Home Hindi क्यों करते है लोग लक्ष्मी की अंधी उपासना

क्यों करते है लोग लक्ष्मी की अंधी उपासना

मनुष्य की ज़रुरतो की पूर्ति के लिए धन बहुत ज़रूरी है इसलिए धन की कामना करना भी स्वाभिक है | इस धरती पैर ऐसा कोई मनुष्य नहीं जिसे धन न चाहिए हो पर प्रश्न तब उठता है जब धन, साधन न रह कर साध्य बन जाता है |

धन का अपने आप में कोई महत्व नहीं है जब तक उससे हमारी ज़रूरते पूरी न हो जैसे भगवान् क्योकि जब तक हमारे पास खुशिया है तब तक भगवान् है और जब कुशिया नहीं भगवान् भी नहीं | ज़रूरत से जयादा धन भी व्यर्थ है अगर वो किसी के काम न आय | आज का समाज बीमार है क्योकि इस समाज में व्यक्ति का सम्मान उसके गुणों और उसकी योग्यता के आधार पर नहीं अपितु धन के आधार पर होता है | निजी और सार्वजनिक समारोहों में धनपति को विशिष्ट स्थान दिया जाता है | प्रशासन में सामान्यत: कोई भी ऐसा कार्य नहीं होता जो धन के बूते न करवाया जा सके | आज के व्यावसायिक समय में हर वस्तु बिकाऊ है अमीर आदमी अपने के बल पर नेतिक और अनेतिक काम करवाने में सक्षम होते है |

अमीर आदमी ही नहीं अपितु आम आदमी भी धन के आधार पर ही मनुष्य की कीमत आकते है | जिस व्यक्ति के पास आलीशान इमारत, मोटरकार, एशो – आराम की अन्य कई वस्तुए होती है उसे समाज में विशिष्ट सम्मान प्राप्त होता है | किसी के पास ये वस्तुए ज्यो – ज्यो कम होती चली जाती है त्यों – त्यों समाज में उसका सम्मान भी कम होता जाता है , भले योग्यता और प्रतिमा के मामले में वह कितना ही महान क्यों न हो | इसे विडंबना ही कहा जायगा की काले धन और कालाबाजारी की कटु आलोचना के बावजूद समाज में धनपतियो की सम्मान मिलता है और बाकि लोग भूल जाते है की उसने यह धन किस तरह कमाया है |

दुख की बात तो यह है की ये न केवल राजनेतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रे में अपितु धार्मिक क्षेत्र पैसे वालो को आगे किया जाता है | जो जितने पैसे देगा वो उतना ही महान इन्सान है और वो भगवान् का सच्चा भक्त है यहाँ तक की अगर एक मंदिर में लम्बी लाईने लगी हुई है और आप इंतजार नहीं कर सकते तो आप दलालो को पैसा दे कर अपना नंबर ज़ल्दी लगवा सकते है | धार्मिक जलूसो में भी धनियों को प्राथमिकता दी जाती है | कई बार तो मुझे ऐसा लगता है जैसे धार्मिक स्थल धार्मिक न रहे कर बजार बन गए हो |

ऐसे माहोल में यह स्वाभिक है की इन्सान अधिक से अधिक धन कमाने के लिए मजबूर है जाहे वो रास्ता गलत हो या यही, उसे फरक नहीं पड़ता | बस उसका मकसद है पैसा कमाना, पर उसको यह नहीं पता की वो पैसे कमाने के लिए इतना अँधा हो गया की वो अपना सब कुछ खो रहा है |

लेखक: युग्म

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