बेटी के विदाई का दुःख

कन्यादान हुआ जब पूरा, तब आया समय विदाई का
हँसी ख़ुशी सब काम हुआ पूरा, सारी रस्म अदाई का
तब पूछा सवाल बेटी ने पिता से
पापा क्या सचमुच में छोड़ दिया साथ तुमने मेरा ।।

तुमने कहा मुझे सदा पारी अपने आंगन की,
मेरा रोना न होता था बर्दाश तुमसे,
अब क्या इसी आंगन में कोई नहीं है स्थान मेरा,
अब मेरे रोने का पापा, तुमको बिल्कुल ध्यान नहीं ।।

अब चली सुसराल में अपने. जंहा न कोई है अपने.
न जाने कैसे होगा पति आ आंगन,
पर इतना में कहती हु, न होगा बाबुल आंगन जैसे ||

पापा ले चले मुझे ये अपने साथ, आकर क्यों नहीं धमकाते इन्हें,
नहीं रोकते चाचा ताऊ, भैया से भी आस नहीं,
ऐसी भी क्या गलती हुई मुझसे, कोई आता नहीं पास मेरे,
क्या इतना ही था प्यार मुझसे, रोके न कोई मुझे ||

पिता की बेबसी

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Acharya Chanakya Quotes on Work Result

Acharya-Chanakya (37) - Copy

जो मनुष्य प्रतेक जन्म में जिस प्रकार का दान, तप व् अध्ययन करता है उसी का फल वह हर जन्म में पता है | मनुष्य का जन्म उसके कर्मो के अनुरूप ही होता है |

-    आचार्य चाणक्य

 

Acharya Chanakya Quotes on Work Result

Acharya-Chanakya (38) - Copy

दरिद्रता, रोग, दुःख, बंधन और व्यसन ये सभी मनुष्य के अपराधरुपी व्रक्ष के फल है |

-    आचार्य चाणक्य

Acharya Chanakya Quotes on Work Result

Acharya-Chanakya (39) - Copy

मनुष्य को फल उसके क्रमानुसार ही मिलता है और बुदी भी कर्म के अधीन है | इसलिए बुदिमान व्यक्ति विचार करके ही अपना कार्य किया करते है |

-    आचार्य चाणक्य

Acharya Chanakya Quotes on Work Result

Acharya-Chanakya (41) - Copy

 

जैसे हजारो गायो में भी बछड़ा अपनी माँ को पहचानकर उसके पास पहुच जाता है | ठीक उसी प्रकार किया गया कर्म भी मनुष्य को पहचान क्र उसके पीछे चलता है |

-    आचार्य चाणक्य

Acharya Chanakya Quotes on Work Result

Acharya-Chanakya (40) - Copy

मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसका वैसा ही फल मिलता है | अपने कर्मो के कारण ही वह इस सांसारिक क्रियाओ में भटकता रहता है और मृत्यु हो जाने पर वह स्वंय ही इन सबसे मुक्त हो जाता है |

आचार्य चाणक्य

मेरी प्ररेणा

प्रक्रति है मेरी प्रेरणा

हम सबको देती यह धारणा ||

धारण करो शिष्टाचार,

बंद करो यह अत्याचार ||

 

हम सबको एक बात सिखाती

शीशा झुकाए दे दो फल

मत करो लालच उस पर ||

 

समय पर काम करना सीखो,

वरना तुम रहोगे मुरझाए फूलो जैसे ||

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Chanakya Quotes on Religion

Acharya-Chanakya (42) - Copy

 

धर्म से हीन मनुष्य जीते जी मरे हुए के समान है | किंतु धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति मरा हुआ भी दीर्धजीवी होता है | इसमें कोई संदेह नहीं है |       

- चाणक्य

कैसे मिला सोनू का नया जीवन

एक गाँव में एक लड़का रहता था जिसका नाम सोनू था उसे जरा भी मेहनत करने की आदत नहीं थी | वह सारा दिन मन्दिर के बाहर बेठ कर भीख ही मांगता रहता था और मन्दिर में आने जाने वालो से भीख मांग का अपना जीवन व्यतीत करता था |

सर्दियों के दिन थे सुबह का समय था और ठंडी हवा चल रही थी | उस दिन मंदिर में लोगो का आना जाना बहुत कम था सोनू ने सोचा आज ठंड बहुत लोग भी काम आ रहे है क्यों न कही और जा कर बेठ जाऊ जहा में ठंड से बच सकू | सही सोच कर वह मंदिर के पास एक छज्जे था वहा जा कर बेठ गया |

सोनू को बहुत ज्यादा ठंड लग रही थी और जोर से जोर चिल्लाकर – चिल्लाकर राहगीरों से कहा रहा था, “भगवान के नाम पर कुछ दे दो, दो दिनों से मेने कुछ नहीं खाया | कोई कुछ तो दे दो, मेरे बढ़े माँ-पाप भेखे है |

जो थोड़े बहुत लोग थे वो कुछ न कुछ उसे दे देते | वही दूर खड़े एक महात्मा उसे देख रहे थे | वह सोनू के पास आए और बोले, “क्या नाम है तुम्हारा और तुम भीख क्यों मांग रहे हो?”

सोनू बोला, “मेरा नाम सोनू है और में बहुत ज्यादा गरीब हु | मेरे पास कुछ भी नहीं है | अगर में भीख नहीं मागुगा तो क्या खाउगा |”

महात्मा बोले “सोनू क्या सच में तुम्हारे पास कुछ नहीं है |”

यह सुनकर सोनू, “जी सच में मेरे पास कुछ नहीं है |”

महात्मा बोले, “तुम झूठ क्यों बोल रहे हो” |

सोनू बोला, “महाराज में झूठ क्यों बोलू गा, सच में मेरे पास कुछ भी नहीं है |”

यह सुनते ही महात्मा बोले, “तो ठीक है, में तुम्हे १०० रुपे देता हु और इसके बदले तुम मुझे अपने दोनों हाथ दे दो, बोलो ठीक है |”

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Acharya Chanakya Behaviour Quotes

Acharya Chanakya

 

जिन मनुष्यों में विधा, तपस्या, दान देना, शील, गुण तथा धर्म में से कुछ भी नहीं है, वे मनुष्य पृथ्वी पर बोझ है | वे मनुष्य के रूप में पशु है, जो पृथ्वी पर मनुष्यों के बिच में धूमते रहते है |  

 -    चाणक्य

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