Aug
31

चिंता

चिंता एक प्रकार की कायरता है और वह जीवन को विषमय बना देती है |

-    चेनिंग

चिंता एक ऐसी हथोडी है, जो मस्तिक के सूक्ष्म एवं सुकोमल सूत्रों तथा तंतुजाल को विधटित करके उसके कार्यकारिणी शक्ति को नष्ट कर देती है |

-    स्वेट मार्डन

चिंता एक काली दीवार की भांति चारो और से घेर लेती है, जिसमे से निकलने की फिर फोई गली नहीं सूझती |

प्रेमचन्द

चिंता शहद की मख्खी के समान है इसे जितना हटाओ उतना ही और चिमटती है |

सुदर्शन

प्राणियों के लिए चिंता ही ज्वर है |

स्वामी शंकराचार्य

चिंता ही से चिंता दूर होती है | इस घोखे से रोकने का प्रयास करने से परिणाम उनता होता है |

रविन्द्रनाथ ठाकुर Read More »

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Aug
22

अनोखा वरदान

विजय सिंह मान का राजा था | वह अपनी प्रजा से बहुत प्यार करता था और उनका बहुत ध्यान रखता था | एक दिन की बात है वह तूफानी रात में अपने घोड़े पर स्वर होकर एक तंग से रास्ते से जा रहा था | वह भेस बदले हुए था | मामूली कपड़े पहन कर, जनता के बीच उनके हाल चाल का पता लगाना उनकी आदत बन चुकी थी |

वह बीना किसी की चिंता किये अपना काम कर रहे थे परंतु उनके पीछे पीछे डाकू भी चल रहे थे जो उनका शानदार घोडा लेना चाहते थे |
मोका देख कर डाकुओ ने राजा को घेर लिया | राजा एक बार तो सकते में आ गया, मगर वह घबराया नहीं | वह बच निकलने की तरकीब सोच रहा था की उसके घोड़े का खुर सडक के गड्डे में फंस गया | डाकू अभी राजा पर लपकने ही वाले थे की एक और से कुछ नोजवान वहा आ पहुचे | उन्होंने देखा की एक आदमी मुसीबत में है | उन्होंने डाकुओ पर हमला कर दिया | डाकुओ यह देख कर डर गए और वहा से भाग गए |

थोड़ी देर में राजा के अंगरक्षकों का दल भी आ पहुचा | उन्होंने सभी डाकुओ की बंदी बना लिया | राजा उन नवयुवको से बड़ा प्रसन्न था क्योकि उन्होंने बिला यह जाने की वह राजा है, डाकुओ से उसकी रक्षा की | राजा ने बहुत – बहुत धन्यवाद दिया और कहा के वे उसके साथ महल तक चले |

भोर होने पर रात की घटना का समाचार सब जगह फेल गया | सारी प्रजा खुश थे की डाकू राजा का बाल भी बाका न कर सके | राज्य परिवार के लोगो, मंत्रियों, दरबारियों और सारी जनता ने नवयुवको के साहस की प्रशंशा की |

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Aug
17

चालाकी का फल

बहुत पुरानी बात है| किसी गाँव में एक व्यापारी रहता था | उसका नाम मोहन था | मोहन गाँव नहर के किनारे बसा हुआ था | वह नमक का व्यापार करता था | उसके पास एक गधा था | वह रोज एक बोरी नमक गधे पर लादकर शहर ले जाता था | रोजाना एक ही रास्ते से आने-जाने के कारण व्यापारी का गधा शहर का रास्ता पहचान गया था |

मोहन भी समझ गया था की गधा शहर का रास्ता पहचाना गया है, इसलिए अब वह गधे पर नमक लादकर उसे अकेला ही शहर भेज देता था | उस शहर का व्यापारी गधे के ऊपर लदी नमक की बोरी उतार लेता था | इसके बाद गधा वापस लोट आता था | गाँव और शहर का रास्ते में नहर पडती थी, लेकिन नहर पर कोई पुल नहीं बना था, इसलिए नहर को उसमे से चलकर ही पार करना पड़ता था | बरसात के कारण एक दिन नहर में पानी बहुत बढ़ गया | जिससे गधे पर लदी हुई नमक की बोरी भीग गई |

पानी में भीग जाने से थोडा नमक पानी में घुल गया | जिससे बोरी कुछ हलकी हो गई | इससे गधे ने यह समझा की पानी में भीगने से बोझ कम हो जाता है | अब तो गधा रोज नहर के बीच में पहुचकर पानी में थोड़ी देर बेठ जाता | इससे बोरी गीली हो जाती और गीली होने से कुछ नमक पानी में बह जाता | इधर शहर के व्यापारी ने देखा की कुछ दिनों से नमक को बोरी पानी में भीगी हुई होती है | एक दिन उसने बोरी को तोलकर देखा | यह क्या? बोरी का भार तो सचमुच बहुत कम है | व्यापारी की समझ में कुछ नहीं आया की बोरी में नमक क्यों कम होने लगा है उसने मोहन को एक कागज पर यह सब लिखकर भेजा | Read More »

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तन होता है मगर प्राण देता है

सत्य है की गुरु ज्ञान देता है

ज्ञान के साथ अमूल्य दान भी देता है

गुरु ही शिष्य को नई पहचान देता है |

लोग कहते है गुरु ज्ञान देते है

 

गुरु के कारण ही लोग शिष्य को सम्मान देते है

जीवन सफल करने का नया मार्ग देते है

व्यक्ति को बनाने के लिए संस्कार देते है

जीवन होता है मगर जिने का अंदाज देते है |

लोग कहते है गुरु ज्ञान देते है

 

पंख होते है मगर उड़ने को आसमान देते है

शरीर होता है मगर प्राण देते है

इन्सान को इन्सान से प्रेम करना सिखाता है

लोग कहते है गुरु ज्ञान देते है |

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Jul
31

Mistake Quotes

गलती तो हर मनुष्य कर सकता है, किन्तु उस पर द्रढ केवल मुर्ख ही होते है |

                                                                           सिसरो

जो गलतिय नहीं करता, वह प्र:या कुछ नहीं कर पाता |

                                                                           ए.जे.फेलप्स

बहुत सी तथा गलतियां किये बिना कोई आदमी बड़ा और महान नहीं बनता |

                                                                            ग्लेडस्टं

स्वंय की गलतिया जब हम दुसरो में देखते है, तो हमे बड़ी जलन होती है |

                                                                           जर्मन कहावत

अपनी गलती स्वीकर क्र लेने में लज्जा की कोई बात नहीं है | इससे, दुसरे शब्दों में, यही प्रमाणित होता है की बीते हुए कल की अपेझा आज आप अधिक बुद्धिमान है |

                                                                           अलेक्जेंडर पोप

विवेकशील पुरुष दुसरो की गलतियों में अपनी गलती सुधारते है |

                                                                          प्युबिलय्स साईंरस Read More »

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अरब देश में एक सुलतान रहता था उसे कहानिया सुनने का बड़ा शोक थे | वह चाहता था की दिन रात बस कहानिया ही सुनते रहे |

एक दिन उसने अपने वजीर की बुलाकर कहा, “में एक ऐसी कहानी सुनना चाहता हु जो कभी ख़त्म न हो | क्या तुम मुझे ऐसी कहानी सुना सकते हो क्या?”

यह बात सुनकर वजीर थोडा सा घबरा गया | ऐसी कहानी वह भला कहा से लाकर सुनाए जो खत्म ही न हो | उसे कुछ सुझाई न दिया | उसने सुलतान से कहा, “महाराज, मुझे एक दिन की मिह्ल्ट दीजिए |

सुलतान ने कहा, “ठीक है”

वजीर अपने घर पहुचा और अकेला बेठ कर सोचने लगा | उसे न तो भूख लग रही थी और न ही प्यास | उसने सोना चाह तो नीद भी न आई | उसे बस रक ही चिंता सता रही थी | की कल सुलतान की क्या जवाब देगा |

वजीर के बेगम से उसकी यस परेशानी देखी न गई | उसने पूछा, “क्या बात है आप इतने परेशान क्यों है?”

वजीर ने अपनी परेशानी का कारण बताया तो वह हंस पड़ी और बोली, “बस इतनी सी बात है | आप बिना वजह परेशान हो रहे है | में सुलतान की कभी ख़त्म न होने वाली कहानी सुनाउगी | आप इत्मीनान से सो जाइए और चिंता छोड़ दीजिए |”

अगले दिन वजीर ने सुलतान को बताया, “मालिक मेरी बेगम को एक ऐसी कहानी आती है जी कभी खत्म न हो | आप इजाजत गे तो कल उन्हें अपने साथ ने आऊ |”’

“सुलतान ने कहा, “ठीक है कल तुम अपनी बेगम को अपने साथ ले आना” |

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Jul
14

The Wolf and the Crane

One day a greedy wolf was having his dinner. He ate so hurriedly that a bone got stuck in his throat. He tried hard to throw out the bone, but he did not succeed.

He thought, “What will happen if I can’t get that bone out of my throat? I will not be able to eat and I will die of hunger.”

Then the wolf went to a crane who lived on the river bank. He said to the crane. “I have a bone stuck in my throat. You have a long neck that can reach down to the bone. Please pull out the bone. I will pay you well for your service.”

The crane agreed to help the wolf. The wolf opened his mouth wide. The crane reached down and pulled out the bone.

“Now pay me my fees,” said the crane. Read More »

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यह कहानी नन्ही ममता की है | वह पहली बार अपनी मोसी के घर आई थी जो में रहती थी | सबेरा हुआ, चिड़िया ची-ची करने लगी | ममता सो कर उठी और घर के बाहर आई | उसने अपने घर के सामने कपास का खेत था | वह एक पोधे के पास जाकर उसने पूछा – “तुम्हारा नाम क्या है?”

ममता को लगा की पोधा बोल रहा है – “मेरा नाम कपास है और तुम ने जो कपड़े पहन रखे है वो भी कपास के ही है | में खेत में ही पैदा हुई और बढ़ी हुई हु | मेरे ऊपर ये डोडिया लगी है | ये जब पकेगी, तो फुट जाएगी | इनमे कपास भरी हुई है | कपास के अंदर बीज होते है | किसान बीजो को अलग क्र लेता है इस बीजो से ही नये पोधे पैदा होते है | मेरे बीजो को बिनोले कहा जाता है | बिनोले अलग करने के बाद कपास को रुई कहते है |

ममता ने पूछा – “इसके बाद क्या करते है?”

पोधे ने उतर दिया – “रुई की पुनिया बना कर चरखे पर काती जाती है | उनसे सूत के धागे बन जाते है | इस धागों से ताना तना जाता है | अगर रंगदार ल्प्ड्स बनाना हो, तो इस धागों को पहले रंग लिया जाता है | फिर ताना तना जाता है |

फिर ताने को खड्डी पर चढ़ा कर कपड़ा बन लिया जाता है | दरी, खेस, चादर आदि इसी तरह बुनी जाती है इसी तरह खद्दर भी बुना जाता है |

कपड़ा बुनने के बड़े-बड़े कारखाने में काटने, बुनने का काम मशीनों से होता है | वे मशीने बिजली से चलती है | Read More »

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Jul
2

The Bats

A long time ago, there was a fighting between the birds and the beasts. The bats did not join either side. They thought, “We can join the birds because we can fly like them. We can join the beasts both because we have no wings and we don’t lay eggs as the birds do. So our is a special position. We shall join the winners at the right time. Right now we shall just wait and watch.

The fighting went on. At one stage it seemed the beasts would win. The bats then thought, “Now is our chance,” and joined the beasts. But some time later, the birds got the better of the beasts. The bats felt sorry for joining the beasts. Now they joined the birds.

As last the fighting came to an end. The birds and the beasts made peace and became friends. But the selfish were left alone. Both the birds and the beasts boycotted the bats. Read More »

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Jun
25

The Eagle and the Crow

An eagle had his nest high up on a mountain wall. At the roof of the mountain, there was a tree in which lived a crow.

One day the eagle swooped down from his nest and picked up a lamb from the earth. Then he flew high up and returned to his nest.

The crow saw that the eagle had performed the wonderful feat in one go. He thought, “if the eagle can perform this feat, why can’t I?”

So one day the crow flew as high as he could. Then he swooped down with great force. But instead of landing upon a lamb , he dashed against the ground. His head and beak cracked. That was the end of him. Read More »

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