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फिर भी रहा गधे का गधा ही

एक गाँव में एक पाठशाला थी उस गाँव के पंडित जी उस गाँव के बच्चो को पढ़ाया करते थे | एक दिन की बात है पंडितजी बच्चो को किसी बच्चे की शरारत करने पर गुस्सा कर रहे थे की तुम जैसे गधो को में आदमी बना दिया है | तो तुम क्या चीच हो |

उसी समय वहा से एक घोबी जा रहा था अपने गधे के साथ | उस धोबी का कोई बच्च नहीं था | उसने सोचा अगर यह सत्य है की पंडित जी गधे को आदमी बना देते है हो क्या वो मेरे इस गधे को भी आदमी बना देगे क्या? मेरे बुढ़ापे का सहारा हो जायगा |

शाम होते ही घोबी अपने गधे को साथ लेकर पंडित जी के पास ले गया और बोला, “पंडित जी मेरा कोई बच्चा नहीं है क्या आप मेरे इस गधे को आदमी बना दोगे क्या?”

यह सुनकर पंडित जी हेरान रह गए और बोले, “तुम पागल तो नहीं हो, क्या गधा भी आदमी बन सकता है | “

घोबी ने पंडित जी के पांव पकड़ लिए और बोला, “पंडित जी आप को जो चाहिए में आप को दे दुगा, परन्तु कृपा करके इस गधे को आदमी बना दो | मुझे पता है आप कर सकते हो क्योकि में अपने कानो से सुना है की आप बच्चो को कहे रहे थे की तू जैसे गधो को आदमी बना दिया है |”

पंडित जी पूरी बात समझ गए और उसे भी समझाने लगे की ऐसा नहीं हो सकता है परन्तु वो समझ ही नहीं रहा था | कुछ देर बाद पंडित जी समझ गए की इस गधे को समझाना असंभव है | कुछ देर बाद पंडित जी बोले, “अच्छा ठीक है, पर देख लो, इस काम के पांच सो रुपे लगेगे और तिन महीने का वक्त भी |”

यह सुनकर घोबी खुश हो गया और बोला, “ठीक है पंडित जी में अभी घर जा कर पैसे ले कर आता हु |”

थोड़ी देर बाद घोबी पैसे ले आ गया और पंडित को दे दिया | पंडित जी पैसे अपनी जेब में रख लिए और बोले, “अब तुम जाओ और ठीक तीन महीने बाद आ जाना |”

घोबी ने उस घड़े को अपनी बहन के घर भेज दिया और तीन महीने के बाद घोबी पंडित जी के पास पहुच गया | उसे देखते ही पंडित जी बोले, ऑओं भाई, तुम्हारा गधा तो शहर में बहुत बड़ा अफसर बन गया है जाओ, वही जाकर उससे मिलो |”

घोबी ने पूछा, “क्या वह मुझे पहचान लेगा ?”

“क्यों नहीं क्यों नहीं | तुम ऐसा करो, अपने साथ उसका दानो वाला थेला लेते जाना | वह उस थेले को तो नहीं भूल सकता “ पंडित जी ने कहा |

यह सुनकर घोबी बहुत खुश हो गया और अगले दिन घोबी शहर को चल दिया | शहर जा कर वह पंडित जी के बताये पते पर चला गया | वहा एक आदमी कुर्सी पर बेठा था उसे देख कर उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा | वह दरवाजे पर खड़ा मन ही मन सोचने लगा की मेरा गधा कितना सुंदर और बड़ा आदमी बन गया है | यह सब पंडित जी कृपा का फल है |

तभी अफसर ने दरवाजे की तरफ नजर उठाई और उसी वक्त घोबी ने झट से दाने वाला थेला उसे दिखा दिया | अफसर यह देखकर हेरान हो गया और उसे अंदर बुला कर पूछा, “क्या बात है? तुम कोन हो? म यहाँ क्या कर रहे हो ?”

घोबी बोला, “क्यों, तू अपने मालिक को भी भूल चूका है तू आदमी क्या बन गया सब कुछ भूल गया ?”

घोबी की बाते सुनकर अफसर को बड़ा अजीब लगा, वह सोचने लगा कही यह आदमी पागल तो नहीं, वो बोला, भाई साहब मुझे आपकी बात समझ में नहीं आ रही है | आप कोन है और क्या चाहते है |”

घोबी को अब गुस्सा आ रहा था, उसने उस का हाथ पकड़ कर बोला, चलो मेरे साथ बहुत हो गया तुम्हारा तमाशा | अफसर को भी अब गुस्सा आ गया और उस ने चपरासी को बुलाया और बाहर निकालने को कहा |

घोबी को और गुस्सा आ गया र जोर जोर से चिल्ला कर बोला, “नालायक गधा कही का | मेने तुझे गधे से आदमी बुलाया और आज तू मुझे ही पहचाने से इंकार कर रहा है | अब देख में तुझे कैसे मजा चखता हु |”

गुस्से में घोबी सीधा पंडित जी के पास गया और सारी बात बताई और बोला, “पंडित जी इसे फिर से गधा बना दो | नलायक को आदमी बन कर घमंड आ गया | मुझे पहचानने तक से इंकार कर दिया |”

पंडित जी ने कहा,जैसे तुम कहो, “में उसे फिर से गधा बना देता हु | लेकिन इस काम के फिर से पांच सो रुपे लगेगे और तीन दिन बाद आ कर अपने गधे को ले जाना यहाँ से |

तीन दिन बात घोबी आया और अपने गधे को वहा से डंडे मरता हुआ वहा से ले गया |

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