

पिछले साल उसके पिता का देहांत हुआ था | ऐसा नहीं है की मीठे पल नहीं है रमेश की ज़िनदगी में, है पर बहुत बहुत थोड़े से और भी आते है दुखो के साथ | इसी साल उसके यहाँ एक नन्ही परी ने भी जन्म लिया पर नोकरी न होने के कारण बभौ कर्जा लेना पड़ा जो की अभी तक चूका रहा है | और अब तो उसकी नोकरी भी खतरे में है | पता नहीं है अपनी जीविका कैसे चलाए गया इतनी महगाई में |

अभी रमेश अपने पिता के जाने के सदमे से बहार निकला भी नहीं था की उसकी माँ को brain tumor हो गया | दोस्तों में कैसे कहू उसकी कहानी क्योकि मुझे भी रोना आ रहा है | मेरा मन भी द्दुख रहा है | पर मुझे तो बताना ही है |

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अनोखा वरदान

विजय सिंह मान का राजा था | वह अपनी प्रजा से बहुत प्यार करता था और उनका बहुत ध्यान रखता था | एक दिन की बात है वह तूफानी रात में अपने घोड़े पर स्वर होकर एक तंग से रास्ते से जा रहा था | वह भेस बदले हुए था | मामूली कपड़े पहन कर, जनता के बीच उनके हाल चाल का पता लगाना उनकी आदत बन चुकी थी |

वह बीना किसी की चिंता किये अपना काम कर रहे थे परंतु उनके पीछे पीछे डाकू भी चल रहे थे जो उनका शानदार घोडा लेना चाहते थे |
मोका देख कर डाकुओ ने राजा को घेर लिया | राजा एक बार तो सकते में आ गया, मगर वह घबराया नहीं | वह बच निकलने की तरकीब सोच रहा था की उसके घोड़े का खुर सडक के गड्डे में फंस गया | डाकू अभी राजा पर लपकने ही वाले थे की एक और से कुछ नोजवान वहा आ पहुचे | उन्होंने देखा की एक आदमी मुसीबत में है | उन्होंने डाकुओ पर हमला कर दिया | डाकुओ यह देख कर डर गए और वहा से भाग गए |

थोड़ी देर में राजा के अंगरक्षकों का दल भी आ पहुचा | उन्होंने सभी डाकुओ की बंदी बना लिया | राजा उन नवयुवको से बड़ा प्रसन्न था क्योकि उन्होंने बिला यह जाने की वह राजा है, डाकुओ से उसकी रक्षा की | राजा ने बहुत – बहुत धन्यवाद दिया और कहा के वे उसके साथ महल तक चले |

भोर होने पर रात की घटना का समाचार सब जगह फेल गया | सारी प्रजा खुश थे की डाकू राजा का बाल भी बाका न कर सके | राज्य परिवार के लोगो, मंत्रियों, दरबारियों और सारी जनता ने नवयुवको के साहस की प्रशंशा की |

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राजकुमारों की शिक्षा और विश्वामित्र का आगमन

अब चारो राजकुमार बड़े हो गए थे और तभी राजा के आदेश से उन चारो राजकुमारों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए आश्रम भेज दिया गया | चारो ही भाई बहुत प्रतिभाशाली और बुदधिमान थे | थोड़े ही समय में उन चारो ने वेद, पुराण, शास्त्र, राजनीति व् शस्त्र संचालन आदि में निपुणता प्राप्त कर ली थी |

शिक्षा के दोरान ही चारो राजकुमार युवावस्था में प्रवेश किया और फिर गुरु के आदेश से वो राजमहल में वापस भेज दिया गया क्योकि उनकी शिक्षा भी समाप्त हो गई थी| उसी दोरान राजा और रानिया उन चारो के विवाह के बारे में सोचने लगे | और एक दिन राजा अपने मंत्रियों और पुरोहितो के साथ मिल कर विवाह के बारे मे चर्चा कर रहे थे तभी द्वारपाल ने उन्हें ऋषि विश्वामित्र के आगमन की सुचना दी | महाराज ने स्वंय दवार पर जा कर ऋषि का स्वागत किया और आदर सत्कार के साथ उन्हें राजमहल में एक उचित आसन पर बिठाया | फिर हाथ जोड़कर उनके आगमन का कारण पूछा | विश्वामित्र बोले, “हे राजन, हम जब भी यज्ञ करते थे तो राक्क्ष हम ऋषियों को तंग करते है और हमारे यज्ञ को भी नष्ट कर देते है इसलिए हम आपके वीर पुत्र राम को लेने आय है | अपने यज्ञ की रक्षा के लिए, हम ऋषियों को उनकी आवश्यकता है |” बस इतनी ही बात सुन कर राजा के चहरे से मानो रंग ही उत्तर गया हो |

राजा भयभीत हो कर बोले हे मुनिवर, “रावण से तो देवता भी पार नहीं पा सकते, तो मेरा राम तो अभी बालक है, वो कैसे उनसे युद्ध कर पाएगा, अगर आप की आज्ञा हो तो में आपके साथ चलता हु और मेरी सेना आपके यज्ञ की रक्षा करेगी |”

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अपनी शक्ति को जानो

एक गीदड़ बहुत भूखा था कई दिन से ठीक भोजन न मिलने के कारण वह कमजोर हो गया था | इतनी ताकत भी न थी की स्वंय शिकार करके खा सके |

थोड़ी देर में उसने एक शेर को आते देखा | शेर ने एक भेंसे का शिकार किया था | वह खा पीकर अपनी गुफा की और लोट रहा था | गीदड़ भूख और कमजोरी के कारण शेर को देखकर कापंने लगा | जेसे ही शेर निकट आया, गीदड़ पेट के बल लेट गया |

शेर ने गीदड़ को इस तरह लेटा देखा तो उसे हंसी आई और दया भी | शेर ने पूछा -”तुझे क्या कष्ट है जो इस तरह पेट के सहारे लेटा है?”

“हजूर ! में कई दिन से भूखा हु | यदि आप आज्ञा दे तो में आपकी सेवा करना चाहता है |”

“ठीक है, चल चल मेरा साथ|” शेर के कहा |

गीदड़ शेर के साथ चल दिया | गुफा में जो कुछ मांस पड़ा था, उसे देकर शेर ने कहा – “आज इतने से ही काम चला | कल से तेरे हिस्से का भी लेकर आउगा |”

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Poet – Poem Quotes

  • कवि जीवन का ऐसा साथी था, जो आत्मा – गाथा में ह्रदय-ह्रदय की गाथा कहता है | वह चलता स्वंय है, पर पग—पग पर सारे संसार का पथ प्रदशित करता है |

शरण

  • कवि यानि मन का मालिक | जिसने न नहीं जीता, वह ईश्वर की बनाई दुनिया का रहस्य नहीं समझ सकता |

विनोबा भावे

  • सच्चे कवि तो वे माने जाते है. जो म्रत्यु में जीवन और जीवन में म्रत्यु देख सके |

महात्मा गाँधी

  • कवि जिस समय कविता करता है. वह अलोकिक मानव बन जाता है |

डा. हजारीप्रसाद दिवेदी

  • पामर दुनिया विषय –सुख में झूमती है, कवि आत्मानंद में डोलता है | लोगो को भोजन का आनन्द मिलता है, कवि को आनदं का भोजन मिलता है |

विनोबा भावे

  • सोंदर्य की मादकता में झूमती हुई की द्रष्टि स्वर्ग से भूलोक और भूलोक से स्वर्ग तक विचरण करती रहती है |

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ध्यान मग्न तोता

एक सुबह अकबर का एक सेवक बीरबल के घर पहुंचा | वह दुखी और प्रेशान था |

“क्या बात है अली |” बीरबल ने पुछा |

“श्रीमान मेरा जीवन खतरे में है | केवल आप ही मुझे खतरे से बाहर निकाल सकते है |” अली ने जवाब दिया |

“में अपनी तरह से पूरा प्रयास करुगा परन्तु पहले यह तो बताओ की बात क्या है?” बीरबल ने खा |

अली ने बताया, “श्रीमान, कुछ महीने पहले एक फकीर ने महाराज को एक तोता दिया था | महाराज ने वह तोतो मुझे दिया और उसकी अच्छी तरह से देखभाल करने को का निदेश दिया और साथ ही उन्होंने या निर्देश भी दिया की यदि कोई भी व्यक्ति इसकी मुर्त्यु की सुचना उनके पास ले जायगा तो उसे मुत्यु दंड दिया जायगा | श्रीमान अच्छी से अच्छी देखभाल करने और विशेष ध्यान रखने के बावजूद भी आज सुभ मेने उसे पिंजरे में मर हुआ पाया | अब मुझे अपने जीवन का भय हो रहा है |”

बस इतनी सी बात है| घबराओ नहीं | तुम अपने घर जाओ और सब कुछ मुझ पैर छोड दो | यह सुचना महाराज तक में पहुचा दुगा |” बीरबल ने अली से कहा |

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बोल का मोल

एक आदमी बूढा हो चला था | उसके चार बेटे थे | बेटे यो तो सभी कम जानते थे | किन्तु बोलचाल और आचरण में चारो एक जैसे न थे | पिता ने कई बार उनसे कहा – “यदि तुमने अपनी बोलचाल और आचरण नहीं सुधारा तो जीवन में कभी सफल नहीं हो सकते |” किन्तु पिता की बात को कोरा उपदेश समझकर बेटो ने कभी ध्यान नहीं दिया |

एक बार को बात है | चारो बेटे और पिता लंबी यात्रा पैर जा रहे थे | इस यात्रा के बिच उनके पास खाने  पिने को कुछ भी न बचा था | जो धन था वह भी ख़त्म हो चूका था | वे लोग कई दिन से भूखे थे | बस यही चाहते थे की किसी तरज ज़ल्दी से ज़ल्दी अपने घर पहुच जाये|

पांचो एक जगह सडक के किनारे विश्राम कर रहे थे | तभी एक व्यापारी अपनी बेलगाडी को हांकता हुआ निकला | वह व्यापारी किसी मेले में जा रहा था | उसने बेलगाडी में तरह-तरह के पकवान और मिठाई भर रखी थी वह उन्हें बेचने के लिए जा रहा था |

पकवाने और मिठाईयो की महक से पांचो में मुंह में पानी आने लगा | बूढे ने कहा – “जाओ व्यापारी से मागो | शायद कुछ खाने को दे दे |”

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मनुष्य की इच्छाएँ

मनुष्य की इच्छाएँ कभी खतम  नही होती | मानव की इछाये कुछ देर के लिये तो सुख देती पर मन की शांती नही दे सकती | मन एक प्रकार का रथ है जिसमे कामन, करोध, लोभ, मोह, अंहकर, ओर घृणा नाम के साथ अश्व जुटे है | कामना इन सब से प्रमुख है |

मन के तीन विकार होते है:- तामसिक, राजसिक व् सात्विक | तामसिक मन हमेशा दुसरो को नुकसान पहुचाने में आनंद प्राप्त करता है और राजसिक मन अहंकार व् शासन की बात सोचता है और सात्विक हमेशा प्रेम और शांति ही चाहता है| विवेक से ही मन को शांत और काबू में किया जा सकता है | मनुष्य के भीतर कामना, मोह, व् अंहकार जेसी जो व्रतिया है उनके सकारात्मक रूप भी है | माता पिता अपने बच्चो को कभी दुख नहीं दे सकते इसलिए कामना करते है की उनके बच्चे हमेशा सुखी रहे | मन का प्रेम ही उन्हें सन्तान के लिए बलिदान करने को भी तत्पर करता है | उनका इसमें कोई स्वार्थ नहीं होता है बस होती है तो कामना और आशीर्वाद | इसी तरह मोह का भी उदारण भी है | जब कोई युवक किसी युवती के प्रति आकर्षित होता है तो वह उसके अवगुण नहीं देखता और उसकी तरह खिंचा चला जाता है | पहले तो येन केन प्रकारेण वह उसे पाना चाहता है और पा लिया तो खोना नहीं चाहता है | उसका अंह जब जगता है तो वह खुद को उसकी नजरो में उठाने के लिए तरह-तरह से हाथ पैर मरता है | इस तरह वह अपने प्यार को पाने में सफल होता है |

नकारात्मक रूप में अंह मानव का दुश्मन भी है क्योकि यह दुसरो से बेमतलब मुकाबला करवाता है | इससे ग्रस्त व्यक्ति तरह-तरह की इच्छाएँ पलता है  और जब उससे नहीं मिलती तो बेमतलब दुखी भी हो जाता है | परन्तु अगर अंह सकारत्मक हो तो मानव का जीवन आनंद मय हो जाता है | मन को किस दिशा में ले जाना है वो इन्सान के हाथो में होता है | चाहे तो अच्छी जगह पर लगा दे या बुरी जगह पर | संतो ने कहा है: कामनाओ का अंत विनाश है | तो सवाल उठता है की क्या इनका त्याग कर देना चाहिए? क्या इन्सान को बड़ा बनने का सपना नहीं देखना चाहिए?

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मुर्ख और ज्ञानी

एक दिन एक समस्या को सुलझाने के बाद बादशाह ने बीरबल से कहा, “बीरबल, क्या तुम जानते हो कि एक मुर्ख और ज्ञानी व्यक्ति में क्या अंतर है ?”

“जी महाराज में जानता हु | “ बीरबल ने कहा “क्या तुम विस्तार से बता सकते हो ?” अकबर ने कहा |

“महाराज, वह व्यक्ति जो अपनी बुदि का प्रयोग मुशिकल, चुनोतिपूर्ण तथा प्रतिकूल परिस्थितियों मव अपना नियन्त्रण खोए बिना करता है वह ज्ञानी होता है | परन्तु वह व्यक्ति जो प्रतिकूल परिस्थितियों को इस प्रकार सुलझाता है कि वे और प्रतिकूल हो जाती है, मुर्ख कहलाता है |”

बादशाह अकबर ने सोचा की बीरबल कहना चाहता है की एक पढ़ा लिखा व्यक्ति ही ज्ञानी होता है क्योकि उसे पता होता है कि कब किस समस्या का समाधान केसे करना है | बीरबल के चतुर जवाब से बादशाह के ह्रदय में उसका स्थान और पक्का हो गया |

एकता और फुट

एक जंगल में बटेर पक्षियो का बहुत बड़ा झुंड था | वे निर्भय होकर जंगल में रहते थे | इसी करण उनकी संख्या भी बढती जा रही है |

एक दिन एक शिकारी ने उन बटेरो को देख लिया | उसने सोचा की अगर थोड़े – थोड़े बटेर में रोज पकडकर ले जाऊ तो मुझे शिकार के लिए भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी |

अगले दिन शिकारी एक बड़ा सा जाल लेकर आया | उसने जाल तो लगा दिया, किन्तु बहुत से चतुर बटेर खतरा समझकर भाग गए | कुछ नासमझ और छोटे बटेर थे, वे फंस गए |

शिकारी बटेरो के इतने बड़े खजाने को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था | वह उन्हें पकड़ने की नई – नई तरकीबे सोचने लगा | फिर भी बटेर पकड़ में न आते |

अब शिकारी बटेर की बोली बोलने लगा | उस आवाज को सुनकर बटेर जैसे ही इकटठे होते कि शिकारी जाल फेककर उन्हें पकड़ लेता | इस तरकीब में शिकारी सफल हो गया | बटेर धोखा खा जाते और शिकारी के हाथो पकड़े जाते | धीरे – धीरे उनकी संख्या कम होने लगी |

तब एक रात एक बूढ़े बटेर ने सबकी सभा बुलाई | उसने कहा – “इस मुसीबत से बचने का एक उपाय में जनता हु | जब तुम लोग जाल में फंसे ही जाओ तो इस उपाय का प्रयोग करना | तुम सब एक होकर वह जाल उठाना और किसी झाड़ी पर गिरा देना | जाल झाड़ी के ऊपर उलझ जाएगा और तुम लोग निचे से निकलकर भाग जाना | लेकिन वह कम तभी हो सकता है जब तुममे एकता होगी |”

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