ऊँची गर्दन ऊँट की

राजस्थान में एक गाँव में एक ऊँट रहा करता था उसे पत्ते खाने का बहुत शोक था | उसने सोचा काश मेरे गर्दन इतनी ऊँची हो जाए की में बड़े बड़े पेड़ो के पत्ते भी खा सकू | मुझे ज्यादा घूमना न पड़े |

उस दिन वह सोचते सोचते सो गया और उसने एक सपना देखा की उसकी गर्दन बहुत बड़ी हो गई है | यह देख कर वह बहुत खुश हो गया | वह अपनी लंबी गर्दन को दूर दूर तक फेलाकर बेठे बेठे ही पेड़ो के सारे पत्ते खा जाता था | अब उसे चले – फिरने की जरुरुत नहीं थी बस बेठे बेठे ही काम करता था |

एक दिन की बात है वह एक पेड़ के निचे बेठा पत्ते का रहा था की अचानक आकाश ने काले बादल आ गए और फिर थोड़ी देर में बदलो से ओले गिरने लगे | यह देखा ऊँट अपनी जान बचाने के लिए इधर – उधर भागने लगा | उसे बहुत कठिनाई हो रही थी अपनी लम्बी गर्दन के साथ भागने में | उसने दूर एक गुफा देखी और वहा चला गया | उसने देखा गुफा बहुत छोटी सी है | वह पूरा नहीं आ सकेगा तो उसने अपनी गर्दन उस गुफा में डाल दी |

उस गुफा में एक भेड़िया का जोड़ा रहता था उन्होंने सोचा की कोई हमारा दुश्मन आ गया और उन दोनों ने ऊँट की गर्दन को नोच डाला | ऊँट अपनी गर्दन को तेजी से बाहर नहीं निकाल सका और वह मर गया | Read the rest of this entry »

मेमना और भेड़िया

एक बकरी थी उसके दो बच्चे थे बड़े का नाम सोनू और छोटे का मोनू था | सोनू भोला-भाला और चंचल था परन्तु छोटे वाला समझदार था |

एक दिन की बात है बकरी अपने बच्चो को दूध पिला रही थी उसने अपने बच्चो को कहा, “बच्चो, अब में चरने जा रही हु | तुम दोनों घर पर ही रहना | बाहर नहीं जाना क्योकि बाहर एक भेड़िया घूम रहा है और वो छोटे छोटे बच्चो को खा जाता है |

मोनू ने कहा, “माँ, में तो नहीं निक्लुगा परन्तु बड़े भैया को कहा दो, ये न जाए |”

सोनू ने कहा, “माँ, में भी नहीं निक्लुगा घर से बाहर |”

यह सुनकर बकरी चरने के लिए चल पड़ी दोनों बच्चो को घर छोड़ कर | वहा पास ही में एक कुता रहा करता था जिसका नाम हिरा था |

बकरी ने हीरे से कहा, भाई में अपने साथियों के साथ चरने जा रही हु तो क्या आप मेरे बच्चो का ध्यान रख लो गे क्या?

हिरा ने कहा, “बिलकुल बकरी बहन, तुम आराम से जाओ |”

कुछ समय बाद सोनू ने मोने से कहा, छोटे, में जरा देख कर आता हु की माँ किघर गई है तू घर पर ही रुक | में अभी आता हु | Read the rest of this entry »

मूर्ख को उपदेश

एक जंगल में एक बहुत बड़ा पेड़ था उसी पेड़ बहुत सारी चिड़िया घोंसला बना कर रहती थी | एक दिन की बात है जंगल में बहुत तेज बारिश हो रही थी सभी चिड़िया अपने अपने घोंसले में आ गई थी |

थोड़ी देर में वहा एक बंदर भी आ गया | वह पूरा का पूरा भीग चूका था और ठंड में थर – थर कांप रहा था | वह अपने आप को बारिश से बचा रहा था पेड़ की पतियों के पीछे | परन्तु बारिश बहुत तेज हो रही थी |

वहा बेठी चिड़िया यह सब देख रही थी और उन्हें उस पर तरस आ रहा था | एक चिड़िया ने उससे कहा – “अरे बन्दर भाई, तुम अपने घर क्यों नहीं चले जाते | बारिश में क्यों भीग रहे हो |”

यह सुनकर बन्दर ने कहा, “मेरे पास कोई घर नहीं है|”

चिड़िया ने कहा, “तुमने अपने रहने के लिए घर क्यों नहीं बनाया ? यदि तुम ने ऐसा किया होता तो आज तुम भी अपने घर में बेठ कर आराम से बारिश का मजा ले सकते थे | यह खड़े भीग न रहे होते |”

यह सुनकर बन्दर को गुस्सा आ गया और उसने चिडियों के सारे घोंसले थोड डाले | यह देखकर चिड़िया दुखी हो गई और सोचने लगी की मूर्खको उपदेश देना बेकार है |

मछली की चुतराई

एक जंगल में एक तलाब था उस तलाब में बहुत सारी मछलिया रहती थी | उनमे से एक मछली बहुत चंचल थी | वह कभी इधर और कभी उधर भागती रहती थी इसलिए उसके माता – पिता ने उसका नाम चंचल रख दिया था |

चंचल को नई – नई चीजो को देखने का बहुत शोक था और इसी कारण वह बहुत दूर दूर तक अकेली चली जाती थी | एक दिन की बात है वह तलाब के किनारे टहल रही थी | आकाश में एक चील उड़ रही थी | उसने चंचल को अकेले टहलते हुए देखा और उसे देखकर उसके मुंह में पानी आ गया | वह तेजी से आई और चंचल को अपने पंजो में दबोचा को उसको आकाश में ले गई | चचंल यह सब देख कर डर गई, परन्तु उसने अपने होश नहीं खोए | उसने चील से पूछा, “तुम ने मुझे क्यों पकड़ा है ?”

चील बोली, “मुझे बहुत भूख लग रही है इसलिए में तुझे पकड़ा है और अब में तुझे खा जाउंगी |”

चंचल उसी समय अपने बचने का उपाय सोचने लगी | वह चील से बोली, “मोसी, यह बात तुम मुझे प्यार से बता देती तो में अच्छे से तयार होकर आती | देखो अभी तो में बहुत गन्दी बनी हुई हु | मेरे सारे बदन पर तलाब की मिटटी लगी हुई है | तुम्हे खाने में मजा भी नहीं आएगा | हम एक काम कर सकते है की तुम मुझे पानी में छोड़ दो में स्नान करके फिर तुम्हारे पास आ जाउंगी और फिर तुम मुझे खा लेना |

चील सोच कर बोली, “ठीक है तुम स्नान करके मेरे पास आ जाना और यह कह कर उसने चंचल को वापिस तलाब में छोड़ दिया | Read the rest of this entry »

मेना की सीख

एक गाँव में एक परिवार रहता था उस घर में दो बच्चे थे एक लडकी और एक लड़का | लडकी का नाम हेमा और लडके का नाम रवि था |

एक दिन की बात है निधि अपने दोनों बच्चो के साथ अपने घर के आंगन में खड़ी थी उसने पेड़ पर एक मेना को देखा और अपनी बेटी को कहा, बेटा जाओ और रसोई में से एक रोटी ले आओ |

हेमा रोटी ले आई और अपनी माँ को दे दी | निधि ने उस रोटी के टुकड़े किये और पेड़ के पास बिखेर दिए | मेना ने रोटी के टुकड़े देखे और अपने साथियों को कांव – कांव आवाज लगाई अपनी साथियों को | आवाज सुनकर आस पास के सभी कुए उसके पास आ गए और सभी मिल कर रोटी के टुकड़े खाने लगे |

हेमा ने माँ से पूछा, “माँ, इसने अपने साथियों को क्यों बुलाया, ये सारी रोटी खुद भी खा सकता था”

निधि, “हेमा तुम ने बहुत अच्छा प्रशन पूछा है | बेटा वह रोटी अकेले नहीं खाना चाहता था और वह चाहता था की उसके बाकि साथी भी भेखे ने रहे और इसलिए उसने कांव – कांव करके अपने बाकि साथियों को भी बुला लिया ताकि उनका पेट भी भर सके |

यह सुनकर बेटा रवि बोला, “माँ, तो क्या हमे भी अकेले नहीं खाना चाहिए ?” Read the rest of this entry »

कैसे मिले जेवर

एक नगर में एक बहुत बड़ा धनी व्यापारी रहता था जिसका नाम मोहनदास था | वह बहुत इमानदार था उसकी बड़ी इज्जत थी | उसकी दुकान के पास ही एक बुढिया रहती थी वह बहुत दिनों से सोच रही थी की तीर्थ यात्रा पर जाने की परन्तु उसके पास कुछ सोने-चांदी की चीजे थी | जो की वो घर पर छोड़ना नहीं चाहती थी | तो उसने सोचा की क्यों ने में इसे मोहनदास के पास छोड़ आऊ, और फिर में अपनी तीर्थ यात्रा पर जा सकुगी |

उस ओरत ने अपना सारा सोना, चांदी के डिब्बे में बंद किया और मोहनदास के पास पहुच गई और बोली, “मोहनदास जी, में तीर्थ यात्रा पर जा रही हु तो क्या में आप के यहाँ अपने जेवर रख सकती हु क्या?”

मोहनदास ने मना कर दिया, परन्तु बुढिया ने बहुत विनती की और डब्बा खोल कर उसके सामने रख दिया | जेवर देख कर उसका मन ललचा गया और बोला, “ठीक है तुम इतनी विनती कर रही हो तो रख जाओ |”

बुढिया घर आ गई और अगले दिन तीर्थ यात्रा पर चल गई | २ महीने बाद बाद जब बुढिया वापिस आई और मोहनदास के पास अपने जेवर लेने गए तो उसने मना कर दिया |

वह बोला, “हमारे यहाँ पर तुमने कुछ नहीं रखा था और यहाँ से चले जाओ |”

यह सुनते ही बुढिया रोने लगी और उसे विनती करने लगी परन्तु उसने एक न सुनी और अपने नोकर को बुला कर उससे धक्के देकर घर से बहार निकाल दिया | Read the rest of this entry »

अभ्यास का फल

बहुत पुरानी बात है एक राजा जिसका नाम हरीश नाथ था उसको शिकार का बहुत शोक था | वो ज्यादा से ज्यादा वक़्त अपने दल – बल के साथ शिकार पर ही रहता था | वो अपने शिकार पर हमेशा अपनी दासी हेमा को ले जाना नहीं भूलता था जब भी राजा शिकार से थका हारा आता तो दासी फितना उसकी सेवा करती |

एक बार की बात है राजा अपने शिकार से दोरान अपने साहस और निशानेबाजी का प्रदशन कर रहा था क्योकि उस दिन वो अपने शोर्य और कोशल की प्रंशसा सुनना चाहता था वह खड़े सभी ने राजा के शोर्य और कोशल की बहुत तारीफ की | परन्तु हेमा सिर्फ प्रभावित हुई उसने राजा की प्रंससा नहीं की |

हेमा ने कहा, “महाराज, शिकार खेलते – खेलते बहुत साल हो गए है और आप को बहुत अभ्यास भी हो गया है | इसलिए तो आप इतना अच्छा निशाना लगा सकते हो | में तो इसी साहस को आप की सफलता का कारण मानती हु |

यह बात सुनते ही राजा को बहुत गुस्सा आ गया और उसने अपने सिपाहियों को आज्ञा दी की इसे मार दिया जाए | हेमा ने कहा मुझे थोडा सा समय दीजिए में ये बात साबित कर दुगी और अगर न कर सकू तो फिर मुझे मार देना | यह सुनकर अधिकारियो को दया आ गई और अधिकारियो ने फितनी को गाँव ने घर में छिपा दिया |

हेमा जिस घर में छिपी हुई थी वहा पर एक सीढी थी जिसकी पचास पोडिय थी | हेमा ने अपने आप से वादा कर लिया था की वो अपनी बात को सिद्ध करके दिखाएगी | उसने ने एक नवजात बछड़ा लिया और हर रोज बछड़े को उठा कर वो पचास सीढी चढती और उतरती थी कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा | Read the rest of this entry »

जैसा कुसूर वेसी सजा

एक दिन की बात है बादशाह अकबर कुछ खामोश से थे अपने दरबार में | सभी दरबारी यह सोच रहे थे की बादशाह अकबर को क्या हुआ हुई | वो इतने खामोश क्यों है |

हिम्मत करके एक दरबारी ने बादशाह अकबर से पूछ ही लिया, “बादशाह, आज आप इतने खामोश क्यों हो, आप किस सोच में दुबे हो? क्यों सी परेशानी आप को सता रही है |

बादशाह भी इसी बात का इंतजार कर रहे थे की कोई उनसे यह सवाल पूछे | वह तुरंत बोले, “क्या बताऊ, आज एक शख्स ने हमारी दाढ़ी खिंची है और हमे नोचा भी | और अब हम यह सोच रहे ही की उसे क्या सजा दी जाए |”

यह सुनते ही जैसे सारे दरबारियों के होश उड़ गए | एक दम ख़ामोशी फेल गई चारो तरफ | सब यह सोचने लगे की ऐसी गुस्ताखी क्यों कर सकता है | किसको अपनी जान प्यारी नहीं है | कोन हो सकता है |

एक दरबारी ने कहा, “महाराज, इसमें इतना सोचने की क्या बात है | उस शख्स का सर कलम कर देना चाहिए | कोई बोला, “उसे सूली पर चढ़ा देना चाहिए, कोई बोला, “उसका सर हाथी के पेरो तले दबा देना चाहिए |” सभी दरबारियों ने कुछ न कुछ बोला |

आखिर में बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा, “तुम ने कुछ नहीं बोला, बीरबल | तुम्हारे मुताबिक उस शख्स को क्या सजा मिलनी चाहिए |” Read the rest of this entry »

कैसे हुआ बंटवारा

एक गाँव में एक किसान रहता था उसके चार बेटे थे किसान बहुत बीमार रहता था वह हमेशा सोचता रहता की उसके चारो बेटे मेरे जाने के बाद बटवारा कैसे करेगे, कही वो एक दुसरे से लड़ने ने लग जाए | क्यों न में ही अपने जीते जी बंटवारा कर दू ताकि आगे जाकर कोई परेशानी न हो किसी को भी |

उसने अपने कमरे में चार घड़े दबा दिए, फिर उसने अपने चारो बेटो को बुलाया और कहा, “बेटो, मुझे बहुत अच्छा लगता है जब तुम सभी लोग मिलजुल कर रहते हो | मेरे जाने के बाद भी तुम लोग ऐसे ही रहना | मेरे मर जाने के बाद मेरी चारपाई के निचे मैंने सभी के लिए कुछ न कुछ रखा है | “

कुछ दिन बीतने के बाद उस किसान की मृत्यु हो गई | सभी बेटो ने उसका अंतिम संस्कार अच्छे से किया और साथ साथ रहने लगे | कुछ बीतने के बाद सभी में तू-तू में-में होने लगी |

तब बड़े भाई ने कहा, अब हमे बंटवारा कर लेना चाहिए | और जैसा उनके पिता ने कहा था उन चारो ने वैसा ही किया | पिता की चारपाई उठाई और खोदने लगे | चारो बेटो को एक – एक घडा मिला | पहले और दुसरे घड़े में मिटी मिली, तीसरे में एक रस्सी, और चोथे में कोयले | यह देखकर सभी हेरान हो गए |

बड़े भाई ने यह देख कर कहा, “इसमें कुछ न कुछ तो रहस्य है | पर क्या?” Read the rest of this entry »

कैसे मरा कपटी बगुला

बहुत पुरानी बात है एक दिन एक बुढा बगुला तालाब के किनारे बेठा रो रहा था | उसे बहुत जोर से भूख लग रही थी उसमे अब ताकत नहीं थी की वो मछलिया पकड़ सके | तभी वहा एक कछुआ आया और बोला, “बगुला चाचा क्या हुआ, रो क्यों रहे हो और आज तुम मछलिया नहीं खा रहे | सब ठीक ठाक है ना |

उसने कहा, “नहीं बेटा | आज मेरा ब्रत है इसलिए में मछलिया नहीं खा रहा हु |

यह सुनकर कछुआ बोला, “चाचा, इस उर्म में ब्रत नहीं रखना चाहिए |”

उसने कहा, “बेटा ! में यही पर बड़ा हुआ और यही पर मर जाउगा | लेकिन कल रात मुझे एक सपना आया | मेरे सपने में पानी देवता ने मुझे दर्शन दिए और कहा, बेटा अब कुछ सालो तक इस तालाब में पानी नहीं बरसे गा | यह सुनकर मुझे बिलकुल नीद नहीं आई और इसलिए में रो रहा हु |”

यह सुनकर कछुआ वहा से चला गया और उसने यह बात सभी तालाब के जानवरों को बता दी | यह बात सुनते ही सब जानवर डर गए और धीरे धीरे तालाब छोड़ कर जाने लगे और कई जानवर चाचा बगुले के पास आये और बोले, “चाचा ऐसे तो तुम सभी मर जाएगे | इस से बचने का कोई उपाय है क्या ?”

बगुले ने कहा, “हा एक उपाय तो है | इसी तालाब से थोड़ी दूर एक और गहरा तालाब है अगर तुम लोग कहो तो में तुम्हे अपने पीठ पर बिठा का उस तालाब में ले चलूगा | इससे तुम सभी लोग बच जाओगे | “ Read the rest of this entry »


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