Dec
20

अतिथि सत्कार का फल

बहुत पुरानी बात है एक गाँव में एक शिकारी रहता था वह बड़ा क्ररू, असत्यवादी और पाप में सलंग्न रहने वाला प्राणी था | एक बार वह जंगले में शिकार करने गया | वहा उसने बहुत सारे जानवर और पक्षियों को पकड़कर पिंजरे में बंद कर लिया | अनेक म्रगो का वध किया | इस प्रकार सारा दिन बीत गया | श्याम होते ही वह अपने घर जा रहा था की अचानक आकाश में काले काले बादल आ गए और थोड़ी ही देर में मुसलाधार वर्षा सुरु हो गई | तब वह शिकारी एक विशाल व्रक्ष के निचे बेठ गया |

उस व्रक्ष पर कबूतर और कबूतरी का एक जोड़ा रहता था प्रर्तिदीन की भांति उस दिन भी वे दोनों दाना चुगने वन में गए हुए थे, किन्तु अब तक सिर्फ कबूतर ही अपने घोसले में लोटा था| कबूतरी को वहा ना देख कर वह विलाप करने लगा | रोने की अवाज सुन कर, कबूतरी ने जोर से अवाज दी, “में यहाँ पिंजरे में केद हु |”

अवाज सुनकर कबूतर जल्दी से पिंजरे के पास गया और उसको बाहर निकालने का प्रत्यन करने लगा | तब कबूतरी बोली, “स्वामी, इससे तोडना असंभव है, आप चले जाओ यहाँ से | यह सब विधि के विधान के अनुसार है | इसमें किसी का दोष नहीं है | और एक बात, इस समय यह शिकारी हमारे घर पर आया है और अतिथि भगवान का रूप होता है | इस समय यह मुसीबत में है और आप को किसी तरह इसकी मदद करनी है |

यह बात सुन कर कबूतर जल्दी से उड़ कर कही से जलती हुई लकड़ी अपनी चोंच्मे दबाकर ले आया और शिकारी के सामने रखकर उसमे सूखे पत्ते, लकड़ी, और तिनके डालने लगा| देखते – ही – देखते उसमेऔर आग लग गई| यह सब देख कर शिकारी हेरान रह गया | Read More »

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एक बार बादशाह अकबर ने अपने दरबारियों से प्रशन किया, “बताओ सबसे अच्छा मोसम किस ऋतू में होता है|”

दरबारी सदेव बादशाह को प्रसन्न करके ईनाम पाने के लिए तेयार रहते थे | उनमे से एक दरबारी उठा और बोला, “ महाराज सबसे अच्छा मोसम बसंत ऋतू में होता है? इस समय मंद-मंद हवा बहती है, रंग-बिरंगे फूल खिलते है, तापमान भी कम होता है तथा ठंडा मोसम सबको प्रसन्नता देता है|”

तभी एक और दरबारी उठा और बोला, “नहीं महाराज सबसे अच्छा मोसम सर्दी का होता है | इस समय हमे कई प्रकार की सब्जिया मिलती है तथा कई प्रकार की मदिरा भी मिलती है | इस मोसम में मुंगफलिया तथा गर्म कम्बल हमे गरमाहट भी देते है|”

तभी एक अन्य देबारी ने बिच में टोकते हुए कहा, “महाराज, गर्मिया का मोसम ही सबसे अच्छा मोसम होता है | यह गर्म तो होता है परन्तु ठण्डी मदिरा और नोक विहार मन को प्रसन्नता देते है |” Read More »

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Nov
8

बरतनों की मोत

रामू बड़े मजाकिया इन्सान थे | वो हर हलात में खुश रहते थे और अपने मजाकिए स्वभाव, हाजिरजवाबी और होशारियो से सबको हंसाते रहते थे |

एक बार की बात है | रामू के एक पड़ोसी के घर घर दावत थी | पड़ोसी खाना बनाने के कुछ बरतन रामू के घर से मांग कर ले गया | दुसरे दिन वह बरतन वापिस करने आया |

उन बरतनों में से एक बरतन ऐसा था जो रामू का नहीं था | रामू ने देखा तो पड़ोसी से कहा, “करे भाई, यह तो मेरा बरतन नहीं है |”

पड़ोसी ने कहा, “ रामू भाई, बात दरसल यह है की जब आपके बरतन मेरे यहाँ रहे तो उन्ही में से किसी ने यह बच्चा दिया है | अप आपने बरतनों का बच्चा है | इसलिए आपको लोटा दिया है |”

रामू ने कोई जवाब नहीं दिया | चुपचाप सारे बरतन ले कर रख लिए | कुछ दिनों बाद रामू के यहाँ दावत का मोका आया | उन्होंने अपने पड़ोसी से कुछ बरतन उधर लिए | लेकिन कई दिन बीत गए, रामू ने पड़ोसी के बरतन वापिस नहीं किए |

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जैसा की में आप सभी के साथ रमेश की ज़िन्दगी के कुछ पल बाँट चूका हु | आज कुछ और रमेश की ज़िन्दगी के पल आप लोगो के साथ बाँट रहा हु |

जैसा की मेने कहा था की वो ज़िन्दगी जीने से डर रहा है लड़ रहा है अपने हलातो से, लड़ रहा है अपने मन में चल रहे तुफानो से | भाइयो, बहनों ऐसा लग रहा है मनो ज़िन्दगी भी रूठ गई है रमेश से | दुःख खत्म लेने का नाम ही नहीं ले रही है | एक खत्म होता है तो दूसरा शुरू हो जाता है |

पिछले साल उसके पिता का देहांत हुआ था | ऐसा नहीं है की मीठे पल नहीं है रमेश की ज़िनदगी में, है पर बहुत बहुत थोड़े से और भी आते है दुखो के साथ | इसी साल उसके यहाँ एक नन्ही परी ने भी जन्म लिया पर नोकरी न होने के कारण बभौ कर्जा लेना पड़ा जो की अभी तक चूका रहा है | और अब तो उसकी नोकरी भी खतरे में है | पता नहीं है अपनी जीविका कैसे चलाए गया इतनी महगाई में |

अभी रमेश अपने पिता के जाने के सदमे से बहार निकला भी नहीं था की उसकी माँ को brain tumor हो गया | दोस्तों में कैसे कहू उसकी कहानी क्योकि मुझे भी रोना आ रहा है | मेरा मन भी द्दुख रहा है | पर मुझे तो बताना ही है |

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Oct
24

चिड़िया और हाथी

नीम के पेड़ पर चिड़िया का घोंसला था | घोसले में चिड़िया के नन्हे-नन्हे बच्चे थे | चिड़िया बच्चो की देखभाल करती थी | और चिडडा दाना चुगकर लाता था |

बच्चे जब कुछ बड़े हो गए तो चिड़िया भी दाना चुगने जाने लगी | एक दिन एक हाथी पेड़ के पास से गुजर रहा था | चिड़िया के बच्चो ने देखा तो हंस पड़े | बोले, “देखो, मोटा जा रहा है |”

यह बात सुनकर हाथी को गुस्सा आ गया | उसने सूड उठाई और घोंसले को जमीन पर पटक दिया | चिड़िया वापिस आई तो देखा की बच्चे मरे पड़े है | यह देख कर वह बहुत रोई |

चिड़िया का एक दोस्त था | उसने चिड़िया को दिलासा दिया और कहा, “हम हाथी को उसकी करनी का मजा जरुर चखाएगे | वरना हम पक्षियों के घोंसले तो उजड़ जाएगे |

चिड़िया के दोस्त ने चिड़िया और चिडडे को अपने दोस्तों के पास ले गया | उसका एक दोस्त मेंढक पास ही तालाब में रहता था | दूसरा दोस्त झाड़ी में रहता था |

उसने अपने दोस्तों को चिडडे और चिड़िया की दुखभरी कहानी सुनाई अपने दोस्तों को | मेंढक और बार्र चिड़िया की मदद करने के लिए तेयार हो गए | सबने मिलकर एक तरकीब सोची और हाथी की खोज में चल दिए |

पेड़ो के झुरमुट में हाथी आराम से लेटा था बार्रहाथी के कान के पास जाकर मीठी आवाज में गुनगुनाने लगा |मीठा गाना सुनकर हाथी को नींद आ गई | तभी चिड़िया के दोस्त ने अपनी पेनी चोंच से हाथी की दोनों आँखे खोद डाली |

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Oct
12

बारीश के रूप अनेक

आज बादल बहुत काले थे और हवा भी बहुत ठंडी – ठंडी चल रही थी | ऐसे मोसम में राघव, परमीत, रवी और अमन मैदान में खेल रहे थे | रवी के दादा जी सभी के बच्चो को खेलते हुए देख रहे थे | वो उन बच्चो को देख कर बहुत खुश हो रहे थे | बच्चो ने अभी खेलना शुरू ही किया था की अचानक बिजली चमकने लगी | और थोरी ही देर में बारीश शुरू हो गई | दादा जी ने सभी बच्चो को हाथ हिलाते हुए बुला लिया | दादा जी को हाथ हिलाते हुए देख कर अमन के कहा दादा जी बुला रहे है और इतनी ही देर में बारीश के एक बूंद राघव पर गिरी |

दादा जी जोर से बोले, अरे बच्चो जल्दी चलो | कोले पड़ रहे है | अमन, राघव, परमीत और रवी सर पर हाथ रखे रवी के घर की और दोड़ पड़े |

आज दादा जी भी बहुत खुश थे | दादा जी बच्चो से बोले, आज बहुत दिनों बाद ओले पड़े है | अच्छा हुआ तुम सब चले आए, नहीं तो सर पर टपाटप होती | बच्चे दादा जी की बात सुनते ही हंस दिए | देखते ही देखते बरामदे के आगे का खुला स्थान ओलो से भर गया |

इन बच्चो में से एक बच्चे ने दादा जी से पूछा, “ दादा जी ये ओले क्या होते है ?”

दादा जी मुस्कराके बोले, “बच्चो, वायुमंडल में विदयमान जल की बुँदे झटके से उछल कर ऊपर चली जाती है | ऊपर की हवा बहुत ठंडी होती है | ये बुँदे वही जमकर ओले का रूप धारण क्र लेती है | इसी प्रकार हवा के झोंके इन्हें और ऊपर उछाल देते है | इन ओलो के ऊपर बर्फ की और परते जम जाती है | कुछ भारी होने पर ये ओले नीचे की और गिरने लगते है | वाह: हमे तो पता ही नहीं था | सभी बच्चे बहुत खुश हुए |

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Sep
23

बीरबल का राज

एक दिन बीरबल ने जब बादशाह अकबर के दरबार में प्रवेश किया तो उसने देखा की सभी दरबारी हंस रहे है | उसने बादशाह से पूछा, “मगराज| आज सभी दरबारी इतने खुश क्यों है?

“अरे, कोई खास बात नहीं, बीरबल |” अकबर ने जवाब दिया |” हम लोगो की त्वचा के रंगो के विषय में चर्चा कर रहे थे | अधिकतर दरबारी और स्वंय में गोरे में हु | तुम हमसे काले कैसे?” हमेशा की तरह बीरबल का जवाब तेयार था | ओह: शायद आप मेरी त्वचा के रंग के रजके विषय में नहीं जानते?”

“राज ! कैसा राज |” अकबर ने पूछा |

“बहुत समय पहले भगवान ने इस संसार को पेड़-पोधो, पशु-पक्षियों आदि से भरपूर बनाया था | पर बे इस रचना से संतुष्ट नहीं थे | इसलिए उन्होंने मनुष्य की रचना की | अपनी इस नई रचना की देखकर वे अत्यंत प्रसन्न हुए | इसलिए उन्होंने तोहफे के तोर पर रूप, दिमाग तथा धन देने का निर्णय किया | उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक व्यक्ति को पांच मिनट का समय दिया जायगा ताकि सभी अपनी इच्छाअनुसार कोई भी तोहफा चुन सके | मेने सारा समय बुद्धि इकट्ठा करने में लगा दिया जिससे दूसरी वस्तु चुनने का समय ही नहीं बचा | आप सभी रूप और धन इकट्ठा करने में लगे रहे और बाकि तो सब जानते ही है | “ बीरबल ने जवाब दिया | Read More »

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Sep
11

मतलबी भेड़िया

एक दिन भेड़िया मजे से मछली खा रहा था की अचानक मछली का कांटा उसके गले में अटक गया | भेड़िया दर्द के मारे चीका-चिलाया | वह इधर-उधर भागता फिरा | पर उसे चेन न मिला | उससे न खाते बनता था न पीते बनता था |

तभी उसे नदी किनारे खड़ा एक सारस दिखाई दिया | भेड़िया सारस के पास गया | भेड़िया की आँखे में आसू थे | वह गिडगिडा कर बोला, “सारस भाई, मेरे गले में कांटा अटक गया है | मेरे गले से कांटा निकल दो | में तुम्हारा अहसान कभी न भुलुगा | मुझे इस दर्द से छुटकारा दिला दो |

सारस को भेडिये पर दया आ गई | उसने अपनी लंबी चोंच भेडिये के गले में डाली और कांटा निकाल दिया | भेडिये को बड़ा चेन मिला | सारस बोला, भेडिये भाई मेने आप की मदद की है अब आप मुझे कुछ इनाम दो |

इनाम की बात सुनते ही भेडिये को गुस्सा आ गया | सारस की अपने बड़े-बड़े दांत दिखाते हुए बोला, “तुझे इनाम चाहिए? एक तो मेरे मुंह में अपनी गंदी चोंच डाली | मेने सही – सलामत निकल लेने दी | और अब इनाम मांगता है | जिंदा रहना चाहता है तो भाग जा यंहा से इनाम मांगता है |” Read More »

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Aug
31

चिंता

चिंता एक प्रकार की कायरता है और वह जीवन को विषमय बना देती है |

-    चेनिंग

चिंता एक ऐसी हथोडी है, जो मस्तिक के सूक्ष्म एवं सुकोमल सूत्रों तथा तंतुजाल को विधटित करके उसके कार्यकारिणी शक्ति को नष्ट कर देती है |

-    स्वेट मार्डन

चिंता एक काली दीवार की भांति चारो और से घेर लेती है, जिसमे से निकलने की फिर फोई गली नहीं सूझती |

प्रेमचन्द

चिंता शहद की मख्खी के समान है इसे जितना हटाओ उतना ही और चिमटती है |

सुदर्शन

प्राणियों के लिए चिंता ही ज्वर है |

स्वामी शंकराचार्य

चिंता ही से चिंता दूर होती है | इस घोखे से रोकने का प्रयास करने से परिणाम उनता होता है |

रविन्द्रनाथ ठाकुर Read More »

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Aug
22

अनोखा वरदान

विजय सिंह मान का राजा था | वह अपनी प्रजा से बहुत प्यार करता था और उनका बहुत ध्यान रखता था | एक दिन की बात है वह तूफानी रात में अपने घोड़े पर स्वर होकर एक तंग से रास्ते से जा रहा था | वह भेस बदले हुए था | मामूली कपड़े पहन कर, जनता के बीच उनके हाल चाल का पता लगाना उनकी आदत बन चुकी थी |

वह बीना किसी की चिंता किये अपना काम कर रहे थे परंतु उनके पीछे पीछे डाकू भी चल रहे थे जो उनका शानदार घोडा लेना चाहते थे |
मोका देख कर डाकुओ ने राजा को घेर लिया | राजा एक बार तो सकते में आ गया, मगर वह घबराया नहीं | वह बच निकलने की तरकीब सोच रहा था की उसके घोड़े का खुर सडक के गड्डे में फंस गया | डाकू अभी राजा पर लपकने ही वाले थे की एक और से कुछ नोजवान वहा आ पहुचे | उन्होंने देखा की एक आदमी मुसीबत में है | उन्होंने डाकुओ पर हमला कर दिया | डाकुओ यह देख कर डर गए और वहा से भाग गए |

थोड़ी देर में राजा के अंगरक्षकों का दल भी आ पहुचा | उन्होंने सभी डाकुओ की बंदी बना लिया | राजा उन नवयुवको से बड़ा प्रसन्न था क्योकि उन्होंने बिला यह जाने की वह राजा है, डाकुओ से उसकी रक्षा की | राजा ने बहुत – बहुत धन्यवाद दिया और कहा के वे उसके साथ महल तक चले |

भोर होने पर रात की घटना का समाचार सब जगह फेल गया | सारी प्रजा खुश थे की डाकू राजा का बाल भी बाका न कर सके | राज्य परिवार के लोगो, मंत्रियों, दरबारियों और सारी जनता ने नवयुवको के साहस की प्रशंशा की |

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