Jul
14

The Wolf and the Crane

One day a greedy wolf was having his dinner. He ate so hurriedly that a bone got stuck in his throat. He tried hard to throw out the bone, but he did not succeed.

He thought, “What will happen if I can’t get that bone out of my throat? I will not be able to eat and I will die of hunger.”

Then the wolf went to a crane who lived on the river bank. He said to the crane. “I have a bone stuck in my throat. You have a long neck that can reach down to the bone. Please pull out the bone. I will pay you well for your service.”

The crane agreed to help the wolf. The wolf opened his mouth wide. The crane reached down and pulled out the bone.

“Now pay me my fees,” said the crane. Read More »

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यह कहानी नन्ही ममता की है | वह पहली बार अपनी मोसी के घर आई थी जो में रहती थी | सबेरा हुआ, चिड़िया ची-ची करने लगी | ममता सो कर उठी और घर के बाहर आई | उसने अपने घर के सामने कपास का खेत था | वह एक पोधे के पास जाकर उसने पूछा – “तुम्हारा नाम क्या है?”

ममता को लगा की पोधा बोल रहा है – “मेरा नाम कपास है और तुम ने जो कपड़े पहन रखे है वो भी कपास के ही है | में खेत में ही पैदा हुई और बढ़ी हुई हु | मेरे ऊपर ये डोडिया लगी है | ये जब पकेगी, तो फुट जाएगी | इनमे कपास भरी हुई है | कपास के अंदर बीज होते है | किसान बीजो को अलग क्र लेता है इस बीजो से ही नये पोधे पैदा होते है | मेरे बीजो को बिनोले कहा जाता है | बिनोले अलग करने के बाद कपास को रुई कहते है |

ममता ने पूछा – “इसके बाद क्या करते है?”

पोधे ने उतर दिया – “रुई की पुनिया बना कर चरखे पर काती जाती है | उनसे सूत के धागे बन जाते है | इस धागों से ताना तना जाता है | अगर रंगदार ल्प्ड्स बनाना हो, तो इस धागों को पहले रंग लिया जाता है | फिर ताना तना जाता है |

फिर ताने को खड्डी पर चढ़ा कर कपड़ा बन लिया जाता है | दरी, खेस, चादर आदि इसी तरह बुनी जाती है इसी तरह खद्दर भी बुना जाता है |

कपड़ा बुनने के बड़े-बड़े कारखाने में काटने, बुनने का काम मशीनों से होता है | वे मशीने बिजली से चलती है | Read More »

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Jul
2

The Bats

A long time ago, there was a fighting between the birds and the beasts. The bats did not join either side. They thought, “We can join the birds because we can fly like them. We can join the beasts both because we have no wings and we don’t lay eggs as the birds do. So our is a special position. We shall join the winners at the right time. Right now we shall just wait and watch.

The fighting went on. At one stage it seemed the beasts would win. The bats then thought, “Now is our chance,” and joined the beasts. But some time later, the birds got the better of the beasts. The bats felt sorry for joining the beasts. Now they joined the birds.

As last the fighting came to an end. The birds and the beasts made peace and became friends. But the selfish were left alone. Both the birds and the beasts boycotted the bats. Read More »

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Jun
25

The Eagle and the Crow

An eagle had his nest high up on a mountain wall. At the roof of the mountain, there was a tree in which lived a crow.

One day the eagle swooped down from his nest and picked up a lamb from the earth. Then he flew high up and returned to his nest.

The crow saw that the eagle had performed the wonderful feat in one go. He thought, “if the eagle can perform this feat, why can’t I?”

So one day the crow flew as high as he could. Then he swooped down with great force. But instead of landing upon a lamb , he dashed against the ground. His head and beak cracked. That was the end of him. Read More »

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Jun
23

The Curious Monkey

One day a carpenter was sawing a large log to divide it into two parts. A monkey sitting on a tree was watching him. The carpenter stopped his work at lunch time. Only half a portion of the log was cut by then. So he pushed a wedge into the split and then went for lunch.

After the carpenter had gone, the monkey jumped down from the tree. He went round the log and observed it for some time. He stopped at the wedge and looked at it curiously. His curiosity mounted. So he sat down on the leg keeping it between his two legs. His long tail was dangling down through the wide split. He handled the wedge out of curiosity.

Suddenly he pulled out the wedge. As soon as the wedge was removed the split parts of the log stuck together with a snap and caught the monkey’s tail. The monkey gave out a loud cry with pain and jumped off. His tail was gone for ever. Read More »

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चाँद तारो की चादर तले

निदिया ने जब बुलाया था

हा| कोई बहुत खास

मेरे सपनों में आया था |

 

पता नहीं क्या था

क्यों था, कैसा था और क्यों था

पता था तो बस इतना

जो भी था अदभुत था

 

सुंदर थे पहाड वहा के

सजे-धजे बफिलो से

बहती थी गंगा कल-कल

प्रक्रति कर रही थी मजे

 

बस याद है तो इतना,

गुफा में था और चमक रहा था एक तेज

असमंजस की उस घड़ी में

कर ली मेने आँखे बंद

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May
27

सजा का इनाम

बहुत समय फहले की बात है | पंजाब में राजा रणजीत सिंह का राज था | वह अपनी प्रजा के सुख का बड़ा ध्यान रखते थे |

एक दिन रणजीत सिंह अपने सेनिको के साथ एक गाँव के पास से गुजर रहे थे | व तब तक काफी थक गए थे | राजा आम का पेड़ का धना पेड़ देखकर वे रुक गए और सिपाहियों से कहा – “हम यहाँ थोड़ी देर आराम करेगे |

रणजीत सिंह पेड़ के नीचे आँखे बंद करके आराम करने लगे | तभी एक पत्थर का ढेला आकर उनके सर पर लगा | रणजीत सिंह उठ बेठे | उनके सिपाही गुस्से में इधर-उधर दोड़ पड़े | किसने राजा को ढेला मारा?

सिपाही एक छोटे से लडके को पकड़ कर ले आए | एक सिपाही ने कहा, “महाराज, इसी लडके ने आपको ढेला मारा है |”

रणजीत सिंह को बड़ा आश्चर्य हुआ | उन्होंने लडके से पूछा, “बच्चे, मेने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?” तुमने मुझे पत्थर क्यों मारा?”

बालक डरते-डरते बोला, “महाराज, मेने आपको ढेला नहीं मारा था | में तो आम तोड़ने के लिए पेड़ पर ढेला मार रहा था | मैने आपको देखा नहीं था | गलती से ढेला आपको लग गया |”

सिपाही बोला, “यह झूठ बोल रहा है महाराज | इस शरारती लडके को सजा दीजिए |” Read More »

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May
25

अभागा कोन

राजा के दरबार में चापलूसों की भीड़ लगी रहती थी | राजा को अपनी तारीफ सुनना बहुत अच्छा लगता था | अत: सभी दरबारी राजा को खुश करने में लगे रहते थे | राजा को अपनी प्रजा के प्रति कोई रूचि न थी | बुद्धिमान और विवेकी मंत्रियो को कोई पूछाता तक न था |

राजा के दरबारियों में एक दरबारी जिसका नाम बलबीर सिंह था वो राजा के बहुत ही मुंह लगा हुआ था | एक बार राज्य के मुख्य पुजारी से बलबीर सिंह का झगड़ा हो गया | उसने मन-ही-मन पुजारी से शत्रुता ठान ली | वह उससे बदला लेने का अवसर तलाशने लगा और मोका मिलते ही उसने राजा के कान भर दिए, “महाराज दुर्गा मंदिर का मुख्य पुजारी बड़ा अभागा है | सुबह-सुबह उसका मुंह देख लेने से दिन भर कुछ न कुछ बुरा अबश्य होता है |

“नहीं, नहीं | ऐसा नहीं हो सकता |” राजा के स्वर में आश्चर्य था |

“आपको विश्वास न हो महाराज तो आप स्वंय इस बात को आजमा कर देख लीजिए”, बलबीर सिंह न अपनी बात पर जोर देते हुए कहा |

राजा ने दुर्गा मंदिर के मुख्य पुजारी को बुलवा भेजा और आज्ञा दी की अगले दिन सुबह सबसे पहले वह उसका मुंह देखेगे |

अगले दिन राजा ने सुबह – सुबह पुजारी का मुंह देखा | संयोग की बात की उस दिन कार्य की अधिकता और व्यस्तता के कारण राजा समय पर भोजन न कर सका | शाम होते ही राजा ने पुजारी को फांसी दे देने का हुक्म दे दिया |

पुजारी ने जब यह बात सुनी तो बह बड़ा हेरान और दुखी हुआ | उसे दरअसल समझ ही नहीं आया था | की क्यों राजा ने उसे बुलाया है और रातभर महल में रखा | सारी बात सुन और समझकर पुजारी ने राजा से फरियाद की, “महाराज, मेने क्या अपराध किया है जो आप में मुझे यह सजा सुना दी ?”

“तुम अभोग हो | यही तुम्हारा अपराध है |” राजा ने कहा | Read More »

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May
23

रंगा सियार

एक सियार था | एक दिन वन में उसे कुछ खाने का मिला और रात हो गई थी | जब सियार से भूख बरदाश न हुई तो वो नगर की और चल पड़ा | सर्दियों की रात थी इसलिए सभी घरो के दरवाजे बंद थे | सियार गली गली भटकता रहा |

कभी घुमने के बाद एक धोबी के घर का दरवाजा खुला था | सियार उसमे घुस गया | सामने गधे बंधे हुए थे | एक नाद में कपड़े भीग रहे थे और दुसरे नांद से गंध आ रही थी | सियार ने सोचा – “दूसरी नांद में पेट-पूजा का कुछ सामान होगा |” वह उसमे कूदा और दूसरी नांद में गिर गया | उस नांद में नील घुला हुआ था | सियार का सारा शरीर नीला हो गया | परन्तु पानी इतना ठंडा था की उसे बहुत ठंड लगने लगा और वहा से जंगल की और भागा |

झाड़ियो में जाकर वह सो गया और सुबह होते ही वह पानी पीने नाले पर गया | पानी पीते समय उसने अपनी सुरत पानी में देखी | वह बहुत खुश हुआ |

इतने में वहा और कई जानवर आए | सियार ने रोब जमाते हुए कहा – “में नीलांबर हु | भगवान ने मुझे जंगल का राजा बनाकर भेजा है |” Read More »

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May
30

कीमत बचपन की

ज़िंदगी की कीमत चुकाता बचपन ..,
झूठन से भूख मिटाता बचपन …!

बेचैनी के बिस्तर पे करवट बदलता ..,
फूटपाथ पे सपनें सजाता बचपन …!

पत्थर के टुकड़ों मैं खिलोने देखता ..,
नन्हे से दिल को समझाता बचपन …!

भीख क कटोरे मैं मजूबूरी को भरकर ..,
ज़रूरत की प्यास बुझाता बचपन …!

कही पिज़्ज़ा, आइसक्रीम से खुश होता बचपन ..,
तो कही रोटी के लिए तडपता बचपन ..!

 

क्या होता फिर भी प्यारा बचपन??????? ..,

 

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