Oct
24

चिड़िया और हाथी

नीम के पेड़ पर चिड़िया का घोंसला था | घोसले में चिड़िया के नन्हे-नन्हे बच्चे थे | चिड़िया बच्चो की देखभाल करती थी | और चिडडा दाना चुगकर लाता था |

बच्चे जब कुछ बड़े हो गए तो चिड़िया भी दाना चुगने जाने लगी | एक दिन एक हाथी पेड़ के पास से गुजर रहा था | चिड़िया के बच्चो ने देखा तो हंस पड़े | बोले, “देखो, मोटा जा रहा है |”

यह बात सुनकर हाथी को गुस्सा आ गया | उसने सूड उठाई और घोंसले को जमीन पर पटक दिया | चिड़िया वापिस आई तो देखा की बच्चे मरे पड़े है | यह देख कर वह बहुत रोई |

चिड़िया का एक दोस्त था | उसने चिड़िया को दिलासा दिया और कहा, “हम हाथी को उसकी करनी का मजा जरुर चखाएगे | वरना हम पक्षियों के घोंसले तो उजड़ जाएगे |

चिड़िया के दोस्त ने चिड़िया और चिडडे को अपने दोस्तों के पास ले गया | उसका एक दोस्त मेंढक पास ही तालाब में रहता था | दूसरा दोस्त झाड़ी में रहता था |

उसने अपने दोस्तों को चिडडे और चिड़िया की दुखभरी कहानी सुनाई अपने दोस्तों को | मेंढक और बार्र चिड़िया की मदद करने के लिए तेयार हो गए | सबने मिलकर एक तरकीब सोची और हाथी की खोज में चल दिए |

पेड़ो के झुरमुट में हाथी आराम से लेटा था बार्रहाथी के कान के पास जाकर मीठी आवाज में गुनगुनाने लगा |मीठा गाना सुनकर हाथी को नींद आ गई | तभी चिड़िया के दोस्त ने अपनी पेनी चोंच से हाथी की दोनों आँखे खोद डाली |

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Oct
12

बारीश के रूप अनेक

आज बादल बहुत काले थे और हवा भी बहुत ठंडी – ठंडी चल रही थी | ऐसे मोसम में राघव, परमीत, रवी और अमन मैदान में खेल रहे थे | रवी के दादा जी सभी के बच्चो को खेलते हुए देख रहे थे | वो उन बच्चो को देख कर बहुत खुश हो रहे थे | बच्चो ने अभी खेलना शुरू ही किया था की अचानक बिजली चमकने लगी | और थोरी ही देर में बारीश शुरू हो गई | दादा जी ने सभी बच्चो को हाथ हिलाते हुए बुला लिया | दादा जी को हाथ हिलाते हुए देख कर अमन के कहा दादा जी बुला रहे है और इतनी ही देर में बारीश के एक बूंद राघव पर गिरी |

दादा जी जोर से बोले, अरे बच्चो जल्दी चलो | कोले पड़ रहे है | अमन, राघव, परमीत और रवी सर पर हाथ रखे रवी के घर की और दोड़ पड़े |

आज दादा जी भी बहुत खुश थे | दादा जी बच्चो से बोले, आज बहुत दिनों बाद ओले पड़े है | अच्छा हुआ तुम सब चले आए, नहीं तो सर पर टपाटप होती | बच्चे दादा जी की बात सुनते ही हंस दिए | देखते ही देखते बरामदे के आगे का खुला स्थान ओलो से भर गया |

इन बच्चो में से एक बच्चे ने दादा जी से पूछा, “ दादा जी ये ओले क्या होते है ?”

दादा जी मुस्कराके बोले, “बच्चो, वायुमंडल में विदयमान जल की बुँदे झटके से उछल कर ऊपर चली जाती है | ऊपर की हवा बहुत ठंडी होती है | ये बुँदे वही जमकर ओले का रूप धारण क्र लेती है | इसी प्रकार हवा के झोंके इन्हें और ऊपर उछाल देते है | इन ओलो के ऊपर बर्फ की और परते जम जाती है | कुछ भारी होने पर ये ओले नीचे की और गिरने लगते है | वाह: हमे तो पता ही नहीं था | सभी बच्चे बहुत खुश हुए |

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Sep
23

बीरबल का राज

एक दिन बीरबल ने जब बादशाह अकबर के दरबार में प्रवेश किया तो उसने देखा की सभी दरबारी हंस रहे है | उसने बादशाह से पूछा, “मगराज| आज सभी दरबारी इतने खुश क्यों है?

“अरे, कोई खास बात नहीं, बीरबल |” अकबर ने जवाब दिया |” हम लोगो की त्वचा के रंगो के विषय में चर्चा कर रहे थे | अधिकतर दरबारी और स्वंय में गोरे में हु | तुम हमसे काले कैसे?” हमेशा की तरह बीरबल का जवाब तेयार था | ओह: शायद आप मेरी त्वचा के रंग के रजके विषय में नहीं जानते?”

“राज ! कैसा राज |” अकबर ने पूछा |

“बहुत समय पहले भगवान ने इस संसार को पेड़-पोधो, पशु-पक्षियों आदि से भरपूर बनाया था | पर बे इस रचना से संतुष्ट नहीं थे | इसलिए उन्होंने मनुष्य की रचना की | अपनी इस नई रचना की देखकर वे अत्यंत प्रसन्न हुए | इसलिए उन्होंने तोहफे के तोर पर रूप, दिमाग तथा धन देने का निर्णय किया | उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक व्यक्ति को पांच मिनट का समय दिया जायगा ताकि सभी अपनी इच्छाअनुसार कोई भी तोहफा चुन सके | मेने सारा समय बुद्धि इकट्ठा करने में लगा दिया जिससे दूसरी वस्तु चुनने का समय ही नहीं बचा | आप सभी रूप और धन इकट्ठा करने में लगे रहे और बाकि तो सब जानते ही है | “ बीरबल ने जवाब दिया | Read More »

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Sep
11

मतलबी भेड़िया

एक दिन भेड़िया मजे से मछली खा रहा था की अचानक मछली का कांटा उसके गले में अटक गया | भेड़िया दर्द के मारे चीका-चिलाया | वह इधर-उधर भागता फिरा | पर उसे चेन न मिला | उससे न खाते बनता था न पीते बनता था |

तभी उसे नदी किनारे खड़ा एक सारस दिखाई दिया | भेड़िया सारस के पास गया | भेड़िया की आँखे में आसू थे | वह गिडगिडा कर बोला, “सारस भाई, मेरे गले में कांटा अटक गया है | मेरे गले से कांटा निकल दो | में तुम्हारा अहसान कभी न भुलुगा | मुझे इस दर्द से छुटकारा दिला दो |

सारस को भेडिये पर दया आ गई | उसने अपनी लंबी चोंच भेडिये के गले में डाली और कांटा निकाल दिया | भेडिये को बड़ा चेन मिला | सारस बोला, भेडिये भाई मेने आप की मदद की है अब आप मुझे कुछ इनाम दो |

इनाम की बात सुनते ही भेडिये को गुस्सा आ गया | सारस की अपने बड़े-बड़े दांत दिखाते हुए बोला, “तुझे इनाम चाहिए? एक तो मेरे मुंह में अपनी गंदी चोंच डाली | मेने सही – सलामत निकल लेने दी | और अब इनाम मांगता है | जिंदा रहना चाहता है तो भाग जा यंहा से इनाम मांगता है |” Read More »

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Aug
31

चिंता

चिंता एक प्रकार की कायरता है और वह जीवन को विषमय बना देती है |

-    चेनिंग

चिंता एक ऐसी हथोडी है, जो मस्तिक के सूक्ष्म एवं सुकोमल सूत्रों तथा तंतुजाल को विधटित करके उसके कार्यकारिणी शक्ति को नष्ट कर देती है |

-    स्वेट मार्डन

चिंता एक काली दीवार की भांति चारो और से घेर लेती है, जिसमे से निकलने की फिर फोई गली नहीं सूझती |

प्रेमचन्द

चिंता शहद की मख्खी के समान है इसे जितना हटाओ उतना ही और चिमटती है |

सुदर्शन

प्राणियों के लिए चिंता ही ज्वर है |

स्वामी शंकराचार्य

चिंता ही से चिंता दूर होती है | इस घोखे से रोकने का प्रयास करने से परिणाम उनता होता है |

रविन्द्रनाथ ठाकुर Read More »

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Aug
22

अनोखा वरदान

विजय सिंह मान का राजा था | वह अपनी प्रजा से बहुत प्यार करता था और उनका बहुत ध्यान रखता था | एक दिन की बात है वह तूफानी रात में अपने घोड़े पर स्वर होकर एक तंग से रास्ते से जा रहा था | वह भेस बदले हुए था | मामूली कपड़े पहन कर, जनता के बीच उनके हाल चाल का पता लगाना उनकी आदत बन चुकी थी |

वह बीना किसी की चिंता किये अपना काम कर रहे थे परंतु उनके पीछे पीछे डाकू भी चल रहे थे जो उनका शानदार घोडा लेना चाहते थे |
मोका देख कर डाकुओ ने राजा को घेर लिया | राजा एक बार तो सकते में आ गया, मगर वह घबराया नहीं | वह बच निकलने की तरकीब सोच रहा था की उसके घोड़े का खुर सडक के गड्डे में फंस गया | डाकू अभी राजा पर लपकने ही वाले थे की एक और से कुछ नोजवान वहा आ पहुचे | उन्होंने देखा की एक आदमी मुसीबत में है | उन्होंने डाकुओ पर हमला कर दिया | डाकुओ यह देख कर डर गए और वहा से भाग गए |

थोड़ी देर में राजा के अंगरक्षकों का दल भी आ पहुचा | उन्होंने सभी डाकुओ की बंदी बना लिया | राजा उन नवयुवको से बड़ा प्रसन्न था क्योकि उन्होंने बिला यह जाने की वह राजा है, डाकुओ से उसकी रक्षा की | राजा ने बहुत – बहुत धन्यवाद दिया और कहा के वे उसके साथ महल तक चले |

भोर होने पर रात की घटना का समाचार सब जगह फेल गया | सारी प्रजा खुश थे की डाकू राजा का बाल भी बाका न कर सके | राज्य परिवार के लोगो, मंत्रियों, दरबारियों और सारी जनता ने नवयुवको के साहस की प्रशंशा की |

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Aug
17

चालाकी का फल

बहुत पुरानी बात है| किसी गाँव में एक व्यापारी रहता था | उसका नाम मोहन था | मोहन गाँव नहर के किनारे बसा हुआ था | वह नमक का व्यापार करता था | उसके पास एक गधा था | वह रोज एक बोरी नमक गधे पर लादकर शहर ले जाता था | रोजाना एक ही रास्ते से आने-जाने के कारण व्यापारी का गधा शहर का रास्ता पहचान गया था |

मोहन भी समझ गया था की गधा शहर का रास्ता पहचाना गया है, इसलिए अब वह गधे पर नमक लादकर उसे अकेला ही शहर भेज देता था | उस शहर का व्यापारी गधे के ऊपर लदी नमक की बोरी उतार लेता था | इसके बाद गधा वापस लोट आता था | गाँव और शहर का रास्ते में नहर पडती थी, लेकिन नहर पर कोई पुल नहीं बना था, इसलिए नहर को उसमे से चलकर ही पार करना पड़ता था | बरसात के कारण एक दिन नहर में पानी बहुत बढ़ गया | जिससे गधे पर लदी हुई नमक की बोरी भीग गई |

पानी में भीग जाने से थोडा नमक पानी में घुल गया | जिससे बोरी कुछ हलकी हो गई | इससे गधे ने यह समझा की पानी में भीगने से बोझ कम हो जाता है | अब तो गधा रोज नहर के बीच में पहुचकर पानी में थोड़ी देर बेठ जाता | इससे बोरी गीली हो जाती और गीली होने से कुछ नमक पानी में बह जाता | इधर शहर के व्यापारी ने देखा की कुछ दिनों से नमक को बोरी पानी में भीगी हुई होती है | एक दिन उसने बोरी को तोलकर देखा | यह क्या? बोरी का भार तो सचमुच बहुत कम है | व्यापारी की समझ में कुछ नहीं आया की बोरी में नमक क्यों कम होने लगा है उसने मोहन को एक कागज पर यह सब लिखकर भेजा | Read More »

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तन होता है मगर प्राण देता है

सत्य है की गुरु ज्ञान देता है

ज्ञान के साथ अमूल्य दान भी देता है

गुरु ही शिष्य को नई पहचान देता है |

लोग कहते है गुरु ज्ञान देते है

 

गुरु के कारण ही लोग शिष्य को सम्मान देते है

जीवन सफल करने का नया मार्ग देते है

व्यक्ति को बनाने के लिए संस्कार देते है

जीवन होता है मगर जिने का अंदाज देते है |

लोग कहते है गुरु ज्ञान देते है

 

पंख होते है मगर उड़ने को आसमान देते है

शरीर होता है मगर प्राण देते है

इन्सान को इन्सान से प्रेम करना सिखाता है

लोग कहते है गुरु ज्ञान देते है |

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Jul
31

Mistake Quotes

गलती तो हर मनुष्य कर सकता है, किन्तु उस पर द्रढ केवल मुर्ख ही होते है |

                                                                           सिसरो

जो गलतिय नहीं करता, वह प्र:या कुछ नहीं कर पाता |

                                                                           ए.जे.फेलप्स

बहुत सी तथा गलतियां किये बिना कोई आदमी बड़ा और महान नहीं बनता |

                                                                            ग्लेडस्टं

स्वंय की गलतिया जब हम दुसरो में देखते है, तो हमे बड़ी जलन होती है |

                                                                           जर्मन कहावत

अपनी गलती स्वीकर क्र लेने में लज्जा की कोई बात नहीं है | इससे, दुसरे शब्दों में, यही प्रमाणित होता है की बीते हुए कल की अपेझा आज आप अधिक बुद्धिमान है |

                                                                           अलेक्जेंडर पोप

विवेकशील पुरुष दुसरो की गलतियों में अपनी गलती सुधारते है |

                                                                          प्युबिलय्स साईंरस Read More »

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अरब देश में एक सुलतान रहता था उसे कहानिया सुनने का बड़ा शोक थे | वह चाहता था की दिन रात बस कहानिया ही सुनते रहे |

एक दिन उसने अपने वजीर की बुलाकर कहा, “में एक ऐसी कहानी सुनना चाहता हु जो कभी ख़त्म न हो | क्या तुम मुझे ऐसी कहानी सुना सकते हो क्या?”

यह बात सुनकर वजीर थोडा सा घबरा गया | ऐसी कहानी वह भला कहा से लाकर सुनाए जो खत्म ही न हो | उसे कुछ सुझाई न दिया | उसने सुलतान से कहा, “महाराज, मुझे एक दिन की मिह्ल्ट दीजिए |

सुलतान ने कहा, “ठीक है”

वजीर अपने घर पहुचा और अकेला बेठ कर सोचने लगा | उसे न तो भूख लग रही थी और न ही प्यास | उसने सोना चाह तो नीद भी न आई | उसे बस रक ही चिंता सता रही थी | की कल सुलतान की क्या जवाब देगा |

वजीर के बेगम से उसकी यस परेशानी देखी न गई | उसने पूछा, “क्या बात है आप इतने परेशान क्यों है?”

वजीर ने अपनी परेशानी का कारण बताया तो वह हंस पड़ी और बोली, “बस इतनी सी बात है | आप बिना वजह परेशान हो रहे है | में सुलतान की कभी ख़त्म न होने वाली कहानी सुनाउगी | आप इत्मीनान से सो जाइए और चिंता छोड़ दीजिए |”

अगले दिन वजीर ने सुलतान को बताया, “मालिक मेरी बेगम को एक ऐसी कहानी आती है जी कभी खत्म न हो | आप इजाजत गे तो कल उन्हें अपने साथ ने आऊ |”’

“सुलतान ने कहा, “ठीक है कल तुम अपनी बेगम को अपने साथ ले आना” |

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