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एक सवाल

एक बार की बात है बीरबल दीवान-ए-खास में पहुचे तो वहा बिलकुल सन्नाटा था | जो दरबारी उन्हें घृणा से देखते थे आज वो दरबारी उनकी तरफ विनर्मता से देख रहे थे | यह देखकर बीरबल को बहुत अजीब सा लगा | उन्हें लगा कोई न तो कोई बात है | तभी बीरबल की नजर वहा बेठे एक अजनबी पर पड़ी |

बीरबल को आते देखकर अकबर ने आज दी बीरबल, “काबुल के बादशाह के यहाँ से एक दूत आया है इन्होने हमारे दरबारियों की बहुत तारीफ सुनी है और ये अपने कुछ सवाल ले कर आये है और यह चाहते है की हम उन सवालों का जवाब दे |”

बीरबल ने कहा, बादशाह अकबर यह तो बहुत समान की बात है हमारे लिए |”

बादशाह अकबर ने कहा, आप पूछ सकते है अपने सवाल |

दूत ने कहा, “ठीक है में अपना सवाल दोहराता हु, इस बर्तन में क्या है?”

शायद सूखे मुवे हो, एक दरबारी बोला |

दुसरे ने कहा, “बेशकीमती रत्न, रेशम, सोने, चांदी | हमे क्या पता इसमें क्या होगा”

अब बीरबल की बरी आई, बीरबल ने दूत से पूछा, “क्या में इसे नजदीक स देख सकता हु |”

गुट ने कहा, जरुर आप नजदीक जा कर देख सकते है |”

बाकि दरबारी एक दुसरे को देख रहे थे और बाते कर रहे थे की यह बीरबल क्या कर रहा है | बीरबल बर्तन के पास गए और अचानक उन्होंने उसके मुह पर बंधा कपड़ा हटाकर अंदर झंका |

बर्तन खली है बीरबल ने कहा |

यह देख कर दूत दुस्से में आ गया और बोला, आप को बर्तन का कपड़ा हटाना नहीं चाहिए था |

बीरबल ने कहा, हजूर आपने कपड़ा हटाने के बारे में कुछ नहीं कहा था और आप ने मुझे इसे पास से देखने की इजाजत बी दी थी |”

यह देखकर अकबर खुश हो गए |

दूत ने बादशाह अकबर से पूछे, मुझे और भी सवाल पूछने है |”

मेरा अगला सवाल है, “पहला धरती का केंद्र कहा है और दुसरा की आसमान में कितने तारे है ?”

यह सवाल सुनते ही सभी दरबारी हेरान हो गए | सभी दरबारी अपना अपना मुह छुपाने लगे |

बीरबल ने कहा, जहापना मुझे कुछ वक्त चाहिए इन सवालों के जवाब देने के लिए |

दूत ने कहा, ठीक है में अपनी १० और दिन आप के देश में हु तो आप के पास १० दिन है मेरे सवालों के जवानो देने की लिए |

बीरबल दूत का धन्यवाद किया और कहा, “यह १० दिन आप हमारे मेहमान है हमारे राज्य की खूबसूरती का मजा उठाइए”

९ दिन बीरबल का कुछ नहीं पता था की बीरबल कहा है | कई दरबारी कहे रहे थे की बीरबल सवाल सुनकर भाग गया | परन्तु ठीक १० वे दिन बीरबल ने सभी दरबारियों और दूत को दीवान-ए-खास के बाहर इक्कठा होने को कहा |

बीरबल ने कहा, “हमने बहुत बड़ी खोज की है, और कहते हुए उन्होंने जमीन पर बने एक निशान की और इशारा किया और कहा जहा हम खड़े है वाही धरती का केंद्र है |”

दूत यह सुनकर हक्का बक्का रहा गया | बीरबल मुस्करा कर बोले क्या में सही कहे रहा हु हजूर |

दूत ने कहा, “आप बिलकुल सही कहे रहे है |”

अब आप का दूसरा सवाल, बीरबल ने वहा खड़े एक द्वारपाल को बुलाया | वह द्वारपाल वहा छ: भेड़े ले कर आ गाय |

बीरबल ने दूत से कहा, हजूर आप का दूसरा सवाल था की असमान में कितने तारे है | इसका जवाब है असमान ने उतने ही तारे है जितने इन छ: भेड़ो के शरीर पर बाल | आप चाहे तो गिन सकते है |

यह सुनते ही दूत की बोलती बंद हो गई, परन्तु धीरे स्वर में बोला, फिर भी असमना में कितने सितारे है | बीरबल ने कहा, “हजूर आप ने संख्या नहीं पूछी थी | आप से सिर्फ यह पूछा था की असमान में किते सितारे है और इसका जवाब हमने दे दिया |

दूत जनता था की वो हार गया था यह देखकर बीरबल और अकबर मन ही मन खुश हो रहे थे |

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