सिंहासन का सच

एक नगर था सुंदरनगर | वहा के राजा बहुत उदास रहता था और जब – जब उदास रहता था उसकी प्रजा भी उदास रहता था और जब वो खुश रहता था तो उसकी प्रजा भी खुश रहती थी इसलिए राजा के पास लोगो का आना जाना लगा रहता था उसको खुश रखने के लिए | लेकिन दिक्कत यह थी की राजा खुश ही नहीं होता था |

एक दिन की बात है दरबार में एक व्यक्ति आया | उसका नाम महेश था | उसने राजा के सामने कुछ ऐसा कहा की राजा को हंसी आ गई | महेश बहुत हसमुख सभाव का था | वह किसी भी बात को मजाक में बदल देता था | राजा ने उसको अपने पास ही रख लिया |

महेश को आज तक किसी ने भी दुखी नहीं देखा था | उसके साथ जो भी रहता, वो उसे हसा – हसा का पागल कर देता था |

एक दिन की बात है दरबार चल रहा था की अचानक राजा को महेश की चिल्लाने की आवाज सुनी | ऐसा लग रहा था की मनो जोर – जोर से रो रहा हो |

राजा दरबार छोड़ कर उसके पास गए और देखा की उसके सेनिक उसकी बुरी तरह से पिटाई कर रहे थे | राजा को यह देख कर बहुत गुस्सा आ गया और जोर से बोले, “छोड़ तो इसे तुम, तुरंत” |

सेनिको ने उसे छोड़ दिया और खड़े हो गए | राजा ने पूछा, “तुम लोग इसे क्यों मार रहे थे?” Read more »

दो चप्पले की कहानी

एक शहर में एक आमिर व्यापारी रहता था उसका नाम मखमल राम था | उसकी कई मिले थी | उसके पास पैसो की कभी कमी नहीं रही | लेकिन बहुत सारे पैसे होने के कारण भी वह मन से खुश नहीं था | वन मन से अकेला था वह साथ साथ क्न्जुज भी था अपने ऊपर एक रुपया खर्च नहीं करता था | वह हमेशा पुराने कपड़े पहेनत और चप्पले ऐसी की उसे देखने का भी मन न करे |

एक बार की बात है मखमल राम एक कार्यकर्म में गए | उन्होंने अपनी चप्पले बहार उतारी और उंदर चले गए | जब वह थोड़ी देर बाद आये तो देखा की वहा कोई भी चप्पले नहीं पड़ी है सिवाए एक नई जोड़ी चप्पल के | उन्होंने मन ही मन में सोचा उन चप्पलो को क्यों ले जा सकता है | उन्होंने सोचा थोड़ी देर इन्तेजार कर लेता हु शायद कोई आ जाए लेकिन कुछ देर इन्तेजार करने के बाद भी वहा कोई नहीं आया | तो उन्होंने वाज नई चप्पले फनी और चल पड़े | इतनी ही देर में एक सज्जन आये और अपनी चप्पले उनके पैर में देख आग बबूला हो गए और मखमल राम पर जोर जोर से चिल्लाने लगे | यहाँ तक की उन पर चोरी का इल्जाम भी लगा दिया | इसके लिए उन्हें भारी दंड भी देना पड़ा उस आदमी को |

मखमल राम को लगा की यह सब कुछ उन चप्पलो की वजह से हुआ है और आखिर कार उन्होंने उसे फेंकने का निर्णय ले लिया |

उनके घर के पीछे एक नहर थी | उन्हीने ने वही पर अपनी चप्पले फ़ेंक दी | मखमल ने जहा अपनी चप्पले फेंकी उसी जगह एक मछुआरे ने जल बिछा रखा हुआ था | चप्पले उनकी जल में अटकी और जाल फट गया | मछुआरे ने वह प्रसिद्ध चप्पले पहचान इ सीधा मखमल राम के पास आ गया और मखमल राम से अपने नुकसान की भरपाई मागने लगा | Read more »

किस्सा जादुई पेंसिल का

एक समय के बात है एक छोटे से शहर में एक लड़का रहता था जिसका नाम रवि था वह बहुत ही गरीब था | वह दिन भर काम करता था और जो कुछ मिलता था रात को वह उन पेसो से खाना खाता था और फिर सडक किनारे ही सो जाता था | आने जाने वाले लोग दया खा कर उसे कुछ न कुछ दे दिया करते थे | उसे चित्र बनाना बहुत पसंद था जब भी उसे खली समय मिलता वह, चित्र बनाना शुरू कर देता था | जो भी उस चित्र को देखता, देखता ही रहता | उसके चीते बहुत ही सुंदर होते थे |

रवि को परियो की कहानिया बहुत ही अच्छा लगता था | एक दिन की बात है वह भूखा ही सो गया था उस दिन उसने एक सपना देखा की एक परी  उसके सपने में आई और बोली, “रवि, तुम एक बहुत अच्छे हो इसलिए में तुम्हे एक पेंसिल दे रही हु | यह पेंसिल जादुई है इस पेंसिल से जो भी तुम चित्र बनाओगे, वह चित्र सच हो जाएगे | और यह कहकर परी वहा से चली गई |”

रवि जब सुबह उठा तो उसे रात का सपना याद आया, और उसे याद करके बहुत खुश हुआ और सोचने लगा काश यह सपना सच हो जाए | तभी उसकी नजर उसके पास पड़ी पेंसिल देखी, जो सपने में परी ने दी थी | फिर उसने जल्दी से पेंसिल पकड़ी और नाश्ता बनाया | जैसे ही उसने चित्र खत्म किया, नाश्ता उसके सामने आ गया | उसने भर पेट नाश्ता किया |

फिर उसने अपने पहने के लिए कपड़े बनाये | वह भी सच हो गया | फिर उसने अपने सभी दोस्तों को बुलाया और सब के लिए नाश्ता और कपड़े बनाये | उसके सभी दोस्तों ने नाश्ता किया और कपड़े पहने | यह बात आग की तरह पुरे शहर में फेल गई | वहा के राजा तक भी यह बात पहुच गई | उसने अपने सिपाही को भेजा रवि को लाने के लिए |

राजा ने रवि को बोला, सुना है जो भी टीम पेंसिल से बनाते हो वह सच हो जाता है | Read more »

महल का अंसभव स्वपन

बहुत पुरानी बात है एक छोटा सा राज्य जिसका नाम भानगढ़ था भानगढ़ के राजा रविचन्द्र बहुत ही अच्छे इन्सान थे उनकी प्रजा बहुत संतुष्ट थी राजा के मन में भी सभी के लिए बहुत प्यार था उनके दरबारी और उनकी प्रजया भी उनका बहुत आदर सम्मान करती थी | उनके दरबारियों में एक दरबारी हरीश भी था हरीश सभी दरबारियों में से सबसे बुद्धिमान था जब कोई भी समस्या उलझ जाती तो सभी लोग हरीश जी से ही परामर्श करते और हरीश उनकी सहायता करते |

एक दिन की बात है राजा रविचन्द्र को एक स्व्प्पन आया की  उन्होंने के महल बनवाया है | यह कोई आम महल नहीं था उन्होंने देखा उनका यह महल न तो जमीन पर था और न ही पूरा आसमान में | उस महल में दुनिया के सारे ऐशो आराम मोजूद थे दुनिया में ऐसा महल दूसरा कोई न था |

सुबह जब वो उठे तो राजा को महल बार – बार याद आ रहा था राजा ने अपने सभी दरबारियों को अपना यह स्वपन सुनाया और सभी ने राजा के इस काल्पनिक महल की बहुत तारीफ की |

राजा बोले, “में चाहता हु आप लोग किसी ऐसे कारीगर को खोजे जो हमारे इस स्वपन को पूरा कर सके | यह सुनकर सभी दरबारी हेरान रह गए | ऐसा कैसे संभव है हवा में लटका हुआ महल?

कुछ दिनों बाद राजा ने सभी दरबारियों को बुला कर पूछा, :क्या आप लोगो को कोई मिल जो मेरा स्वपन पूरा कर सके |” कब किसी से कोई उतर नहीं मिला तो राजा को गुस्सा आ गया आदेश दे दिया की “ ५ दिनों के अंदर अंदर न मिला तो सभी दरबारियों को उमर केद की सजा सुना दी जाएगी |”  यह सुनकर डर गए और सभी लोग भागे – भागे हरीश के पास गए जो कुछ कल रात पहले ही अपने गाँव से वापिस आये थे | फिर सभी दरबारियों ने उनको सारी बात बताई | Read more »

साथ रहने का मजा

एक जंगल में एक खरगोश रहता था वह बहुत ही स्वार्थी था | वह किसी भी बात करना पसंद करता था वह बस अपने काम की ही बात करता था | यहाँ तक की अपने साथियों के साथ भी नहीं खेलना पसंद नहीं करता था |

उसके माँ बाप भी उसे समजाते थे की बेटा सबके साथ खेलते है, खाना खाते है | वर सोनू उनको भी बोल देता था मुझे किसी के साथ खेलना पसंद नहीं है |

एक दिन की बात है उसके दोस्तों ने उसको कहा, “सोनू आज हम तेरी गेंद के साथ खेलेगे”

सोनू यह सुनते ही जोर से चिल्लाया, “हाथ भी मत लगाना मेरी गेंद को, मेरी गेंद भी खराब हो जाएगी |”

यह सुनकर उसके दोस्त वापिस चले गए |

उनके जाने के बाद वह अकेले ही अपनी गेंद से खेलने लगा | थोड़ी देर खेलने के बाद थक गई और फिर बेठ गई |

जहा वो बेठा था उसके पास ही कुछ चींटिया मिल जुलकर अपना खाना ले कर जा रही थी | यह देखकर सोनू को अच्छा लगा | उसने देखा, की एक पेड़ के पास बहुत सारी चींटिया मिल जुल कर गाना गा रही है और साथ साथ अपना खाना ले कर पेड़ पर चढ़ रही थी | Read more »

अशुभ कोन?

रामगढ़ के राजा हरिश्चंद्र के दरबार में एक रवि नाम के बहुत विद्वान दरबारी थे | उनकी प्रशिधि चारो तरफ पहेली हुई थी | उनके पास हर कोई अपनी अपनी समस्याओ का हल निकालने आते थे, और वो सभी की समस्याओ का हल उनको बताते थे | उन्हें लोगो को मदद करना बहुत अच्छा लगता था |

उसी नगर ने एक किसान रहता था | जिसका नाम अभागु था | असल में उसके माता – पित्य ने उसका नाम सुंदर रखा था लेकिन उस नगर के लोग उसे अशुभ मानते थे क्योकि वह जो भी करता उसे हमेशा नुकसान ही होता था इसलिए लोगो ने उसे अभागु कहना शुरू कर दिया था | यहाँ तक की सुबह-सुबह लोग उसका चेहरा भी देखना पसंद नहीं करते थे |

वहा के राजा हरिश्चंद्र ने भी उसके बारे में सुन रखा था लेकिन वह स्वंय यह चाहते थे की इस बात की जाँच होनी चाहिए | राजा ने कुछ दिनों बात अभागु को राजमहल में बुलाया और रात को वाही रोक लिया और अपने सिपाहियों को यह आदेश दे दिया की मेरे उठने से पहले इसे मेरे सामने खड़ा किया जाए | अगले दिन जब राजा उठे तो अभागु उनकी आँखों से सामने था | उन्होंने उसको देखा और अपने दिनचर्या में व्यस्त हो गए | Read more »

खुबिया है हम सब में

बहुत पुरानी बात है एक बार जंगल का राजा शेर युद की तेयारी कर रहा था | उसने उस दिन अपने सभी जानवरों की एक सभा बुलाई जिसमे हाथी, हिरना, घोडा, भाग, भालू, बंदर, खरगोश और भी कई सारे |

शेर ने एक – एक जानवर को उसका उतरदायित्व समझाया | केवल खरगोश और गधे को काम देना बाकि था | बाकि जानवरों में से एक जानवर बोला, महाराज, “इन दोनों को शामिल मत कीजिये, क्योकि यह दोनों कुछ नहीं कर सकते है बल्कि हमारा काम ही खराब करेगे |”

शेर यह सुनकर बोला, “वह कैसे?”

फिर हाथी बोला, “महाराज, गधा इतना मूर्ख है की हमारे किसी काम का नहीं है और युद में हमे एक बुद्धिमान जानवर की जरूरत है न की मिसी मूर्ख की |”

हिरण बोला, और महाराज खरोगश इतना डरपोक है की वो तो मेरी परछाई से भी डर जाता है | यह किस प्रकार हमारी मदद करेगा युद में |”

फिर सभी जानवर एक साथ बोले, हा महाराज, हा महाराज यह दोनों बिलकुल सही बोल रहे है | एन दोनों को युद में मत लेकर जाईए | Read more »

अत्यधिक ज्ञान

एक शहर में एक लड़का रहता था जिसका नाम रवि था | उसे नई – नई बाते सीखना बहुत अच्छा लगता था उसे जो कोई दीखता उससे प्रश्न पूछता और ज्ञान लेने की कोशिश करता | और कोई संत मिल जाते तो उनके साथ तो घंटो बाते करता रहता | उस इलाके में ऐसा कोई नहीं था जिसके पास जा कर रवि ने कुछ सीखा न हो | ऐसा लगता था जैसे उसका खाना हजम नहीं होता था जब तक वह कुछ नया सीख न ले | अब उस इलाके में ऐसा कोई नहीं बचा था जिसके पास जा कर वो सीख सके | अब वह बहुत परेशान रहने लगा | एक दिन उसने निश्चय किया की वो दुसरे शहर जाएगा और सीखेगा |

उसके शहर के पास दिल्ली शहर था उसने वहा जाने का फेसला किया | उसने सुनना था की वहा के शिशको के पास बहुत ज्ञान है | रवि अपने घर से निकल पड़ा और अगले दिन दिल्ली पहुच गया | वहा जा कर उसने एक विधालय में अपना नाम लिखवाया | और फिर अपनी कक्षा में चला गया | वहा जा कर उसने शिक्षक को प्रणाम किया और शिक्षक ने उसे अपने पास बताया और उसने पूछने लगे की तुमने ने क्या क्या सीखा है? Read more »

बन्दर की सीख

बहुत पुरानी बात है एक बन्दर के किनारे पेड़ पर बेठा हुआ था | उसे बहुत जोर से भूक लगी हुई थी | तभी वहा एक आदमी केलो का एक गुच्छा लेकर पेड़ के नीचे आ कर बेठा गया | बंदर केलो के गुच्छे को देख कर उसके मुह में पानी आ गया | उसका मन किया की वो सारे के सारे केले खा जाए | जब उस आदमी को नीद आ जोंखा आया तो उसका मोका उठाकर बन्दर ने ५-६ केले अपने लिए उठा लिए और पेड़ पर जा कर खा लिए |

जब आदमी की नीद खुली तो उसने एक केला थोडा कर खाने लगा | तभी उसकी नजर बन्दर पर गई | उसके हाथो में केला देखा कर वो समझ गया की उसने गुच्छे में से २-३ केले ले लिए है | उसे यह देख कर बहुत गुस्सा आया |

तभी उसको एक तरकीब सूझी | उसको ध्यान आया की बन्दर को नकल उतराने की बहुत आदत है | उस आदमी ने अब एक केला थोडा और छीलने लगा | यह देखकर बन्दर भी वैसा की करने लगा | अब आदमी ने केला खा लिया और यह देखकर बन्दर ने भी खा लिया | उस आदमी ने एक केला और थोडा और दूर फ़ेंक दिया, यह देखकर बन्दर ने भी एक केला फ़ेंक दिया | उस आदमी ने एक और तोडा और दूर फ़ेंक दिया, यह देखकर बन्दर ने भी फ़ेंक दिया | जब बन्दर ने सारे केले नीचे फ़ेंक दिए तो आदमी ने सारे केले उठा लिए और अपनी पोटरी में रख लिए | Read more »

ईश्वर का कमाल

बहुत पुरानी बात है वर्षा का मोसम था गाँव से बहुत दूर एक बेलगाडी चल जा रही थी | वर्षा अभी हलकी हो रही थी और उस गाड़ी का मालिक जिसका नाम रवि था | तेज वर्षा होने से पहले अपने घर पहुचना चाहता था क्योकि वह शहर से अनाज के बोरे रख कर लाया था

तभी उसकी बेलगाडी का एक पहिया मिटटी में धँस गया | “हे भगवन अब कोन से नई मुसीबत आ गई | उसने उतर कर देखा तो बेलगाडी का पूरा पहिया गीली मिटटी में धँस चूका था जिसको निकलना उसके अकेले के बस का न था |

लेकिन फिर भी उसने हर नहीं मणि | उसने बेलो को खींचना शुरू किया | बेलो ने भी जैसे अपनी पूरी ताकत ला दी हो लेकिन गाड़ी का पहिया बाहर नहीं आया | यह देख रवि को बहुत गुस्सा आया और उसने अपने बेलो को पीटना शुरू कर दिया और फिर हार का वह भी गिनी जमीन पर बेठ गया |

असमान की तरफ देख कर बोला, “हे प्रभ अब आप ही कोई चमत्कार कर सकते हो, जिससे मेरी गाड़ी के पहिया बाहर आ जाए| प्रभु चमत्कार कर दो में पक्का से ५ रुपे का प्रसाद चढ़ाऊँगा |

इतना बोला ही था की अचानक उसको एक आवाज सुनाई दी, रवि क्या हुआ, ऐसे क्यों बेठा है इस बारिश में | देखा तो उसके दो दोस्त राम और श्याम वहा से जा रहे थे | रवि ने उन दोनों को सारी बात बताई | Read more »

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