साथ रहने का मजा

एक जंगल में एक खरगोश रहता था वह बहुत ही स्वार्थी था | वह किसी भी बात करना पसंद करता था वह बस अपने काम की ही बात करता था | यहाँ तक की अपने साथियों के साथ भी नहीं खेलना पसंद नहीं करता था |

उसके माँ बाप भी उसे समजाते थे की बेटा सबके साथ खेलते है, खाना खाते है | वर सोनू उनको भी बोल देता था मुझे किसी के साथ खेलना पसंद नहीं है |

एक दिन की बात है उसके दोस्तों ने उसको कहा, “सोनू आज हम तेरी गेंद के साथ खेलेगे”

सोनू यह सुनते ही जोर से चिल्लाया, “हाथ भी मत लगाना मेरी गेंद को, मेरी गेंद भी खराब हो जाएगी |”

यह सुनकर उसके दोस्त वापिस चले गए |

उनके जाने के बाद वह अकेले ही अपनी गेंद से खेलने लगा | थोड़ी देर खेलने के बाद थक गई और फिर बेठ गई |

जहा वो बेठा था उसके पास ही कुछ चींटिया मिल जुलकर अपना खाना ले कर जा रही थी | यह देखकर सोनू को अच्छा लगा | उसने देखा, की एक पेड़ के पास बहुत सारी चींटिया मिल जुल कर गाना गा रही है और साथ साथ अपना खाना ले कर पेड़ पर चढ़ रही थी | Read more »

अशुभ कोन?

रामगढ़ के राजा हरिश्चंद्र के दरबार में एक रवि नाम के बहुत विद्वान दरबारी थे | उनकी प्रशिधि चारो तरफ पहेली हुई थी | उनके पास हर कोई अपनी अपनी समस्याओ का हल निकालने आते थे, और वो सभी की समस्याओ का हल उनको बताते थे | उन्हें लोगो को मदद करना बहुत अच्छा लगता था |

उसी नगर ने एक किसान रहता था | जिसका नाम अभागु था | असल में उसके माता – पित्य ने उसका नाम सुंदर रखा था लेकिन उस नगर के लोग उसे अशुभ मानते थे क्योकि वह जो भी करता उसे हमेशा नुकसान ही होता था इसलिए लोगो ने उसे अभागु कहना शुरू कर दिया था | यहाँ तक की सुबह-सुबह लोग उसका चेहरा भी देखना पसंद नहीं करते थे |

वहा के राजा हरिश्चंद्र ने भी उसके बारे में सुन रखा था लेकिन वह स्वंय यह चाहते थे की इस बात की जाँच होनी चाहिए | राजा ने कुछ दिनों बात अभागु को राजमहल में बुलाया और रात को वाही रोक लिया और अपने सिपाहियों को यह आदेश दे दिया की मेरे उठने से पहले इसे मेरे सामने खड़ा किया जाए | अगले दिन जब राजा उठे तो अभागु उनकी आँखों से सामने था | उन्होंने उसको देखा और अपने दिनचर्या में व्यस्त हो गए | Read more »

खुबिया है हम सब में

बहुत पुरानी बात है एक बार जंगल का राजा शेर युद की तेयारी कर रहा था | उसने उस दिन अपने सभी जानवरों की एक सभा बुलाई जिसमे हाथी, हिरना, घोडा, भाग, भालू, बंदर, खरगोश और भी कई सारे |

शेर ने एक – एक जानवर को उसका उतरदायित्व समझाया | केवल खरगोश और गधे को काम देना बाकि था | बाकि जानवरों में से एक जानवर बोला, महाराज, “इन दोनों को शामिल मत कीजिये, क्योकि यह दोनों कुछ नहीं कर सकते है बल्कि हमारा काम ही खराब करेगे |”

शेर यह सुनकर बोला, “वह कैसे?”

फिर हाथी बोला, “महाराज, गधा इतना मूर्ख है की हमारे किसी काम का नहीं है और युद में हमे एक बुद्धिमान जानवर की जरूरत है न की मिसी मूर्ख की |”

हिरण बोला, और महाराज खरोगश इतना डरपोक है की वो तो मेरी परछाई से भी डर जाता है | यह किस प्रकार हमारी मदद करेगा युद में |”

फिर सभी जानवर एक साथ बोले, हा महाराज, हा महाराज यह दोनों बिलकुल सही बोल रहे है | एन दोनों को युद में मत लेकर जाईए | Read more »

अत्यधिक ज्ञान

एक शहर में एक लड़का रहता था जिसका नाम रवि था | उसे नई – नई बाते सीखना बहुत अच्छा लगता था उसे जो कोई दीखता उससे प्रश्न पूछता और ज्ञान लेने की कोशिश करता | और कोई संत मिल जाते तो उनके साथ तो घंटो बाते करता रहता | उस इलाके में ऐसा कोई नहीं था जिसके पास जा कर रवि ने कुछ सीखा न हो | ऐसा लगता था जैसे उसका खाना हजम नहीं होता था जब तक वह कुछ नया सीख न ले | अब उस इलाके में ऐसा कोई नहीं बचा था जिसके पास जा कर वो सीख सके | अब वह बहुत परेशान रहने लगा | एक दिन उसने निश्चय किया की वो दुसरे शहर जाएगा और सीखेगा |

उसके शहर के पास दिल्ली शहर था उसने वहा जाने का फेसला किया | उसने सुनना था की वहा के शिशको के पास बहुत ज्ञान है | रवि अपने घर से निकल पड़ा और अगले दिन दिल्ली पहुच गया | वहा जा कर उसने एक विधालय में अपना नाम लिखवाया | और फिर अपनी कक्षा में चला गया | वहा जा कर उसने शिक्षक को प्रणाम किया और शिक्षक ने उसे अपने पास बताया और उसने पूछने लगे की तुमने ने क्या क्या सीखा है? Read more »

बन्दर की सीख

बहुत पुरानी बात है एक बन्दर के किनारे पेड़ पर बेठा हुआ था | उसे बहुत जोर से भूक लगी हुई थी | तभी वहा एक आदमी केलो का एक गुच्छा लेकर पेड़ के नीचे आ कर बेठा गया | बंदर केलो के गुच्छे को देख कर उसके मुह में पानी आ गया | उसका मन किया की वो सारे के सारे केले खा जाए | जब उस आदमी को नीद आ जोंखा आया तो उसका मोका उठाकर बन्दर ने ५-६ केले अपने लिए उठा लिए और पेड़ पर जा कर खा लिए |

जब आदमी की नीद खुली तो उसने एक केला थोडा कर खाने लगा | तभी उसकी नजर बन्दर पर गई | उसके हाथो में केला देखा कर वो समझ गया की उसने गुच्छे में से २-३ केले ले लिए है | उसे यह देख कर बहुत गुस्सा आया |

तभी उसको एक तरकीब सूझी | उसको ध्यान आया की बन्दर को नकल उतराने की बहुत आदत है | उस आदमी ने अब एक केला थोडा और छीलने लगा | यह देखकर बन्दर भी वैसा की करने लगा | अब आदमी ने केला खा लिया और यह देखकर बन्दर ने भी खा लिया | उस आदमी ने एक केला और थोडा और दूर फ़ेंक दिया, यह देखकर बन्दर ने भी एक केला फ़ेंक दिया | उस आदमी ने एक और तोडा और दूर फ़ेंक दिया, यह देखकर बन्दर ने भी फ़ेंक दिया | जब बन्दर ने सारे केले नीचे फ़ेंक दिए तो आदमी ने सारे केले उठा लिए और अपनी पोटरी में रख लिए | Read more »

ईश्वर का कमाल

बहुत पुरानी बात है वर्षा का मोसम था गाँव से बहुत दूर एक बेलगाडी चल जा रही थी | वर्षा अभी हलकी हो रही थी और उस गाड़ी का मालिक जिसका नाम रवि था | तेज वर्षा होने से पहले अपने घर पहुचना चाहता था क्योकि वह शहर से अनाज के बोरे रख कर लाया था

तभी उसकी बेलगाडी का एक पहिया मिटटी में धँस गया | “हे भगवन अब कोन से नई मुसीबत आ गई | उसने उतर कर देखा तो बेलगाडी का पूरा पहिया गीली मिटटी में धँस चूका था जिसको निकलना उसके अकेले के बस का न था |

लेकिन फिर भी उसने हर नहीं मणि | उसने बेलो को खींचना शुरू किया | बेलो ने भी जैसे अपनी पूरी ताकत ला दी हो लेकिन गाड़ी का पहिया बाहर नहीं आया | यह देख रवि को बहुत गुस्सा आया और उसने अपने बेलो को पीटना शुरू कर दिया और फिर हार का वह भी गिनी जमीन पर बेठ गया |

असमान की तरफ देख कर बोला, “हे प्रभ अब आप ही कोई चमत्कार कर सकते हो, जिससे मेरी गाड़ी के पहिया बाहर आ जाए| प्रभु चमत्कार कर दो में पक्का से ५ रुपे का प्रसाद चढ़ाऊँगा |

इतना बोला ही था की अचानक उसको एक आवाज सुनाई दी, रवि क्या हुआ, ऐसे क्यों बेठा है इस बारिश में | देखा तो उसके दो दोस्त राम और श्याम वहा से जा रहे थे | रवि ने उन दोनों को सारी बात बताई | Read more »

कहानी एक अजनबी की

एक शहर एक बीचो बीचो एक बहुत बड़ा मैदान था मैदान में हर छोटे से लेकर बड़े बच्चो तक सभी कोई कोई खेल खेला करते थे | उन्ही बच्चो में से एक बच्चा था रवि | रवि के बहुत सारे दोस्त थे जिनके साथ वो खेला करता था |

एक दिन की बात है रवि अपने दोस्तों के साथ मैदान में खेल रहा था तबी वहा एक अजनबी व्यक्ति वहा से गुजरा | उस व्यक्ति को पहले किसी ने नहीं देखा था | उस व्यक्ति को वहा देख कर उन लडको ने मजाक मजाक में चिल्ला कर बोले, “अरे भाई इधर तो आओ, हमारे साथ थोड़ी देर खेलो” लेकिन उस व्यक्ति ने उन बच्चो की बात को अनसुना कर दिया और आगे चलने लगा | लडके फिर बोले, क्यों भाई, गुगे – बहरे हो क्या? और जोर – जोर से हसने लगे|”

बस उस दिन के बाद से जब भी वह व्यक्ति वहा से गुजरता, सभी लडके उसका मजाक उड़ाते और जोर – जोर से कहते, देखो “गुगा – बहरा जा रहा है और फिर जोर – जोर से हस्ते उसे देखकर | यह सब हरकते रवि चुप चाप खडा देखता रहता था क्योकि उसके माता-पिता ने उसे बडो का आदर करना सिखाया था | या सिलसिला कुछ दिनों तक चलता रहा | अजनबी कभी भी कुछ नहीं बोलता था चुप चाप वहा से जला जाता था |

एक दिन रवि मैदान में जल्दी पहुच गया और तभी वह आदमी वहा से गुजरा | और पता नहीं क्या हुआ उस दिन रवि भी बोल पड़ा और “ओ गुगे – बहरे कहा जा रहा है |” परन्तु उस दिन वह अजनबी भी चुप नहीं रहा | वह रवि के पास गया और बोला, “बेटा, में अपनी बेटी को लेने विधालय जा रहा हु | तुम तो अच्छेबच्चे लगते और कभी भी मेरा मजाक नहीं उड़ाते हो फिर आज क्या हुआ तुम्हे | बेटा बडो से इस तरह बात नहीं करनी चाहिए तुन्हें | यह अच्छी बात नहीं है | Read more »

ये प्रक्रति शायद कुछ कहना चाहती है मुझसे

ये प्रक्रति शायद कुछ कहना चाहती है मुझसे

ये कान के पास से गुजरती हवाओ की सरसराहट

ये पर फुदकती चिडियों की चहचहाहट ,

ये समुंदर की लहरों का शोर,

कुछ कहना चाहती है मुझसे

ये प्रक्रति शायद कुछ कहना चाहती है मुझसे

 

ये चांदनी रात, ये तारो की बरसात,

ये खिले हुए फूल, ये उडती हुई धुल,

ये नदिया की कलकल, ये मोसम की हलचल,

ये पर्वत की चोटिया, ये झींगुर की सीटिया,

कुछ कहना चाहती है मुझसे,

ये प्रक्रति शायद कुछ कहना चाहती है मुझसे

 

उड़ते पंछियों की उमग, धोड़ते हिरणों का तरंग,

ये सूरज की किरण जो भर्ती है रण का हर एक कण,

ये फूल और कांटे, एक करता जग सुगन्धित तो दूसरा वस्त्रो का चीर हरण,

कुछ कहना चाहती है मुझसे,

ये प्रक्रति शायद कुछ कहना चाहती है मुझसे Read more »

Acharaya Chanakya Quotes on Luck

Chanakya-Quotes - 3

अपनी मन की चाह अनुसार सुख भला किसको मिलता है | संसार में सब कुछ भाग्य के अधीन है | अत: जो चीज वश में नहीं है, उसके लिए दुःख नहीं करना चाहिए; संतोष करना ही उचित है |

  • आचार्य चाणक्य

Acharaya Chanakya Quotes on Luck

Chanakya-Quotes - 2

भाग्य राजा को रंक और रंक को राजा बना देता है | घनी को निर्धन और निर्धन को धनी बना देता है |

  • आचार्य चाणक्य
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