end of spirit
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जिन्न का अंत

रवि बहुत बुदिमान लड़का था एक बार की बात है वह अपने गाँव से दुसरे गाँव जा रहा था और रात होने वाली थी | रास्ते में जाते समय उसको लगा उसने कोई आवाज सुनी है जैसे कोई कहा रहा हो, “बचाओ, बचाओ, मुझे यहाँ से बहार निकालो |

रवि ने उधर – इधर देखा परन्तु उसको कोई दिखाई नहीं दिया | वो आगे बड़ने लगा, तभी उसको वो अवाज आई, “मुझे यहाँ से निकालो, मेरी कोई मदद करो” | रवि ने फिर से इधर – उधर देखा परन्तु उसको कोई न दिखा, तभी उसकी नजर पेड़ के नीचे पड़े एक चिराग पर पड़ी | रवि उसके पास गया और तभी उसको फिर वोही आवाज उस चिराग में से सुनाई दी |

रवि ने बिना कुछ सोचे उस चिराग का ढकन खोल दिया | ढकन खुलते ही उसमे से बहुत सारा धुँआ निकला और साथ ही एक जिन्न भी निकला |

देखते – देखते वह जिन्न बहुत बड़ा हो गया | यह देख कर रवि डर गया और पेड़ के पीछे चुप गया | जिन्न या देख कर बोलो, “में जिन्न हु, मुझे एक जादूगर ने अपने जादू से मुझे इस चिराग में बंद कर दिया था में बहुत सालो से भूखा हु मुझे भूख लग रही है और अब में तुम्हे खा जाऊगा |”

यह सब सुनकर रवि बहुत डर गया, लेकिन हिम्मत जुटा कर उसने कहा, “ठीक तुम अपनी भूख मिटा लेना परन्तु उससे पहले मेरा एक सवाल है तुमसे | जिन्न बोला पूछो |

रवि बोला, “तुम मुझे बेवकूफ नहीं बना सकते, जरा तुम अपने शरीर का आकार तो देखो और इस चिराग का, तुम इतने बड़े और ये चिराग इतना छोटा सा | तुम इस चिराग में नहीं आ सकते, तुम झूठ बोल रहे हो |”

यह सुनकर जिन्न को गुस्सा आ गया और बोला, “जिन्न कभी झूठ नहीं बोलते, अगर तुम्हे मेरी बात पर भरोसा नहीं है तो अभी में तुम्हे फिर से दिखता हु | और देखते-देखते जिन्न छोटा हो गया और चिराग के अंदर चला गया | रवि तो यही चाहता था |

उसने झट से चिराग का ढकन बंद कर दिया  और बोला, “तुमने बिलकुल ठीक कहा था की जिन्न झूठ नहीं बोलते है लेकिन थोड़े बेवकूफ जरुर होते है | अब फिर से तुम इस चिराग में बंद हो गए हो | रवि ने उस को पथर से बंधा और पास ही नदी में फ़ेंक दिया |

सीख: मुसीबत के समय घबराने से कुछ हल नहीं मिलता | हमेशा अपनी दिमाग का इस्तेमाल करना चाइये जैसे रवि ने किया |

 

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